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History of India
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औरंगजेब ने "संगीत के जनाजे" के बाद भी किस वाद्य यंत्र को अपना व्यक्तिगत शौक बनाए रखा?

Detailed Explanation

औरंगजेब स्वयं वीणा बजाने में निपुण था और इसे पसंद करता था।
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क्रांतिकारी आंदोलन के इतिहास और प्रमुख गुप्त संगठनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1904 में विनायक दामोदर सावरकर (वी. डी. सावरकर) द्वारा स्थापित 'मित्र मेला' को ही आगे चलकर 'अभिनव भारत सोसाइटी' के रूप में पुनर्गठित किया गया था, जो महाराष्ट्र में गुप्त क्रांतिकारी गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बना। 2. वर्ष 1924 में कानपुर में आयोजित एक ऐतिहासिक सम्मेलन के दौरान सचिन्द्रनाथ सन्याल, रामप्रसाद बिस्मिल और चंद्रशेखर आजाद द्वारा 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य उत्तर भारत में सशस्त्र क्रांति के माध्यम से संघीय गणराज्य की स्थापना करना था। 3. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में हुई गुप्त बैठक में भगवती चरण बोहरा और चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में HRA का नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया, जिसमें समाजवाद को संगठन के आधिकारिक एजेंडे में शामिल किया गया। 4. वर्ष 1929 में लाहौर षड्यंत्र केस के दौरान भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली में बम फेंका था, और इस घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश पुलिस ने चंद्रशेखर आजाद को भी गिरफ्तार कर उसी मुकदमे में फाँसी दे दी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित विभिन्न संगठनों और उनके वैचारिक तथा संस्थागत विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1867 में आत्माराम पांडुरंग द्वारा स्थापित 'प्रार्थना समाज' ने महाराष्ट्र में धार्मिक सुधारों के साथ-साथ अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और दलितोद्धार जैसे सामाजिक मुद्दों पर विशेष बल दिया, तथा न्यायमूर्ती महादेव गोविंद रानाडे इस संस्था के प्रमुख वैचारिक स्तंभ थे। 2. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती देना, शूद्रों और अतिशूद्रों को पुरोहिती पाखंड से मुक्त कराना तथा उनकी बौद्धिक व सामाजिक स्वतंत्रता के लिए एक वैकल्पिक धार्मिक-सामाजिक व्यवस्था का निर्माण करना था। 3. स्वामी विवेकानंद द्वारा वर्ष 1897 में स्थापित 'रामकृष्ण मिशन' ने प्राचीन वेदांत दर्शन के आध्यात्मिक मोक्ष तक ही स्वयं को सीमित रखा तथा ब्रिटिश काल में आधुनिक पश्चिमी शिक्षा और राहत कार्यों से पूरी तरह अलगाव बनाए रखा। 4. हेनरी विवियन डेरोज़ो के नेतृत्व में प्रारंभ 'यंग बंगाल आंदोलन' (Young Bengal Movement) ने रूढ़िवादी हिंदू समाज की कुरीतियों का कड़ा विरोध करते हुए स्वतंत्रता, समानता और तार्किकता के पश्चिमी आदर्शों का प्रसार किया, किंतु यह आंदोलन शहरी बुद्धिजीवियों तक ही सीमित रहकर जनसमर्थन जुटाने में विफल रहा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सूफी संतों के सिलसिले मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित थे — बा-शरा (जो इस्लामिक शरिया कानून का सख्ती से पालन करते थे) और बे-शरा (जो शरिया कानून से पूरी तरह बंधे नहीं थे, जिन्हें 'कलंदर' भी कहा जाता था)। 2. भारत में चिश्ती सिलसिले की स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती द्वारा की गई थी, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य के संरक्षण और शाही दरबारों में उच्च पदों को स्वीकार करने की नीति को अनिवार्य माना ताकि वे राजनीतिक शक्ति के माध्यम से समाज में सुधार कर सकें। 3. भक्ति आंदोलन के महान संत रामानंद ने उत्तर भारत में भक्ति के संदेश का व्यापक प्रसार किया, और उनके शिष्यों में कबीर (जुलाहा), रैदास (मोची), सेन (नाई) तथा पीपा (राजपूत शासक) जैसे विभिन्न जातियों और पृष्ठभूमियों के लोग शामिल थे। 4. वारकरी संप्रदाय महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र था, जिसके अनुयायी भगवान विठ्ठल (विठोबा) की पूजा करते थे और इस संप्रदाय के प्रसिद्ध संतों में ज्ञानेश्वर, नामदेव तथा तुकाराम का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हर्षवर्धन के शासनकाल में मौखरी साम्राज्य की राजधानी कन्नौज को वर्धन साम्राज्य की मुख्य राजनीतिक धुरी बनाया गया था, जहाँ चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग ने लंबे समय तक निवास किया था। 2. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, और इस ऐतिहासिक विजय का विस्तृत विवरण हमें एहोल प्रशस्ति (जिसे रविचर्ति द्वारा रचित किया गया था) से प्राप्त होता है। 3. पल्लव नरेश नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी पर अधिकार कर लिया था और 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण की थी, तथा इसी के शासनकाल में मामल्लपुरम (महाबलीपुरम) में एकात्म रथ मंदिरों का निर्माण आरंभ हुआ था। 4. चोल साम्राज्य की स्थानीय स्वशासन प्रणाली, विशेष रूप से 'उर', 'सभा' और 'नगरम्' का विस्तृत और प्रामाणिक विवरण हमें प्रसिद्ध उत्तरमेरूर अभिलेख (राजराज प्रथम के शासनकाल का) से प्राप्त होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, राजस्व सुधारों और सैन्य संगठनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शेरशाह सूरी द्वारा प्रारंभ की गई 'रैयतवारी' तर्ज पर आधारित भूमि सर्वेक्षण और माप की पद्धति को अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल ने 'दहसाला' (या आयन-ए-दहसाला) व्यवस्था के रूप में विकसित किया, जिसके अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और औसत मूल्यों के आधार पर मालगुजारी का निर्धारण किया गया था। 2. जहाँगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में 'दुस्पासिह-अस्पासिह' (दो या तीन घोड़ों वाली सैनिक रैंक) प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके तहत मनसबदारों को अपने मूल सवार पद से अधिक घोड़े रखने की अनुमति दी जाती थी, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त भत्ता मिलता था। 3. शाहजहाँ के काल में वास्तुकला और चित्रकला ने अपने चरमोत्कर्ष को छुआ, किंतु इस दौरान मनसबदारी प्रणाली में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए 'चाँद-सितारा' और 'मशरूत' (सशर्त पद) जैसी नई व्यवस्थाएँ लागू की गईं, जिससे सम्राट के व्यक्तिगत खर्चों में भारी वृद्धि हुई। 4. औरंगजेब के शासनकाल में मनसबदारों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण 'जागीर संकट' (Jagir Crisis) उत्पन्न हो गया, क्योंकि उपलब्ध खाली जागीरें (पैबाकी) कम पड़ गईं और मनसबदारों को उनकी जागीर से समय पर राजस्व प्राप्त नहीं हो पा रहा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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