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Indian Polity
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत और 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकृत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) ही भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आधार बना, जिसे संविधान के निर्माण के पश्चात् अंत में संविधान के अन्य भागों के अनुकूल समेकित किया गया।
- 2. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूस की क्रांति (1917) से प्रेरित होकर शामिल किया गया था, जबकि 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्शों को फ्रांस की क्रांति (1789) से लिया गया है।
- 3. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया कि प्रस्तावना भारतीय संविधान का एक अभिन्न अंग है, और यद्यपि यह न्यायोचित (Justiciable) नहीं है, तथापि संसद अनुच्छेद 368 के तहत इसमें संशोधन कर सकती है, बशर्ते संशोधन द्वारा संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) को क्षति न पहुंचे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि 'उद्देश्य प्रस्ताव' पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को प्रस्तुत किया गया था और 22 जनवरी 1947 को स्वीकृत हुआ था, किंतु प्रस्तावना को संविधान निर्माण के आरंभ में ही नहीं बल्कि संविधान के सभी भागों के निर्माण के पश्चात अंत में संविधान के अनुरूप बनाया गया और इसे संविधान सभा द्वारा पारित किया गया। कथन 2 बिल्कुल सही है; भारतीय संविधान की प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के आदर्श को 1917 की रूसी क्रांति से तथा स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों को 1789 की फ्रांसीसी क्रांति से प्रेरणा लेकर जोड़ा गया था। कथन 3 भी सही है; 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्व के 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) के निर्णय को पलटते हुए यह व्यवस्था दी कि प्रस्तावना संविधान का अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के अधीन संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते यह संशोधन संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) का उल्लंघन न करे। इस विषय की विस्तृत और गहन जानकारी के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के पोर्टल का अध्ययन कर सकते हैं।
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution), जिसे 22 जनवरी 1947 को संविधान सभा द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया था, भारतीय संविधान की प्रस्तावना का मूल आधार बना।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में पहली और एकमात्र बार संशोधन किया गया, जिसके तहत इसमें 'समाजवादी' (Socialist), 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) और 'अखंडता' (Integrity) शब्दों को जोड़ा गया।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते इसके 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) को कोई क्षति न पहुँचे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल—विधानसभा और विधान परिषद—की संरचना, गठन और विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए कानून बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा ने उस राज्य के कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का एक संकल्प पारित कर दिया हो, और ऐसा संकल्प पारित होने पर संसद के लिए उस राज्य में विधान परिषद का गठन करना संवैधानिक रूप से अनिवार्य हो जाता है।
2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी परिस्थिति में विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या चालीस से कम नहीं होनी चाहिए (अपवादस्वरूप जम्मू-कश्मीर के समय स्थिति भिन्न थी)।
3. विधान परिषद के सदस्यों के निर्वाचन और मनोनयन के संबंध में, इसके कुल सदस्यों का 1/12 भाग ऐसे स्नातकों द्वारा चुना जाता है जो उस राज्य के भीतर कम से कम तीन वर्ष पूर्व ग्रेजुएट हो चुके हैं, तथा 1/6 भाग राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से मनोनीत किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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शिक्षा किस सूची में है?
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संसद के किसी सदस्य की अयोग्यता पर निर्णय कौन लेता है?
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खाद्य श्रृंखला में सबसे ज्यादा संख्या किसकी होती है?
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