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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, पदच्युति और प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय मंत्रिपरिषद के संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार भारत के उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें संसद के मनोनीत सदस्य भी भाग लेते हैं, किंतु राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित या मनोनीत सदस्यों को इस निर्वाचक गण में कोई स्थान नहीं दिया गया है।
- 2. उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए आवश्यक प्रस्ताव (संकल्प) केवल राज्यसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है, और लोकसभा में इस प्रकार के प्रस्ताव को पेश करने का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है, बशर्ते कि इस आशय का प्रस्ताव राज्यसभा द्वारा अपने तत्सम उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के पूर्ण बहुमत (Absolute Majority) से पारित किया जाए तथा लोकसभा उसकी साधारण बहुमत से सहमति दे।
- 3. अनुच्छेद 75 के उपबंधों के तहत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा संविधान के अनुच्छेद 75(3) में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होगी, जिसका अर्थ यह है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव केवल संपूर्ण मंत्रिपरिषद के विरुद्ध ही लाया जा सकता है, किसी एक व्यक्तिगत मंत्री के विरुद्ध नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक मंडल द्वारा होता है, और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों की इसमें कोई भूमिका नहीं होती। कथन 2 सही है क्योंकि उपराष्ट्रपति को हटाने का संकल्प (Resolution) केवल राज्यसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है (राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित और लोकसभा की सहमति आवश्यक)। कथन 3 गलत है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 75(3) के तहत मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, किंतु अविश्वास प्रस्ताव (No-confidence Motion) या निंदा प्रस्ताव (Censure Motion) किसी एक व्यक्तिगत मंत्री के विरुद्ध भी लोकसभा में लाया जा सकता है, जिससे पूरी मंत्रिपरिषद की सामूहिक जवाबदेही और एकता सुनिश्चित होती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया था। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 74वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में नया भाग IX-A जोड़ा गया, जिसका शीर्षक 'नगरपालिकाएँ' है तथा इसमें अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तक के प्रावधान शामिल हैं, साथ ही संविधान में बारहवीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें नगरपालिकाओं के क्षेत्राधिकार से संबंधित 18 कार्य-विषय (Functional Items) सूचीबद्ध किए गए हैं।
2. इस अधिनियम के तहत तीन प्रकार की नगरपालिकाओं के गठन का प्रावधान किया गया है—संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, छोटे नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद, और बड़े नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम; किंतु ऐसे किसी भी क्षेत्र के लिए नगरपालिका का गठन नहीं किया जा सकता जिसे राज्यपाल सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा औद्योगिक नगरी (Industrial Township) घोषित कर दें।
3. नगरपालिकाओं के सभी स्थानों के लिए निर्वाचन सीधे तौर पर क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा होता है, और वार्ड समितियों (Ward Committees) के गठन का प्रावधान उन नगरपालिकाओं के लिए अनिवार्य है जिनकी कुल जनसंख्या 10 लाख या उससे अधिक है, तथा इसके अतिरिक्त नगरपालिकाओं में महिलाओं के लिए कुल सीटों का कम से कम एक-तिहाई (33%) स्थान आरक्षित होना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा 'राष्ट्रीय आपातकाल' की उद्घोषणा के आधार से 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर उसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को जोड़ा गया, और यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल मंत्रिमंडल (Cabinet) के लिखित निर्णय के आधार पर ही राष्ट्रपति द्वारा की जा सकती है।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल संपूर्ण देश में या उसके किसी विशिष्ट भाग में एक साथ लागू कर सकता है, जबकि 44वें संशोधन ने यह शक्ति दी कि आपातकाल देश के केवल एक निश्चित हिस्से तक भी सीमित रखा जा सकता है।
3. अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्य विधानसभा को या तो विघटित किया जा सकता है या निलंबित रखा जा सकता है, किंतु 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा यह उपबंध किया गया कि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को किसी भी न्यायालय में न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा, जिसे बाद में 44वें संशोधन द्वारा समाप्त कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा (Constituent Assembly) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के गठन के लिए जुलाई-अगस्त 1946 में हुए चुनावों में कुल 389 सीटों में से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 208 सीटें और मुस्लिम लीग को 73 सीटें प्राप्त हुई थीं, तथा इस सभा में ब्रिटिश भारत के प्रांतों के साथ-साथ रियासतों और मुख्य आयुक्त के क्षेत्रों को भी उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया गया था।
2. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी जिसमें मुस्लिम लीग ने भाग नहीं लिया था, और सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को फ्रांस की पद्धति के अनुरूप सभा का अस्थायी अध्यक्ष चुना गया था, जबकि बाद में 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष तथा एच.सी. मुखर्जी और वी.टी. कृष्णमाचारी दोनों को सभा का उपाध्यक्ष निर्वाचित किया गया था।
3. संविधान सभा द्वारा संविधान के निर्माण के लिए कुल 22 मुख्य समितियों का गठन किया गया था, जिनमें से प्रारूप समिति (Drafting Committee) सबसे महत्वपूर्ण थी, जिसका गठन 29 अगस्त 1947 को किया गया था और इसमें अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अंबेडकर सहित कुल 8 सदस्य शामिल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 39A के तहत 'समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता' का उपबंध मूल संविधान का हिस्सा नहीं था, बल्कि इसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अंतःस्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक या अन्य असमर्थता के कारण कोई भी नागरिक न्याय पाने से वंचित न रहे।
2. अनुच्छेद 43A के अंतर्गत उद्योगों के प्रबंधन में कामगारों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश राज्य को दिया गया है, और यह निदेशक तत्व समाजवादी विचारधारा पर आधारित है जिसे वर्ष 1978 के 44वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में जोड़ा गया था।
3. अनुच्छेद 48A के अनुसार राज्य देश के पर्यावरण के संरक्षण तथा संवर्धन का और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा करने का प्रयास करेगा, जिसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में शामिल किया गया था।
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो वह स्वतः ही भारत का नागरिक नहीं रहता है, और यह नियम केवल शांति काल पर लागू होता है, आपातकाल के दौरान इस पर रोक लगाई जा सकती है।
2. भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत 'देशीकरण' (Naturalization) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है कि आवेदक किसी ऐसे देश का नागरिक न हो जहाँ भारतीय नागरिकों को देशीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने से वंचित किया जाता हो।
3. संसद को यह अनन्य संवैधानिक शक्ति प्राप्त है कि वह नागरिकता के अर्जन और उसकी समाप्ति से संबंधित किसी भी विषय पर कानून बना सके, और इसी शक्ति के प्रयोग के माध्यम से संसद ने अब तक नागरिकता अधिनियम, 1955 में कई बार संशोधन किए हैं, जैसे कि वर्ष 2019 का नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA)।
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