त्वरित लिंक्स
Indian Polity
23 views
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के अंतर्गत 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट और 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के माध्यम से बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया और इस पद पर आसीन होने वाले प्रथम व्यक्ति वॉरेन हेस्टिंग्स थे, जिनकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया था, तथा इसी अधिनियम के तहत कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की गई थी।
- 2. 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक कर दिया गया, जिसके तहत व्यापारिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और राजनीतिक मामलों के अधीक्षण के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की स्थापना की गई थी।
- 3. 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट के माध्यम से ही पहली बार भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्रों को 'ब्रिटिश आधिपत्य क्षेत्र' (British Possessions in India) कहा गया, जिससे ब्रिटिश संसद का कंपनी के प्रशासन पर प्रत्यक्ष नियंत्रण और अधिक सुदृढ़ हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' बनाया गया (प्रथम गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स थे) और कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की गई थी। कथन 2 गलत है क्योंकि पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के तहत व्यापारिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) और राजनीतिक मामलों के अधीक्षण के लिए 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) की स्थापना की गई थी, न कि इसके विपरीत जैसा कि कथन में दिया गया है। कथन 3 सही है क्योंकि 1784 के अधिनियम के माध्यम से पहली बार भारत में कंपनी के क्षेत्रों को 'ब्रिटिश आधिपत्य क्षेत्र' कहा गया था। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
→
भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत प्रदत्त नागरिकता के प्रावधानों तथा संसद की विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो वह स्वतः अनुच्छेद 5, 8 और 10 के उपबंधों के तहत भारत का नागरिक नहीं रह जाएगा, और यह नियम युद्धकाल या शांति Vakal किसी भी परिस्थिति में समान रूप से लागू होता है।
2. अनुच्छेद 11 संसद को यह पूर्ण और अनन्य शक्ति प्रदान करता है कि वह नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में कोई भी उपबंध कर सकेगी, और संसद द्वारा इसी शक्ति के तहत 'नागरिकता अधिनियम, 1955' पारित किया गया था जिसमें विदेशी नागरिकों के लिए पंजीकरण या देशीकरण के माध्यम से नागरिकता प्राप्ति के विस्तृत नियम बनाए गए हैं।
3. संविधान के अनुच्छेद 10 के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति, जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए ऐसी नागरिकता का निरंतर धारक बना रहेगा, जिसका अर्थ यह है कि संसद नागरिकता के नियम तो बदल सकती है किंतु किसी वैध नागरिक को भूतलक्षी प्रभाव (Retrospective effect) से सीधे नागरिकताविहीन घोषित करने का अंधाधुंध अधिकार रखती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता अधिनियम, 1955 के विधिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 6 उन व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकारों से संबंधित है जो पाकिस्तान से भारत को प्रव्रज्या (Migration) करके आए हैं, और इसके तहत यदि ऐसा व्यक्ति 1 जुलाई 1948 के पश्चात भारत आया है, तो उसे भारत का नागरिक बनने के लिए निर्धारित प्रपत्र में पंजीकरण अधिकारी के समक्ष आवेदन करना अनिवार्य था, बशर्ते वह आवेदन से ठीक पहले कम से कम छह मास तक भारत में साधारणतया निवासी रहा हो।
2. नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5 के अंतर्गत 'पंजीकरण द्वारा' (By Registration) नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है कि भारतीय मूल का व्यक्ति (PIO) जो अविभाजित भारत से बाहर किसी देश में सामान्य रूप से निवास कर रहा है, उसे आवेदन करने से पूर्व भारत में लगातार 7 वर्षों तक निवास करना होगा।
3. नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता 'वंचना द्वारा' (By Deprivation) समाप्त कर दी जाती है, जिसकी औपचारिक घोषणा केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) के गठन का प्रावधान किया गया है, और इसकी स्थापना सर्वप्रथम किस वर्ष की गई थी?
→
भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (भाग IX) के वित्तीय और संरचनात्मक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा अनुच्छेद 243-I के तहत प्रत्येक राज्य में एक 'राज्य वित्त आयोग' (State Finance Commission) के गठन का प्रावधान किया गया है, जो राज्यपाल द्वारा प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर गठित किया जाता है और यह आयोग पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने के साथ-साथ राज्यों द्वारा एकत्रित करों, शुल्कों और टोल टैक्स के शुद्ध प्राप्तियों के राज्यों और पंचायतों के बीच वितरण की संस्तुति राज्यपाल को करता है।
2. अधिनियम के अनुच्छेद 243-H के अनुसार, राज्य का विधानमंडल किसी पंचायत को ऐसी कर, शुल्क, टोल और फीस लगाने, वसूलने तथा विनियमित करने की शक्ति कानून द्वारा प्रदान कर सकता है, तथा राज्य की संचित निधि से पंचायतों को अनुदान (Grants-in-aid) देने का प्रावधान भी कर सकता है।
3. पंचायतों के खातों के लेखा-परीक्षण (Audit) से संबंधित मामलों के विनियमन के लिए संविधान में यह अनिवार्य किया गया है कि इसका नियंत्रण और निर्देशन सीधे भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के अधीन होगा, जो संघ और राज्यों की तर्ज पर स्थानीय निकायों का भी प्रत्यक्ष ऑडिट करेगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
राज्य विधानमंडल के अंतर्गत विधानसभा और विधान परिषद की वित्तीय शक्तियों, धन विधेयकों तथा साधारण विधेयकों की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 198 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) को विधान परिषद में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, और यदि विधानसभा द्वारा पारित कोई धन विधेयक विधान परिषद को भेजा जाता है, तो विधान परिषद के पास यह संवैधानिक शक्ति होती है कि वह उस पर अपनी संस्तुति दे सके, किंतु वह इसे न तो अस्वीकार कर सकती है और न ही चौदह दिन से अधिक की अवधि के लिए रोक सकती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 197 के प्रावधानों के तहत यदि किसी साधारण विधेयक को विधानसभा द्वारा दूसरी बार पारित करके विधान परिषद के पास भेजा जाता है, और विधान परिषद उसे फिर से अस्वीकार कर देती है या ऐसे संशोधन करती है जिनसे विधानसभा सहमत नहीं है, तो विधान परिषद उस विधेयक को अधिकतम एक माह की अवधि तक और रोक सकती है, जिसके पश्चात वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में उसे विधानसभा ने दूसरी बार पारित किया था।
3. राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी भी विधेयक (चाहे वह धन विधेयक हो या साधारण विधेयक) को कानून बनने के लिए राज्यपाल की अनुमति अनिवार्य होती है, और जब कोई धन विधेयक राज्यपाल की अनुमति के लिए प्रस्तुत किया जाता है, तो राज्यपाल के पास यह शक्ति होती है कि वह उस विधेयक को राज्य विधानमंडल के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेज सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.