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Indian Polity
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के भाग XIV के अंतर्गत अनुच्छेद 315 से 323 तक संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों का प्रावधान किया गया है, और दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर संसद विधि द्वारा उन राज्यों के लिए 'संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग' (JSPSC) का गठन कर सकती है, जो एक संवैधानिक निकाय है।
  2. 2. संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है; किंतु संघ आयोग के सदस्यों को उनके पद से केवल राष्ट्रपति ही हटा सकते हैं, जबकि राज्य आयोग के सदस्यों को हटाने की शक्ति भी केवल राष्ट्रपति के पास होती है, राज्यपाल के पास नहीं।
  3. 3. संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी सदस्य को उसके पद से 'कदाचार' (Misbehavior) के आधार पर हटाने के लिए राष्ट्रपति द्वारा मामले को उच्चतम न्यायालय के पास जाँच हेतु भेजा जाना अनिवार्य होता है, और यदि उच्चतम न्यायालय अपनी जाँच के पश्चात उस सदस्य को हटाने की संस्तुति कर देता है, तो राष्ट्रपति के लिए उस संस्तुति को मानना अनिवार्य (बध्यकारी) होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

भारतीय संविधान के भाग XIV के अनुच्छेद 315 से 323 में संघ और राज्यों के लोक सेवा आयोगों का विस्तृत वर्णन किया गया है। कथन 1 सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 315 के तहत राज्यों के अनुरोध पर संसद विधि द्वारा संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) का गठन कर सकती है, और यह एक सांविधिक (Statutory) निकाय है न कि मूल संवैधानिक निकाय, परंतु इसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 315(2) में ही निहित है। कथन 2 सत्य है; राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु उन्हें हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास होती है, राज्यपाल के पास नहीं। कथन 3 भी पूर्णतः सत्य है; अनुच्छेद 317 के अनुसार कदाचार के आधार पर यूपीएससी या एसपीएससी के किसी सदस्य को हटाने के लिए उच्चतम न्यायालय की जाँच और उसकी संस्तुति राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी होती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जाएं।
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