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Indian Polity
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भारतीय संविधान के आपातकालीन उपबंधों और उनसे संबंधित विभिन्न संवैधानिक संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा यह उपबंध किया गया था कि राष्ट्रपति द्वारा विभिन्न आधारों पर एक साथ कई राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणाएँ की जा सकती हैं और राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है, जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा समाप्त कर दिया गया।
- 2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के माध्यम से यह अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा या उसके अनुमोदन का प्रस्ताव संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत (विशेष बहुमत) द्वारा ही पारित किया जाना चाहिए।
- 3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 358 के तहत अनुच्छेद 19 द्वारा दिए गए मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, किंतु आपातकाल की समाप्ति के पश्चात केवल वे ही विधियाँ पुनर्जीवित होती हैं जो आपातकाल के दौरान बनाई गई थीं, जबकि आपातकाल से पहले की विधियों को स्वतः संरक्षण प्राप्त नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई थी कि वह राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को न्यायपालिका में चुनौती न दिए जाने का प्रावधान करे और एक से अधिक आपातकाल की घोषणा कर सके। इसे 44वें संशोधन 1978 द्वारा निरस्त कर दिया गया। कथन 2 सही है: 44वें संशोधन द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा या उसके जारी रखने के प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित किया जाना अनिवार्य है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 358 के तहत आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 स्वतः निलंबित हो जाता है, और आपातकाल समाप्त होने पर आपातकाल के दौरान बनाई गई असंगत विधियाँ स्वतः समाप्त हो जाती हैं, जबकि आपातकाल से पहले की विधियों पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता (वे पहले से ही सुरक्षित रहती हैं)। विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल (विधानसभा और विधान परिषद) की संरचना, शक्तियों और विधायी प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार किसी राज्य की विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु इसकी न्यूनतम संख्या किसी भी परिस्थिति में 40 से कम नहीं हो सकती है, सिवाय उस अपवाद के जहाँ संसद कानून द्वारा विशेष उपबंध करे।
2. विधान परिषद के सदस्यों का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से होता है, जिसमें कुल सदस्यों का 1/3 भाग स्थानीय निकायों (नगरपालिकाओं, जिला बोर्डों आदि) के निर्वाचक मंडल द्वारा, 1/3 भाग विधानसभा के सदस्यों द्वारा, 1/6 भाग राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र से, तथा शेष भाग स्नातकों और अध्याਪकों द्वारा चुने जाते हैं।
3. साधारण विधेयक (Ordinary Bill) के मामले में विधान परिषद के पास यह शक्ति होती है कि वह विधेयक को अधिकतम 4 महीने (प्रथम बार 3 महीने और द्वितीय बार 1 महीने) तक रोक सकती है, और यदि विधान परिषद विधेयक को अस्वीकार कर देती है या 4 महीने की कुल अवधि बीत जाती है, तो विधानसभा और विधान परिषद के बीच गतिरोध को समाप्त करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 197 के तहत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाए जाने का प्रावधान है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनके न्यायिक पुनरावलोकन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) की परिभाषा में संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों के साथ-साथ अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम और रूढ़ि या प्रथा (Custom or usage) को भी शामिल किया गया है, बशर्ते उनका बल विधि जैसा हो।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'गोकक बंधु वाद' या 'केशवानंद भारती वाद' जैसे ऐतिहासिक मामलों में यह प्रतिपादित किया है कि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किया गया संवैधानिक संशोधन भी अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' की परिभाषा के दायरे में आता है, जिसके कारण संसद किसी भी मूल अधिकार को संविधान संशोधन के माध्यम से समाप्त या सीमित नहीं कर सकती है।
3. अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह सशस्त्र बलों, पुलिस बलों, खुफिया संगठनों और दूरसंचार प्रणालियों से जुड़े कर्मियों के मूल अधिकारों पर राष्ट्रीय सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से विधि द्वारा निर्बंधन या प्रतिबंध लगा सकती है, और ऐसे कानूनों को केवल इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वे भाग III का उल्लंघन करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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