BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
28 views

नगर प्रशासन का प्रमुख अधिकारी कौन होता था जिसकी जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना थी?

Detailed Explanation

कोतवाल नगर का मुख्य प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था अधिकारी था।
Share:

Related Questions

→ सत्रहवीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में पुर्तगालियों और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच भारत में प्रभुत्व स्थापित करने की प्रतिस्पर्धा और व्यापारिक अधिकारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1612 में लड़े गए 'स्वाली के नौसैनिक युद्ध' (Battle of Swally) में ब्रिटिश कप्तान थॉमस बेस्ट के नेतृत्व वाली नौसेना ने पुर्तगालियों की मजबूत समुद्री ताकत को पराजित किया, जिसके परिणामस्वरूप मुगल दरबार पर गहरा प्रभाव पड़ा और सम्राट जहांगीर ने अंग्रेजों को सूरत में स्थायी कारखाना स्थापित करने की शाही अनुमति प्रदान की। 2. पुर्तगाली गवर्नर नीनो डी कुन्हा ने वर्ष 1530 में पुर्तगाली राजधानी को कोचीन से स्थानांतरित कर गोवा बनाया, जो आगे चलकर भारत में उनके साम्राज्य का मुख्य प्रशासनिक, धार्मिक और वाणिज्यिक केंद्र बन गया। 3. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत के साथ व्यापार करने का एकाधिकार सर्वप्रथम वर्ष 1600 में महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा प्रदान किया गया था, और जब वर्ष 1615 में आधिकारिक राजदूत के रूप में सर थॉमस रो मुगल दरबार में पहुँचे, तो उन्हें बंगाल और बिहार में बिना किसी सीमा शुल्क के असीमित व्यापार करने का विशेष अधिकार तुरंत प्राप्त हो गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में क्रांतिकारियों के नेतृत्व, सैन्य गतिविधियों और ब्रिटिश प्रतिरोध के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने संभाला था, जिन्होंने स्वयं को पेशवा घोषित किया और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष के लिए अजीमुल्ला खां को अपना मुख्य सलाहकार और राजनीतिक रणनीतिकार नियुक्त किया था। 2. तात्या टोपे ने नाना साहब के सेनापति के रूप में कानपुर की सेना का प्रभावी सैन्य नेतृत्व किया, तथा ब्रिटिश जनरल कॉलिन कैंपबेल और हैवलॉक की संयुक्त सेना के साथ भीषण संघर्ष के उपरांत ग्वालियर से आकर कानपुर पर पुनः अधिकार करने का सफल प्रयास किया था। 3. सती चौरा घाट की घटना के उपरांत कानपुर में ब्रिटिश अधिकारियों और आत्मसमर्पण करने वाले यूरोपीय नागरिकों के साथ हुए संघर्ष में अजीमुल्ला खां की प्रमुख कूटनीतिक भूमिका थी, जिन्होंने बाद में विद्रोह के प्रचार हेतु विदेशों में भी प्रयास किए थे। 4. कानपुर में विद्रोह के पूर्ण दमन के पश्चात ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज ने नाना साहब और तात्या टोपे को गिरफ्तार कर लिया था, जहाँ नाना साहब को तोप से उड़ा दिया गया और तात्या टोपे को सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → छठी शताब्दी ईसा पूर्व में 'सोलह महाजनपदों' के उदय और मगध साम्राज्य के अन्य महाजनपदों पर वर्चस्व स्थापित करने के ऐतिहासिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मगध की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुरक्षित थी, जिसे आसानी से भेदा नहीं जा सकता था। 2. मगध साम्राज्य की भौगोलिक स्थिति ऐसे क्षेत्र में थी जहाँ प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क की खानें उपलब्ध थीं, जिससे उन्नत किस्म के अस्त्र-शस्त्र और कृषि उपकरण बनाना संभव हुआ। 3. मगध के उत्कर्ष में गंगा, सोन और चंबल जैसी नदियों के जलमार्गों का होना प्रमुख कारण था, जिससे व्यापारिक सुगमता और सेना की त्वरित आवाजाही सुनिश्चित हुई। 4. बिम्बिसार और अजातशत्रु जैसे महत्त्वाकांक्षी शासकों ने वैवाहिक संधियों और आक्रामक विस्तार की नीतियों के साथ-साथ सर्वप्रथम अपनी सेना में हाथियों के सामरिक महत्व को समझा और उसका बड़े पैमाने पर प्रयोग किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, पल्लव वंश के स्थापत्य, चालुक्यों के साथ उनके संघर्ष तथा वर्धन राजवंश के समकालीन राजनीतिक परिदृश्य के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने शासन के प्रारंभिक चरण में जैन धर्म का अनुयायी होने के बाद तमिल संत अप्पर के प्रभाव में आकर शैव धर्म स्वीकार कर लिया था, और उसने 'मत्तविलास प्रहसन' नामक प्रसिद्ध हास्य नाटक की रचना की थी। 2. पल्लव नरेश नरसिंहवर्मन प्रथम ने चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय को पराजित कर उसकी राजधानी वातापी पर अधिकार कर लिया था और 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण की थी, जिसका विस्तृत उल्लेख महाबलीपुरम के रथ मंदिरों और ऐतिहासिक साक्ष्यों में मिलता है। 3. बादामी के चालुक्य वंश के शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्द्धन को पराजित किया था, और इस ऐतिहासिक घटना की जानकारी हमें एहोल प्रशस्ति से मिलती है जिसकी रचना रवि कीर्ति ने की थी। 4. महाबलीपुरम (मामलपुरम) के प्रसिद्ध एकात्मथ ( monolithic) 'रथ मंदिरों' का निर्माण पल्लव शासक राजसिंह (नंदिवर्मन द्वितीय) के शासनकाल में करवाया गया था, जिसमें सबसे बड़ा युधिष्ठिर रथ और सबसे छोटा द्रौपदी रथ है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में 'भक्ति और सूफी आंदोलन' के प्रसार, उनकी दार्शनिक मान्यताओं तथा समाज पर पड़े प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण भारत के अलवार (वैष्णव) और नयनार (शैव) संतों ने भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाया, और इन्होंने अपनी रचनाओं में जाति व्यवस्था के कठोर बंधनों का कड़ा विरोध करते हुए स्त्री और शूद्रों के लिए भी भक्ति के द्वार खोल दिए थे। 2. चिश्ती सिलसिले के प्रसिद्ध संत शेख निजामुद्दीन औलिया ने योग क्रियाओं और संगीत (समां) को स्वीकार किया था, जिसके कारण उन्हें 'महबूब-ए-इलाही' कहा गया और उन्होंने दिल्ली सल्तनत के कई सुल्तानों के राजदरबारों में उच्च पद स्वीकार किए थे। 3. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को Ramananda ने प्रसारित किया, जिन्होंने जातिगत भेदभाव को दरकिनार करते हुए कबीर, रैदास और सेना जैसे विभिन्न पृष्ठभूमियों के संतों को अपना शिष्य बनाया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.