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History of India
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जहाँगीर के समय में "मलिक अंबर" ने दक्कन में कौन सी सैन्य पद्धति अपनाई थी?

Detailed Explanation

मलिक अंबर अपनी छापामार युद्ध रणनीति के लिए प्रसिद्ध था।
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सत्रहवीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों के प्रवेश और पुर्तगाली-ब्रिटिश संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जहांगीर के दरबार में आने वाला प्रथम अंग्रेज दूत विलियम हॉकिंस था, जो 'हेक्टर' जहाज लेकर 1608 में सूरत पहुँचा था, किंतु पुर्तगालियों के तीव्र विरोध और शाही दरबार में उनके प्रभाव के कारण जहांगीर ने अंग्रेजों को सूरत में स्थायी कारखाना स्थापित करने की अनुमति तुरंत प्रदान नहीं की थी। 2. वर्ष 1612 में स्वाली के युद्ध (Battle of Swally) में ब्रिटिश कमांडर थॉमस बेस्ट ने पुर्तगाली नौसेना को पराजित किया, जिससे प्रभावित होकर जहांगीर ने अंग्रेजों को सूरत में अपनी पहली स्थायी फैक्ट्री खोलने का शाही फरमान जारी कर दिया। 3. पुर्तगालियों ने भारत में अपने एकाधिकार को बनाए रखने के लिए 'कार्टाज' (Cartaz) प्रणाली लागू की थी, जिसके तहत अरब सागर और हिंद महासागर से गुजरने वाले प्रत्येक भारतीय और एशियाई जहाज को पुर्तगाली गवर्नरों से लाइसेंस लेना अनिवार्य था, और अक्साइज शुल्क के रूप में भारी कर चुकाना पड़ता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? उन्नीसवीं शताब्दी के सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और 'ब्रह्म समाज' (1828) का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, जातिगत कठोरताओं और सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का तार्किक विरोध करते हुए एकेश्वरवाद की स्थापना करना था। 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और उन्होंने पाखंड खंडिनी पताका फहराते हुए हिंदू समाज को शुद्ध करने के लिए 'शुद्धि आंदोलन' की शुरुआत की थी। 3. प्रार्थना समाज के संस्थापक आत्माराम पांडुरंग थे, जिन्हें एम. जी. रानाडे और आर. जी. भंडारकर जैसे महान सुधारकों का समर्थन प्राप्त था, और इस संस्था ने मुख्य रूप से अंतर-जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और महिला शिक्षा के क्षेत्र में कार्य किया। 4. यंग बंगाल आंदोलन के प्रणेता हेनरी विवियन डेरोज़ियो ने पारम्परिक रूढ़ियों पर तीखा प्रहार करते हुए सामाजिक सुधारों की पुरजोर वकालत की, और उन्हें कलकत्ता के हिन्दू कॉलेज के छात्रों का पूर्ण समर्थन प्राप्त होने के कारण अपने सुधारवादी विचारों को लागू करने में भारी राजनीतिक सफलता मिली थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुए घटनाक्रमों और उनके नेतृत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए ऐतिहासिक जन-विद्रोह का नेतृत्व एक प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेता पीर अली खाँ ने किया था, जिनके नेतृत्व में हुए इस संघर्ष के दौरान अफीम के एक ब्रिटिश अधिकारी डॉ. लॉयल की हत्या कर दी गई थी। 2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं देशी पैदल सेना के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और वे सोन नदी पार करके सीधे शाहाबाद जिले में प्रवेश कर गए थे, जहाँ उन्होंने बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व को स्वीकार किया था। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा क्षेत्र में विद्रोह के दौरान यूरोपीय अधिकारियों को स्थानीय जनता और विद्रोही सैनिकों के भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था, तथा छपरा (सारण) में मोहम्मद हुसैन खान के नेतृत्व में स्थानीय विद्रोही सैनिकों ने ब्रिटिश सत्ता को खुली चुनौती दी थी। 4. आरा (शाहाबाद) में बाबू कुंवर सिंह की मृत्यु के तुरंत बाद उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष को समाप्त करते हुए ब्रिटिश सत्ता के समक्ष पूर्ण समर्पण कर दिया था और कभी सशस्त्र संघर्ष जारी नहीं रखा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभालने वाले नाना साहब, उनके सैन्य सलाहकार तात्या टोपे और मुख्य रणनीतिकार अजीमुल्ला खां के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व करते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया और ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूग व्हीलर को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश कर दिया। 2. तात्या टोपे ने कानपुर के पतन के बाद ग्वालियर में सिंधिया सेना के एक बड़े भाग को अपने पक्ष में मिला लिया और रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर झांसी तथा तांत्या टोपे के नेतृत्व में कालपी के युद्ध में अंग्रेजों के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया। 3. अजीमुल्ला खां ने विद्रोह की कूटनीतिक और राजनीतिक रणनीतियों के तहत लंदन में ब्रिटिश अधिकारियों से पेंशन बहाल करने की विफल कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद, तुर्की के सुल्तान और क्रीमिया युद्ध के अनुभव का उपयोग कर विद्रोही ताकतों के बीच समन्वय स्थापित किया था। 4. कानपुर में असफल होने के बाद नाना साहब नेपाल की तराई की ओर चले गए, जबकि तात्या टोपे को उनके एक विश्वसनीय जमींदार मित्र मान सिंह के विश्वासघात के कारण पकड़ लिया गया और अप्रैल 1859 में शिवपुरी में फांसी दे दी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सत्रहवीं शताब्दी के दौरान मराठा साम्राज्य और छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रशासनिक व्यवस्था, सैन्य संगठन तथा कर प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी के केंद्रीय प्रशासन में 'अष्टप्रधान' नामक मंत्रिपरिषद का गठन किया गया था, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे छत्रपति के प्रति उत्तरदायी था और इस व्यवस्था में 'पंडितराव' धार्मिक मामलों, दान तथा न्याय का प्रमुख अधिकारी होता था, जबकि 'न्यायाधीश' सैन्य मामलों का सर्वोच्च सेनापति होता था। 2. शिवाजी की राजस्व प्रणाली मुख्य रूप से मलिक अंबर की भू-राजस्व व्यवस्था पर आधारित थी, जिसके तहत भूमि की पैमाइश कर कुल उपज का 33% (जिसे बाद में बढ़ाकर 40% कर दिया गया था) राज्य के कर के रूप में निर्धारित किया गया था। 3. मराठा साम्राज्य द्वारा पड़ोसी मुगल क्षेत्रों और अन्य राज्यों से उनकी सुरक्षा के बदले वसूले जाने वाले करों में 'चौथ' कुल राजस्व का 25% होता था जो कि सुरक्षा की गारंटी के रूप में लिया जाता था, जबकि 'देशमुखी' कर 10% था जो उस क्षेत्र पर पारंपरिक वंशागत अधिकारों (सरदेशमुखी) के दावे के रूप में वसूला जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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