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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य की कार्यपालिका, विशेष रूप से राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के विश्रान्ति काल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश का वही बल और प्रभाव होता है जो राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम का होता है, बशर्ते कि राज्यपाल राष्ट्रपति के निर्देशों के बिना किसी ऐसे अध्यादेश को प्रख्यापित नहीं कर सकता यदि उस विषय से संबंधित विधेयक को राज्य विधानसभा में प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व संस्वीकृति आवश्यक होती।
- 2. अनुच्छेद 164 के अंतर्गत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित है कि मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या संबंधित राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से कम नहीं होगी और न ही 12 मंत्रियों से कम होगी।
- 3. अनुच्छेद 167 के अनुसार राज्य के प्रशासन से संबंधित और विधानविषयक प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करना मुख्यमंत्री का संवैधानिक कर्तव्य है, तथा राज्यपाल के यह पूछने पर ऐसी सूचना प्रदान करना भी अनिवार्य है, किंतु राज्यपाल अपनी स्वविवेककीय शक्तियों के प्रयोग में मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए हमेशा बाध्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और इसके अंतर्गत कुछ विशेष मामलों में राष्ट्रपति के निर्देशों की आवश्यकता होती है (जैसे यदि वैसा विधेयक राज्य विधानसभा में लाने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति आवश्यक होती)। कथन 2 गलत है क्योंकि 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के अनुसार मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के **15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी** (न कि कम नहीं होगी), और यह भी प्रावधान है कि मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की न्यूनतम संख्या 12 होनी चाहिए। कथन 3 गलत है क्योंकि राज्यपाल कुछ मामलों में अपने स्वविवेक (Discretion) का प्रयोग करता है और ऐसी स्थितियों में वह मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं होता है। भारतीय संविधान की विस्तृत जानकारी के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 51 के अंतर्गत राज्य, अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि करने, राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत और सम्मानजनक संबंधों को बनाए रखने, संगठित लोगों के आपसी व्यवहार में अंतर्राष्ट्रीय विधि और संधि-बाध्यताओं के प्रति आदर बढ़ाने, तथा अंतर्राष्ट्रीय विवादों को मध्यस्थता द्वारा निपटाने के लिए प्रोत्साहन देने का प्रयास करेगा।
2. नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत उल्लिखित ये अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा संबंधी आदर्श पूर्णतः 'गांधीवादी विचारधारा' पर आधारित हैं, और इनका मुख्य उद्देश्य देश के भीतर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर अहिंसा को बढ़ावा देना है।
3. यद्यपि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और देश के विधان बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य है, तथापि अनुच्छेद 37 के अनुसार इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (Justiciable) नहीं बनाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत वर्णित 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IV-A और अनुच्छेद 51A के तहत जोड़ा गया था, और वर्तमान में इनकी कुल संख्या ग्यारह है।
2. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से ग्यारहवें मूल कर्तव्य को जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चों या प्रतिपाल्यों को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का कर्तव्य उस माता-पिता या संरक्षक का है जो उनका अभिभावक है।
3. मूल कर्तव्यों की प्रकृति न्यायोचित (Justiciable) है, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने मूल कर्तव्यों का पालन नहीं करता है, तो संविधान के अनुच्छेद 51A के तहत सीधे उच्चतम न्यायालय द्वारा उसे प्रवर्तित कराया जा सकता है और इसके उल्लंघन पर दंड का प्रावधान भी संविधान में ही सीधे किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) की शक्ति प्रदान करता है?
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भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) में निहित समाजवादी सिद्धांतों के क्रियान्वयन के लिए बनाई गई विधियों को केवल इस आधार पर अमान्य नहीं किया जा सकता है कि वे अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन करती हैं, बशर्ते उन्हें अनुच्छेद 31C का संरक्षण प्राप्त हो।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'मिनर्वा मिल्स वाद' (1980) के निर्णय में यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया था कि संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) को बनाए रखने के लिए भाग-III (मूल अधिकार) और भाग-IV (नीति निर्देशक तत्व) के बीच संतुलन का होना अनिवार्य है, और इनमें से किसी एक को दूसरे पर पूर्ण प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।
3. यद्यपि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मौलिक हैं और देश की विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य है, तथापि संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा बलपूर्वक प्रवर्तित (Enforceable) कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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