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Indian Polity
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राज्य विधानमंडल के अंतर्गत विधानसभा और विधान परिषद की वित्तीय शक्तियों, विशेषाधिकारों और विधायी प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 198 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) विधान परिषद में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, और जब विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक विधान परिषद के पास भेजा जाता है, तो विधान परिषद को उसे केवल 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के विधानसभा को लौटाना होता है, तथा यदि विधान परिषद निर्धारित अवधि में विधेयक नहीं लौटाती है, तो वह दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में वह विधानसभा द्वारा पारित किया गया था।
- 2. विधान परिषद के पास साधारण विधेयक को अधिकतम चार महीने तक रोकने की शक्ति होती है (प्रथम बार तीन महीने और विधानसभा द्वारा पुनः पारित किए जाने पर एक महीने की अवधि), और यदि इस अवधि के भीतर विधान परिषद विधेयक को पारित नहीं करती है, तो वह दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है, बशर्ते वह विधेयक विधानसभा द्वारा दोबारा पारित कर दिया गया हो।
- 3. राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य को सदन में या उसकी किसी समिति में कही गई किसी बात या दिए गए किसी मत के संबंध में किसी भी न्यायालय में किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही से उन्मुक्ति (Immunity) प्राप्त होती है, और यह विशेषाधिकार संसद सदस्यों के समान ही राज्य विधानमंडल के सदस्यों पर भी पूर्ण रूप से लागू होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 198 के अनुसार धन विधेयक केवल विधानसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है, विधान परिषद में नहीं। विधान परिषद के पास धन विधेयक को अस्वीकार करने या उसमें संशोधन करने की शक्ति नहीं होती है; उसे केवल 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के विधानसभा को लौटाना होता है। यदि वह ऐसा नहीं करती है, तो विधेयक दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है। कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 197 के अनुसार, साधारण विधेयक के मामले में विधान परिषद प्रथम बार में विधेयक को अधिकतम **तीन महीने** (चार महीने नहीं) तक रोक सकती है और यदि विधानसभा द्वारा विधेयक दोबारा पारित करके भेजा जाता है, तो विधान परिषद उसे अधिकतम **एक महीने** तक और रोक सकती है। इस प्रकार कुल मिलाकर विधान परिषद साधारण विधेयक को अधिकतम चार महीने तक विलंबित कर सकती है, लेकिन कथन में दी गई समय-सीमा की पहली अवधि (तीन महीने) के संदर्भ में विवरण अशुद्ध है क्योंकि पहली बार रोकने की अवधि 3 महीने होती है। कथन 3 सही है: संविधान के अनुच्छेद 194 के अंतर्गत राज्य विधानमंडल के सदस्यों को संसद सदस्यों की भांति ही सदन के भीतर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा सदन या उसकी समितियों में कही गई बात या दिए गए मत के संबंध में न्यायालय की अधिकारिता से उन्मुक्ति जैसे विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 और शहरी स्थानीय शासन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस संशोधन द्वारा संविधान में भाग IX-A जोड़ा गया, जिसके तहत अनुच्छेद 243-Q के अंतर्गत प्रत्येक राज्य में नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद और नगर निगम का गठन किया जाना अनिवार्य किया गया है, किंतु किसी ऐसे संक्रमणकालीन क्षेत्र (Transitional area) में नगर पालिका का गठन नहीं किया जा सकता जहाँ कोई औद्योगिक संस्थान कार्य कर रहा हो।
2. अनुच्छेद 243-W के अधीन नगरपालिकाओं को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करने तथा बारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 18 विषयों के क्रियान्वयन की शक्ति सौंपी गई है, और इन विषयों पर विधि बनाने की शक्ति केवल संसद के पास निहित है।
3. अनुच्छेद 243-S के अनुसार प्रत्येक नगरपालिका के क्षेत्र के भीतर वार्ड समितियों (Ward Committees) का गठन किया जाना आवश्यक है, बशर्ते उस नगरपालिका क्षेत्र की कुल जनसंख्या तीन लाख या उससे अधिक हो।
4. 74वें संविधान संशोधन के तहत प्रत्येक राज्य में एक राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) के गठन का प्रावधान किया गया है, जिसकी समीक्षा के आधार पर राज्यपाल नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए संस्तुति प्रदान करते हैं, और यह आयोग प्रत्येक पाँच वर्ष पर गठित किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 20(3) के अंतर्गत प्रदत्त 'स्वयं के विरुद्ध साක්ෂ्य देने से संरक्षण' (Protection against self-incrimination) का अधिकार केवल आपराधिक मामलों (Criminal Proceedings) में आरोपित व्यक्ति को ही उपलब्ध है, और यह किसी भी स्थिति में विभागीय जाँच या कर निर्धारण से संबंधित कार्यवाहियों पर लागू नहीं होता है।
2. अनुच्छेद 22 के तहत निवारक निरोध (Preventive Detention) के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को बिना किसी सलाहकार बोर्ड (Advisory Board) की रिपोर्ट के तीन महीने से अधिक समय तक निरुद्ध रखा जा सकता है, यदि संसद द्वारा बनाई गई विधि ऐसा उपबंध करती है।
3. अनुच्छेद 25 के अंतर्गत अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार न केवल भारतीय नागरिकों को बल्कि विदेशी नागरिकों को भी समान रूप से प्राप्त है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 9 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, और इस संबंध में संसद को नागरिकता के अधिकार का नियमन करने के लिए कोई अलग से विधि बनाने की आवश्यकता नहीं है।
2. 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' (समय-समय पर संशोधित) के अनुसार, प्राकृतिक रूप से नागरिकता (Naturalisation) प्राप्त करने के लिए आवेदक को भारत सरकार द्वारा निर्धारित किसी एक भाषा का ज्ञान होना आवश्यक नहीं है, बल्कि उसे संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लिखित 22 भाषाओं में से किसी एक भाषा में पूर्ण दक्षता होनी चाहिए।
3. संविधान का अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विधि बनाने की पूर्ण शक्ति प्रदान करता है, और संसद द्वारा पारित इसी शक्ति के तहत नागरिकता अधिनियम, 1955 में अब तक कई बार संशोधन किए जा चुके हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संसद की विधायी प्रक्रिया और लोकसभा तथा राज्यसभा के संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है और राज्यसभा में इसे प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, तथा राज्यसभा इस विधेयक को अस्वीकार या संशोधित नहीं कर सकती है, वह केवल अपनी सिफारिशें दे सकती है जिन्हें मानना या न मानना लोकसभा पर निर्भर करता है।
2. संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत केवल साधारण विधेयकों (Ordinary Bills) और वित्तीय विधेयकों (Financial Bills श्रेणी-I) के संदर्भ में लागू होता है, किंतु यह संविधान संशोधन विधेयकों (Constitutional Amendment Bills) और धन विधेयकों (Money Bills) के मामले में लागू नहीं किया जा सकता है।
3. लोकसभा द्वारा पारित और राज्यसभा को भेजे गए किसी साधारण विधेयक पर यदि दोनों सदनों के बीच गतिरोध उत्पन्न हो जाता है और राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त बैठक आहूत की जाती है, तो उस संयुक्त बैठक की अध्यक्षता अनिवार्य रूप से लोकसभा अध्यक्ष (Speaker of Lok Sabha) द्वारा ही की जाती है, और यदि वह अनुपस्थित हो तो राज्यसभा के सभापति द्वारा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित विधायी प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी राज्य का क्षेत्र बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रयोजन के लिए राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास विधेयक भेजे जाने पर यदि राज्य विधानमंडल एक निश्चित समय-सीमा के भीतर अपनी अस्वीकृति की रिपोर्ट दे देता है, तो संसद उस राज्य की सहमति के बिना आगे की विधाई प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा सकती है।
2. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना या मौजूदा राज्यों के पुनर्गठन के लिए बनाई गई किसी भी विधि को संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए 'संशोधन' नहीं माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि ऐसी विधियों को संसद द्वारा साधारण बहुमत (Simple Majority) से पारित किया जा सकता है।
3. भारत के भू-भाग को किसी अन्य विदेशी देश को सौंपने (Cede) के लिए सर्वोच्च न्यायालय के 'बेरुबारी यूनियन वाद (1960)' में दिए गए परामर्श के अनुसार, केवल अनुच्छेद 3 के अंतर्गत साधारण बहुमत से विधाई कानून बनाकर किसी भारतीय क्षेत्र को विदेशी राज्य को नहीं दिया जा सकता, बल्कि इसके लिए संविधान में संशोधन (अनुच्छेद 368 के तहत) करना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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