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Child Development
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-Conventional Level) के द्वितीय चरण—'विवेक और सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास' (Universal Ethical Principles Orientation)—की दार्शनिक और तात्विक गहराई का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, इस चरण में व्यक्ति के नैतिक निर्णय और न्याय की अवधारणा के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?

Detailed Explanation

लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, उत्तर-पारंपरिक स्तर का छठा और अंतिम चरण 'विवेक और सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास' (Universal Ethical Principles Orientation) नैतिक विकास की सर्वोच्च अवस्था है। इस चरण में व्यक्ति बाहरी सामाजिक नियमों, कानूनों या प्राधिकरणों से परे जाकर अपने स्वयं के अंतःकरण (Conscience) और सार्वभौमिक न्याय के सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेता है। ये सिद्धांत मानव अधिकारों, समानता और मानवीय गरिमा पर आधारित होते हैं। यदि कोई प्रचलित कानून मानवाधिकारों या न्याय के खिलाफ है, तो इस स्तर का व्यक्ति उस कानून का उल्लंघन करने का नैतिक साहस भी रखता है। इस मनोवैज्ञानिक और नैतिक सिद्धांत के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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