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Child Development
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विशिष्ट अधिगम अक्षमताओं (Specific Learning Disabilities) के अंतर्गत मौखिक और लिखित भाषा के उत्पादन, वाक्य-विन्यास (Syntax), विचारों को क्रमिक रूप से व्यक्त करने में असमर्थता तथा हस्तलेखन से जुड़े यांत्रिक और गत्यात्मक विकारों के अतिरिक्त, यदि कोई शिक्षार्थी विशेष रूप से शब्दों की वर्तनी (Spelling) में बार-बार अशुद्धियाँ करता है, वाक्यों में शब्दों का क्रम उलट देता है और लेखन प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक मानसिक थकान व निराशा का अनुभव करता है, तो इस न्यूरोलॉजिकल विकार को किस विशिष्ट श्रेणी के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाएगा और इसके प्रभावी उपचारात्मक उपागम के रूप में निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक प्रामाणिक है?

Detailed Explanation

डिसग्राफिया एक विशिष्ट अधिगम अक्षमता है जो मुख्य रूप से लेखन कौशल, वर्तनी, हस्तलेखन और विचारों को लिखित रूप में संकलित करने की क्षमता को प्रभावित करती है। इस विकार से पीड़ित बच्चों के लिए बहुसंवेदी शिक्षण रणनीतियाँ (जैसे उंगलियों से रेत पर लिखना, बनावट वाले अक्षरों का उपयोग) और ग्राफिक ऑर्गेनाइजर्स बहुत प्रभावी माने जाते हैं। इसके बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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Related Questions

प्याजे का मानना है कि बच्चे अपने मन में मानसिक संरचना का निर्माण करते हैं। उन्हें क्या कहा जाता है? पियाजे के अनुसार, 'औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) का मुख्य संज्ञानात्मक गुण क्या है? अधिगम के पठार (Plateaus of Learning) की स्थिति उत्पन्न होने के मुख्य कारणों का विश्लेषण करते समय, मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से निम्नलिखित में से कौन-सा कारक इस स्थिति के लिए सबसे अधिक उत्तरदायी माना जाता है, तथा इस दौरान अधिगम वक्र में क्या परिवर्तन देखा जाता है? समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, बौद्धिक अक्षमता (Intellectual Disability) या ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) से ग्रसित बालकों के समावेशन हेतु 'सार्वभौमिक डिज़ाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) के अंतर्गत 'अभिव्यक्ति के बहु-साधन' (Multiple Means of Expression) के सिद्धांत का पालन करते हुए एक शिक्षक को कक्षा-कक्षीय मूल्यांकन एवं शिक्षण प्रक्रिया में निम्नलिखित में से किस रणनीतिक उपागम को प्राथमिकता देनी चाहिए? बाल विकास के अध्ययन में 'अभिवृद्धि' (Growth) और 'विकास' (Development) की संकल्पनाओं, उनके पारस्परिक अंतर तथा विकास के बुनियादी सिद्धांतों (जैसे- 'समीप-दूरीय क्रम' या प्रॉक्सिमोडिस्टल ट्रेंड और 'मस्तक-पुच्छीय क्रम' या सेफेलोकॉडल ट्रेंड) का गहन विश्लेषणात्मक अध्ययन करने पर, यदि कोई शोधकर्ता यह प्रेक्षण करता है कि शारीरिक आकार, भार और लंबाई जैसे मात्रात्मक परिवर्तन एक निश्चित आयु सीमा के पश्चात रुक जाते हैं, किंतु मानसिक, संवेगात्मक और सामाजिक क्षमताओं का गुणात्मक विस्तार जीवनपर्यंत विभिन्न अवस्थाओं के साथ गतिशील रहता है और यह संपूर्ण प्रक्रिया आनुवंशिकता एवं पर्यावरण की जटिल अंतर्क्रिया तथा व्यक्तिगत भिन्नताओं के नियमों द्वारा शासित होती है, तो बाल विकास के इस वैज्ञानिक प्रतिमान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है?
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