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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 10 के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति, जो भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए ऐसी नागरिकता का निरंतर बना रहना सुनिश्चित करेगा, जिसका अर्थ है कि संसद को किसी नागरिक की नागरिकता को विधि बनाकर समाप्त करने या विनियमित करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है।
- 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 में पहली बार व्यापक संशोधन नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 1986 के माध्यम से किया गया था, जिसके तहत 'जन्म द्वारा' (By Birth) नागरिकता प्राप्त करने के नियमों को कड़ा करते हुए यह अनिवार्य किया गया कि 1 जुलाई 1987 या उसके बाद भारत में जन्म लेने वाले व्यक्ति के माता-पिता में से कम से कम एक व्यक्ति उस समय भारत का नागरिक होना चाहिए।
- 3. संविधान का अनुच्छेद 8 भारत के बाहर रहने वाले कुछ निश्चित भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIOs) को नागरिकता के अधिकार प्रदान करता है, और इसके तहत स्वतः ही विदेशी भूमि पर जन्मे ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को भारत की मानद नागरिकता प्राप्त हो जाती है, बशर्ते वह संबंधित भारतीय राजनयिक मिशन में पंजीकरण कराने से न चूके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 10 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि भारत का प्रत्येक नागरिक जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों (अनुच्छेद 5 से 8) में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए ऐसी नागरिकता का निरंतर धारक बना रहेगा। इसका अर्थ है कि संसद को नागरिकता के नियमन और नियंत्रण की संप्रभु शक्ति प्राप्त है। कथन 2 सही है: नागरिकता अधिनियम, 1955 में सबसे पहला महत्वपूर्ण संशोधन 1986 में किया गया था, जिसने जन्म द्वारा नागरिकता के प्रावधान को अधिक सख्त बनाया ताकि अवैध प्रवासियों के बच्चों द्वारा आसानी से नागरिकता प्राप्त करने की प्रवृत्ति को रोका जा सके। इसके तहत यह अनिवार्य किया गया कि जन्म के समय माता-पिता में से किसी एक का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 8 भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों को नागरिकता के अधिकार प्रदान करता है, किंतु यह 'स्वतः' (automatically) नागरिकता प्रदान नहीं करता। इसके लिए व्यक्ति को भारत के राजनयिक या कौंसुलरी प्रतिनिधि के पास पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य होता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों का अध्ययन करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, पदावधि, शक्तियों तथा प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के आपसी संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार, उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों सदस्यों) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के द्वारा होता है, किंतु इस निर्वाचन प्रक्रिया में राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों को कोई भी भूमिका प्राप्त नहीं होती है।
2. अनुच्छेद 67(b) के प्रावधान के तहत उपराष्ट्रपति को उसकी पदावधि (5 वर्ष) पूरी होने से पहले केवल तभी उसके पद से हटाया जा सकता है जब राज्यसभा अपने तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से इस आशय का प्रस्ताव पारित करे और लोकसभा उस प्रस्ताव से सहमत हो, तथा इस प्रक्रिया के लिए राज्यसभा में ऐसा प्रस्ताव प्रस्तुत करने से चौदह दिन पूर्व उपराष्ट्रपति को लिखित सूचना देना अनिवार्य है।
3. अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका विधिक एवं संवैधानिक अर्थ यह है कि यदि लोकसभा में मंत्रिपरिषद के विरुद्ध कोई अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो प्रधानमंत्री सहित समस्त मंत्रिपरिषद को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ता है, और प्रधानमंत्री की मृत्यु या पदत्याग की स्थिति में मंत्रिपरिषद स्वतः विघटित हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 123) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति संसद की विधि निर्माण की शक्ति के समतुल्य होती है, किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि राष्ट्रपति किसी ऐसे विषय पर अध्यादेश जारी कर सकता है जिस पर संसद को कानून बनाने की संवैधानिक शक्ति प्राप्त न हो।
2. राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया अध्यादेश संसद के पुनः समवेत होने की तिथि से छह सप्ताह की अवधि समाप्त होने पर स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, बशर्ते इस अवधि के भीतर संसद के दोनों सदनों द्वारा उस अध्यादेश को अस्वीकृत करने वाला संकल्प पारित न कर दिया गया हो।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'डी.सी. वाधवा वाद (1987)' में यह स्पष्ट किया गया कि किसी अध्यादेश को बार-बार पुनर्रि जारी करना (Repromulgation of Ordinances) संविधान की मूल भावना और विधिवत कानून निर्माण प्रक्रिया का उल्लंघन है, तथा इस आधार पर न्यायालय राष्ट्रपति या राज्यपाल की अध्यादेश बनाने की शक्ति की न्यायिक समीक्षा कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त महान्यायवादी को देश के सभी न्यायालयों में सुनवाई (Audience) का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे संसद के किसी भी सदन में या उसकी संयुक्त बैठक में मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है।
2. भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) न केवल केंद्र और राज्य सरकारों के लेखों की संपरीक्षा (Audit) करता है, बल्कि उसे भारत की संचित निधि से धन निकालने पर पूर्व-नियंत्रण (Pre-audit) का भी पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
3. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य पद या नियोजन का पात्र नहीं होता है, जबकि महान्यायवादी के लिए ऐसा कोई विधिक प्रतिबंध नहीं है कि वह अपनी निजी प्रैक्टिस या वकालत नहीं कर सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की शक्तियों, प्रधानमंत्री की स्थिति और मंत्रिपरिषद से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 67(b) के प्रावधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति को राज्य सभा के ऐसे संकल्प द्वारा अपने पद से हटाया जा सकता है जिसे राज्य सभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित किया गया हो और जिससे लोकसभा सहमत हो, किंतु इस प्रस्ताव को प्रस्तुत करने के लिए चौदह दिन की पूर्व लिखित सूचना देना अनिवार्य है।
2. अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका संवैधानिक तात्पर्य यह है कि यदि लोकसभा में किसी एक मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है या प्रधानमंत्री त्यागपत्र दे देता है, तो पूरी मंत्रिपरिषद का विघटन हो जाता है।
3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन और विधान संबंधी प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और यदि राष्ट्रपति ऐसी कोई सूचना माँगता है, तो उसे उपलब्ध कराए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान में 'प्रथम संशोधन' किस वर्ष हुआ था?
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