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Indian Polity
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भारतीय संविधान की राजभाषा, राजनीतिक दलों (दल-बदल) और संविधान की विभिन्न अनुसूचियों व भागों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा का उपबंध किया गया है, और इसी भाग के अनुच्छेद 345 के अनुसार किसी राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा, उस राज्य में प्रयुक्त होने वाली भाषाओं में से किसी एक या अधिक भाषाओं को या हिंदी को उस राज्य के सभी या किन्हीं राजकीय प्रयोजनों के लिए अपना सकेगा।
- 2. संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत यदि किसी राजनीतिक दल का कोई मनोनीत (Nominated) सदस्य सदन में शपथ ग्रहण करने के छह महीने के भीतर किसी अन्य राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण कर लेता है, तो उसे दल-बदल के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।
- 3. संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत संघ सूची (List I) में मूल रूप से 97 विषय थे, जिन्हें वर्तमान में बढ़ाकर 100 कर दिया गया है, जबकि राज्य सूची (List II) से कुछ विषयों को निकालकर समवर्ती सूची (List III) में स्थानांतरित करने का कार्य 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के भाग XVII (अनुच्छेद 343-351) में संघ की राजभाषा का विस्तृत प्रावधान है। अनुच्छेद 345 राज्यों को अपनी आधिकारिक भाषा या भाषाओं को चुनने की शक्ति प्रदान करता है। कथन 2 गलत है: संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के पैरा 2(3) के अनुसार, यदि कोई **मनोनीत सदस्य** सदन में बैठने के **छह महीने की समाप्ति के बाद** किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है, तो वह अयोग्य हो जाता है। छह महीने के भीतर शामिल होने पर उसे छूट प्राप्त होती है, लेकिन यहाँ सामान्य समयावधि और प्रावधानों की तकनीकी को ध्यान में रखते हुए यह नियम मनोनीत सदस्यों के लिए छह महीने के भीतर लागू होता है, अतः कथन 2 की भाषा और समय-सीमा तकनीकी रूप से भ्रामक और गलत है क्योंकि मनोनीत सदस्य छह महीने के *भीतर* शामिल हो सकता है, न कि छह महीने *बीतने के बाद* (यानि छह महीने के भीतर सदस्यता लेने पर अयोग्यता नहीं होती, लेकिन यहाँ कथन में छह महीने के भीतर कहा गया है जो कि छूट की सीमा है, किंतु इसका सही विधिक तथ्य यह है कि मनोनीत सदस्य सदन में बैठने के पश्चात 6 मास की अवधि के भीतर किसी राजनीतिक दल में सम्मिलित हो जाता है तो वह अयोग्य नहीं होगा; तथापि इस प्रश्न में अन्य विधिक बारीकियों के कारण कथन 2 गलत माना गया है क्योंकि दल-बदल के विलय संबंधी नियम 2/3 बहुमत से जुड़े हैं)। कथन 3 सही है: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा राज्य सूची के पाँच विषयों (शिक्षा, वन, नाप-तोल, वन्यजीवों और पक्षियों का संरक्षण, तथा न्याय का प्रशासन) को समवर्ती सूची में स्थानांतरित किया गया था। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा व राज्यसभा की शक्तियों तथा उनके गठन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 108 के अंतर्गत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का प्रावधान केवल साधारण विध विधेयकों (Ordinary Bills) और वित्तीय विधियों (Financial Bills) के मामलों के लिए लागू होता है, और धन विधेयक (Money Bills) तथा संविधान संशोधन विधेयकों (Constitutional Amendment Bills) के संबंध में संयुक्त बैठक बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है।
2. यदि लोकसभा द्वारा विघटित होने से पूर्व कोई विधेयक पारित कर दिया गया है और वह राज्यसभा के पास लंबित है, तो वह विधेयक लोकसभा के विघटन के साथ ही व्यपगत (Lapse) हो जाता है, भले ही वह राज्यसभा द्वारा अभी पारित न किया गया हो।
3. राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के माध्यम से होता है, तथा इस सदन के एक-तिहाई सदस्य प्रति दो वर्ष की समाप्ति पर सेवानिवृत्त होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'लोक सेवा आयोग' (Public Service Commission) से संबंधित है?
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा-राज्यसभा के संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अंतर्गत 'धन विधेयक' (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं; तथा राज्यसभा को इस विधेयक को प्राप्त करने की तिथि से अधिकतम 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ लोकसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है, और यदि राज्यसभा निर्धारित अवधि में विधेयक वापस नहीं करती है, तो उसे दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में वह लोकसभा द्वारा पारित किया गया था।
2. संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत बुलाई जाने वाली संसद की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) की अध्यक्षता केवल लोकसभा अध्यक्ष द्वारा ही की जा सकती है, और यदि लोकसभा अध्यक्ष अनुपस्थित हैं, तो लोकसभा का उपाध्यक्ष तथा उसकी भी अनुपस्थिति में राज्यसभा का उपसभापति इस बैठक की अध्यक्षता करता है (किंतु राज्यसभा के सभापति यानी उपराष्ट्रपति किसी भी स्थिति में संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं कर सकते)।
3. वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) के संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 112 के अनुसार यह उपबंधित है कि भारत की संचित निधि से व्यय होने वाले कुछ विशिष्ट व्यय (जैसे राष्ट्रपति का वेतन, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन-भत्ते आदि) संसद के दोनों सदनों में मतदान के अधीन (Subject to vote) होते हैं, जबकि अन्य व्यय केवल चर्चा के लिए रखे जाते हैं जिन पर मतदान नहीं हो सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके संशोधनों तथा ऐतिहासिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 39A के अंतर्गत 'समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता' का प्रावधान 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक या अन्य असमर्थता के कारण कोई भी नागरिक न्याय पाने से वंचित न रहे।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980)' मामले में यह निर्धारित किया था कि भारतीय संविधान की नींव मूल अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के संतुलन पर आधारित है, और इनमें से किसी एक को पूर्णतः प्राथमिकता देना संविधान के बुनियादी ढाँचे (Basic Structure) का उल्लंघन होगा।
3. संविधान के अनुच्छेद 48A के अनुसार राज्य, देश के पर्यावरण के संरक्षण और संवर्द्धन का तथा वन और वन्य जीवों की रक्षा करने का प्रयास करेगा, जिसे मूल संविधान में ही शामिल किया गया था और बाद में 44वें संविधान संशोधन द्वारा इसमें संशोधन किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के कार्यों, स्वतंत्रता और संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 323 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग अपने कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग अपनी रिपोर्ट संबंधित राज्य के राज्यपाल को सौंपता है जिसे राज्यपाल राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाता है।
2. संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों या अध्यक्ष को उनकी पदावधि की समाप्ति से पहले केवल दुराचार (Misbehaviour) या दिवालिया होने के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है, किंतु दुराचार के मामले में राष्ट्रपति के आदेश से पूर्व उच्चतम न्यायालय द्वारा जाँच कराया जाना अनिवार्य होता है, और उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई सलाह आयोग के अध्यक्ष या सदस्य पर पूरी तरह बाध्यकारी होती है।
3. राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को केवल राज्यपाल द्वारा उसके पद से हटाया जा सकता है, क्योंकि उनकी नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, यद्यपि उनके निष्कासन के आधार वही होते हैं जो संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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