त्वरित लिंक्स
History of India
15 views
जहाँगीर के समय में "मलिक अंबर" ने दक्कन में कौन सी सैन्य पद्धति अपनाई थी?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मलिक अंबर अपनी छापामार युद्ध रणनीति के लिए प्रसिद्ध था।
Related Questions
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका तथा उनके सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को नवाब घोषित कर किया था, और उन्होंने ब्रिटिश सेनापतियों (हेवलॉक और आउट्राम) के विरुद्ध कड़ा प्रतिरोध करते हुए अंत में नेपाल की ओर प्रस्थान किया था।
2. 'डंका शाह' के नाम से प्रसिद्ध मौलवी अहमदुल्लाह शाह मूल रूप से फैजाबाद के निवासी थे, जिन्होंने चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित किया था और अंग्रेजों ने उन पर पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था।
3. बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश सत्ता के समक्ष आत्मसमर्पण करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया था, क्योंकि उन्हें अवध की रियासत का एक हिस्सा पेंशन के रूप में देने का वादा किया गया था।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंततः पुवायाँ (रोहिलखंड) के एक स्थानीय जमींदार के साथ हुए विश्वासघात के कारण ब्रिटिश सेना द्वारा घेर लिया गया और उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारतीय सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के वैचारिक विकास, संस्थागत स्वरूप और उनके नेताओं के दृष्टिकोण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने मध्यकालीन पुराणों, मूर्तिपूजा और बहुदेववाद का खंडन करते हुए वेदों को अपौरुषेय एवं समस्त ज्ञान का मूल स्रोत माना, तथा 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए जन्म-आधारित जाति व्यवस्था के स्थान पर गुण, कर्म और स्वभाव पर आधारित वर्ण व्यवस्था की वकालत की।
2. ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व, धार्मिक पाखंड और सामाजिक असमानता को खुली चुनौती देते हुए शूद्रों, अतिशूद्रों और महिलाओं की बौद्धिक एवं सामाजिक स्वतंत्रता के लिए एक वैकल्पिक धार्मिक-सामाजिक व्यवस्था का निर्माण किया, और वे आर्य समाज के वेदों की सर्वोच्चता संबंधी विचारों से पूरी तरह सहमत थे।
3. केशव चंद्र सेन के प्रयासों से प्रेरित होकर बॉम्बे में वर्ष 1867 में स्थापित 'प्रार्थना समाज' ने आत्माराम पांडुरंग, महादेव गोविंद रानाडे और आर. जी. भंडारकर के नेतृत्व में अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह, स्त्री शिक्षा तथा छुआछूत के उन्मूलन जैसे सामाजिक सुधारों पर विशेष बल दिया।
4. यंग बंगाल आंदोलन के प्रणेता हेनरी विवियन डेरोज़ियो ने हिंदू कॉलेज के अपने विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन, तर्कशीलता और पारंपरिक रूढ़िवादिताओं के विरुद्ध विद्रोह की भावना का संचार किया, जिससे उन्हें व्यापक सामाजिक समर्थन और रूढ़िवादी समाज का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में विद्रोह का नेतृत्व करने वाली बेगम हजरत महल तथा 'डंका शाह' के नाम से प्रसिद्ध मौलवी अहमदुल्लाह शाह के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ की रेजिडेंसी के खिलाफ ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया था।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने फैजाबाद और अवध क्षेत्र में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया था और चिनहट के युद्ध में हेनरी लॉरेंस के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को करारी शिकस्त दी थी।
3. ब्रिटिश सेना द्वारा लखनऊ पर पुनः अधिकार करने के पश्चात बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था और उन्हें पेंशन के साथ कोलकाता में रहने की अनुमति दे दी गई थी।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था, और अंततः पुवियाँ (पवैन) के एक स्थानीय जागीरदार के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों ने उनकी हत्या कर दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोही गतिविधियों के नेतृत्व, मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की स्थिति तथा विद्रोह के दमन से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ से आए विद्रोही सिपाहियों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पर अधिकार करने के पश्चात वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अनिच्छा से ही सही, इस विद्रोह का 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किया गया था।
2. दिल्ली में विद्रोहियों की वास्तविक सैन्य कमान और निर्णय लेने की शक्ति सम्राट बहादुर शाह जफर के हाथों में थी, जिन्होंने अत्यंत कुशल सैन्य रणनीति बनाते हुए ब्रिटिश सेनापति जॉन निकलसन को पहले ही चरण में पराजित कर दिया था।
3. सितम्बर 1857 में ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार करने के उपरांत हडसन (Hodson) ने हुमायूं के मकबरे से बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार किया तथा उनके दो पुत्रों और एक पौत्र को सरेआम गोली से उड़ा दिया था।
4. विद्रोह के दमन के पश्चात ब्रिटिश सरकार ने बहादुर शाह जफर पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया और उन्हें दोषी ठहराते हुए रंगून (मर्मा) निर्वासित कर दिया, जहाँ वर्ष 1862 में उनकी मृत्यु हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति और लॉर्ड कैनिंग द्वारा मुगल सम्राट के साथ किए गए अपमानजनक व्यवहार ने भारतीय शासकों और जनमानस में गहरा असंतोष पैदा किया था।
2. सामाजिक और धार्मिक सुधारों के तहत अंग्रेजों द्वारा 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act), जिसके तहत धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को उसकी पैतृक संपत्ति से वंचित करने के नियम को बदल दिया गया था, को रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाई धर्म अपनाने को प्रोत्साहित करने वाला षड्यंत्र माना।
3. आर्थिक कारणों में ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों द्वारा भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का पूर्ण विध्वंस शामिल था, किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में भारी भू-राजस्व व्यवस्था (जैसे स्थायी बंदोबस्त और रयतवाड़ी व्यवस्था) ने केवल किसानों को प्रभावित किया, जबकि पारंपरिक जमीदार और तालुकदार वर्ग इस आर्थिक शोषण से पूरी तरह अछूते रहे थे।
4. सेना के स्तर पर धार्मिक और सामाजिक कारणों से उपजा असंतोष भी इस विद्रोह का एक बड़ा कारक था, जिसमें 1856 का 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) शामिल था, जिसके तहत भारतीय सैनिकों को समुद्र पार विदेशों में भी सेवा देने के लिए बाध्य किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.