त्वरित लिंक्स
Indian Polity
22 views
भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित 'सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय' के आदर्श को फ्रांसीसी क्रांति (1789) से प्रेरित होकर शामिल किया गया था, जबकि 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्श रूसी क्रांति (1917) से लिए गए हैं।
- 2. बेरुबारी यूनियन वाद (1960) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का अंग नहीं है, इसलिए इसमें संशोधन नहीं किया जा सकता; किंतु केशवानंद भारती वाद (1973) में इस निर्णय को पलटते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है।
- 3. प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्तियों का स्रोत है और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है, तथा यह गैर-न्यायिक (Non-justiciable) है, जिसका अर्थ है कि इसके प्रावधानों को अदालतों में लागू नहीं कराया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को **रूसी क्रांति (1917)** से प्रेरणा लेकर शामिल किया गया था, जबकि 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्श **फ्रांसीसी क्रांति (1789)** से लिए गए हैं (यहाँ दोनों को परस्पर विपरीत लिख दिया गया है)। कथन 2 सत्य है; बेरुबारी यूनियन मामले (1960) में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि प्रस्तावना संविधान का अंग नहीं है, लेकिन केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व के निर्णय को बदलते हुए यह व्यवस्था दी कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न हिस्सा है। कथन 3 भी सत्य है; प्रस्तावना न तो देश की विधायिका को कोई विशेष शक्ति प्रदान करती है और न ही उसकी शक्तियों पर प्रतिबंध लगाती है, साथ ही यह गैर-न्यायिक (Non-justiciable) है यानी इसके प्रावधानों को सीधे अदालतों में चुनौती नहीं दी जा सकती। भारतीय राजनीति से जुड़े ऐसे ही अन्य महत्वपूर्ण और विश्लेषणात्मक विषयों को गहराई से पढ़ने के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।
Related Questions
→
'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) संविधान सभा में किसने प्रस्तुत किया था?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों (Emergency Provisions) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 352 में यह अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल मंत्रिमंडल (Cabinet) के लिखित अनुरोध पर ही राष्ट्रपति द्वारा की जा सकती है, न कि प्रधानमंत्री की मौखिक सलाह पर, और इस उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने के एक माह के भीतर विशेष बहुमत से अनुमोदित किया जाना आवश्यक है।
2. सर्वोच्च न्यायालय के 'एस.आर. बोम्बाई वाद (1994)' के ऐतिहासिक निर्णय में यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया गया था कि अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन (राजकीय आपातकाल) की उद्घोषणा की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है, तथा यदि न्यायालय यह पाता है कि उद्घोषणा मालाफाइड (Malafide) या असंवैधानिक आधार पर की गई थी, तो न्यायालय भंग की गई विधानसभा को पुनर्जीवित कर सकता है और सरकार को बहाल कर सकता है।
3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से भाग XVIII में अनुच्छेद 352A और 355A जोड़कर यह प्रावधान किया गया था कि राष्ट्रीय आपातकाल को संपूर्ण देश के किसी एक विशिष्ट भाग तक सीमित रखा जा सकता है, तथा सशस्त्र विद्रोह के आधार पर आंतरिक आपातकाल की घोषणा की जा सकती है, भले ही देश में बाहरी आक्रमण की कोई स्थिति न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) के प्रावधानों और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-Q के अनुसार प्रत्येक राज्य में सभी शहरी क्षेत्रों के लिए एकरूपता स्थापित करते हुए अनिवार्य रूप से तीन प्रकार की नगरपालिकाओं—संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, छोटे नगरीय क्षेत्र के लिए नगर परिषद और बड़े नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम—का गठन किया जाना आवश्यक है, किंतु यदि किसी राज्यपाल द्वारा किसी बड़े औद्योगिक नगरीय क्षेत्र को विशिष्ट औद्योगिक नगरी घोषित किया जाता है, तो वहाँ नगरपालिका का गठन करना अनिवार्य नहीं होता है।
2. अनुच्छेद 243-S के अंतर्गत प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्र में वार्डों के भीतर स्थानीय प्रतिनिधित्व को सुदृढ़ करने के लिए 'वार्ड समितियों' (Ward Committees) के गठन का प्रावधान किया गया है, और यह व्यवस्था उन सभी राज्यों में अनिवार्य रूप से लागू होती है जिनकी कुल जनसंख्या तीन लाख या उससे अधिक है।
3. अनुच्छेद 243-ZE के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक महानगरीय क्षेत्र (Metropolitan Area) में जिला स्तर पर विकास योजनाओं को तैयार करने और उन्हें एकीकृत रूप से संयोजित करने के लिए एक 'जिला योजना समिति' (District Planning Committee) का गठन किया जाता है, जिसके कुल सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सदस्य संबंधित जिले की पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही चुने जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) पेश करने के लिए कम से कम कितने सदस्यों का समर्थन आवश्यक है?
→
भारत के निर्वाचन आयोग और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं, जितने राष्ट्रपति समय-समय पर निर्धारित करता है, तथा वर्ष 1993 के पश्चात से यह एक बहु-सदस्यीय निकाय बन गया है जिसमें किसी भी निर्णय के मतभेद की स्थिति में बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाता है, न कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की वीटो शक्ति से।
2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33 के अनुसार कोई भी व्यक्ति लोकसभा या विधानसभा चुनाव में अधिकतम तीन निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ सकता है, जिसे बाद में संशोधित करके अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्र कर दिया गया था।
3. निर्वाचन आयुक्तों की सेवा शर्तें और पदावधि राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती है, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों से हटाया जा सकता है जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की संस्तुति के बिना किसी भी स्थिति में उनके पद से नहीं हटाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.