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Indian Polity
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राज्य विधानमंडल के अंतर्गत विधानसभा और विधान परिषद के गठन, उनकी संरचना, तथा विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या 40 से कम नहीं हो सकती है (जम्मू-कश्मीर इसका अपवाद था)।
- 2. साधारण विधियों (Ordinary Bills) के पारित होने की प्रक्रिया में, यदि विधानसभा द्वारा पारित कोई विधेयक विधान परिषद द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है या विधान परिषद उसमें ऐसे संशोधन करती है जिन्हें विधानसभा स्वीकार नहीं करती है, तो विधानसभा द्वारा दूसरी बार विधेयक पारित किए जाने के पश्चात विधान परिषद उसे अधिकतम 3 महीने (प्रथम बार में 3 महीने और दूसरी बार में 1 महीना) तक ही और रोक सकती है।
- 3. राज्य की विधान परिषद को धन विधेयकों (Money Bills) के संबंध में अत्यंत सीमित शक्तियां प्राप्त हैं; विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक जब विधान परिषद के पास भेजा जाता है, तो विधान परिषद को उसे बिना किसी संशोधन के अधिकतम 21 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के विधानसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार किसी राज्य की विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 1/3 से अधिक नहीं हो सकती है और न्यूनतम संख्या 40 निर्धारित की गई है। कथन 2 सही है क्योंकि साधारण विधेयक के मामले में विधान परिषद अधिकतम 4 महीने (प्रथम बार 3 माह तथा द्वितीय बार 1 माह) तक ही विधेयक को विलंबित कर सकती है। कथन 3 गलत है क्योंकि धन विधेयक के संदर्भ में विधान परिषद को अधिकतम 14 दिनों की समयावधि दी जाती है, न कि 21 दिनों की। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल का अध्ययन करें।
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भारतीय संविधान के विभिन्न संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 के माध्यम से यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 352 के तहत की गई राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को किसी भी न्यायालय में न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर रखा जाएगा और इसे चुनौती नहीं दी जा सकती।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 352 में यह जोड़ा गया कि राष्ट्रीय आपातकाल संपूर्ण देश में या उसके किसी विशिष्ट भाग पर एक साथ उद्घोषित किया जा सकता है, तथा इसके तहत राष्ट्रपति को पूरे देश में आपातकाल लागू रहते हुए भी देश के किसी एक हिस्से में विशेष आपातकाल लगाने की शक्ति प्राप्त हो गई।
3. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा 38वें और 42वें संशोधन के कई दंडात्मक प्रावधानों को पलटते हुए यह व्यवस्था की गई कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के समक्ष न्यायिक समीक्षा के अधीन लाया जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके न्यायिक प्रवर्तन, दार्शनिक आधार तथा संविधान संशोधनों द्वारा जोड़े गए नए प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 37 में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित है कि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायसंगत (Justiciable) नहीं हैं, जिसका अर्थ है कि इनके उल्लंघन या क्रियान्वयन न होने पर किसी भी नागरिक द्वारा न्यायालय की शरण नहीं ली जा सकती है।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए अनुच्छेद 39A (समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता), अनुच्छेद 43A (उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी), और अनुच्छेद 48A (पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन तथा वन एवं वन्यजीवों की रक्षा) को जोड़ा गया था, जबकि 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 38 में यह निर्देश जोड़ा गया कि राज्य आय, प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानताओं को कम करेगा।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णयों (विशेषकर 'केशवानंद भारती वाद' और 'मिनर्वा मिल्स वाद') में यह प्रतिपादित किया है कि यदि संसद अनुच्छेद 39(b) तथा 39(c) में वर्णित सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों (संसाधनों का न्यायसंगत वितरण) को प्रभावी बनाने के लिए कोई कानून बनाती है और वह कानून अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 के मूल अधिकारों का अतिक्रमण करता है, तो ऐसा कानून अनुच्छेद 31C के संरक्षण के कारण असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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