त्वरित लिंक्स
Indian Polity
22 views
भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों (High Courts) की अधिकारिता, रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction) और अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अधीन किसी उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction) भौगोलिक सीमाओं के मामले में उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अधीन रिट क्षेत्राधिकार की तुलना में अधिक विस्तृत है, क्योंकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ 'किसी अन्य प्रयोजन' के लिए भी रिट जारी कर सकता है, तथा यह रिट ऐसे किसी व्यक्ति या प्राधिकारी के विरुद्ध भी जारी की जा सकती है जो उच्च न्यायालय के प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर स्थित हो, भले ही वह प्राधिकारी या सरकार उस क्षेत्र के बाहर स्थित हो।
- 2. अनुच्छेद 227 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर सभी न्यायालयों और अधिकरणों (Tribunals) के अधीक्षण (Superintendence) की शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति में केवल न्यायिक अधीक्षण (Judicial Superintendence) ही शामिल है, प्रशासनिक अधीक्षण (Administrative Superintendence) का अधिकार पूरी तरह से राज्य के राज्यपाल और उच्च न्यायालय के प्रशासनिक नियंत्रण से बाहर रखा गया है।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 235 के अंतर्गत राज्य के जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण, जिसमें posting, promotion और छुट्टी का अनुदान शामिल है, संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है, किंतु राज्यपाल द्वारा जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और प्रमोशन के संबंध में उच्च न्यायालय से परामर्श करना उस समय तक अनिवार्य नहीं होता जब तक कि राज्य लोक सेवा आयोग की संस्तुति प्राप्त न हो चुकी हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय की तुलना में अधिक विस्तृत है। उच्चतम न्यायालय केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी कर सकता है, जबकि उच्च न्यायालय मूल अधिकारों के साथ-साथ 'अन्य प्रयोजनों' (जैसे सामान्य कानूनी अधिकारों के उल्लंघन पर) के लिए भी रिट जारी कर सकता है। इसके अलावा, उच्च न्यायालय की प्रादेशिक सीमा के भीतर रहने वाले व्यक्ति या सरकार के विरुद्ध भी रिट जारी की जा सकती है, भले ही वह प्राधिकारी उस क्षेत्र के बाहर स्थित हो (सुप्रीम कोर्ट के 'चन्द्र कुमार वाद' के अनुसार यह उच्च न्यायालय की बुनियादी संरचना का हिस्सा है)। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 227 के तहत उच्च न्यायालय के अधीक्षण (Superintendence) के दायरे में 'न्यायिक' और 'प्रशासनिक' दोनों प्रकार के अधीक्षण शामिल हैं। उच्च न्यायालय अपने अधीनस्थ न्यायालयों के प्रशासनिक कामकाज, रजिस्टरों के रखरखाव और कार्यप्रणाली पर भी पूर्ण नियंत्रण रखता है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 235 के अनुसार जिला न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण (जिसमें posting, promotion और छुट्टी देना शामिल है) पूरी तरह से उच्च न्यायालय में निहित होता है, और इसके लिए राज्य के राज्यपाल को जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति या पदस्थापन के समय उच्च न्यायालय से परामर्श करना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था।
Related Questions
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) और केंद्र-राज्य वित्तीय व प्रशासनिक संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को लोक हित में अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और यह परिषद् केवल एक विधिक और परामर्शदात्री निकाय (Consultative Body) है, जिसका अर्थ है कि इसके द्वारा दिए गए सुझाव केंद्र या राज्यों पर किसी भी स्थिति में बाध्यकारी नहीं होते हैं।
2. वर्ष 1990 में न्यायमूर्ति सरकारीया आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुतियों के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश द्वारा 'अंतर-राज्यीय परिषद्' का गठन किया गया था, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री करते हैं तथा इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री शामिल होते हैं।
3. संविधान के अनुच्छेद 261 के तहत भारत के राज्यक्षेत्र के सभी भागों में संघ और प्रत्येक राज्य के सार्वजनिक कृत्यों (Public Acts), अभिलेखों (Records) और न्यायिक बहियों (Judicial Proceedings) को पूर्ण विश्वास और साक्ष्य (Full Faith and Credit) प्राप्त होगा, और इस संबंध में संसद को विधि द्वारा यह निर्धारित करने की शक्ति प्राप्त है कि ऐसे कृत्यों और अभिलेखों को किस प्रकार प्रमाणित किया जाएगा और उनका प्रभाव क्या होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
राज्य विधानमंडल के अंतर्गत विधानसभा और विधान परिषद की वित्तीय शक्तियों, धन विधेयकों तथा साधारण विधेयकों की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 198 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) को विधान परिषद में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, और यदि विधानसभा द्वारा पारित कोई धन विधेयक विधान परिषद को भेजा जाता है, तो विधान परिषद के पास यह संवैधानिक शक्ति होती है कि वह उस पर अपनी संस्तुति दे सके, किंतु वह इसे न तो अस्वीकार कर सकती है और न ही चौदह दिन से अधिक की अवधि के लिए रोक सकती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 197 के प्रावधानों के तहत यदि किसी साधारण विधेयक को विधानसभा द्वारा दूसरी बार पारित करके विधान परिषद के पास भेजा जाता है, और विधान परिषद उसे फिर से अस्वीकार कर देती है या ऐसे संशोधन करती है जिनसे विधानसभा सहमत नहीं है, तो विधान परिषद उस विधेयक को अधिकतम एक माह की अवधि तक और रोक सकती है, जिसके पश्चात वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में उसे विधानसभा ने दूसरी बार पारित किया था।
3. राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी भी विधेयक (चाहे वह धन विधेयक हो या साधारण विधेयक) को कानून बनने के लिए राज्यपाल की अनुमति अनिवार्य होती है, और जब कोई धन विधेयक राज्यपाल की अनुमति के लिए प्रस्तुत किया जाता है, तो राज्यपाल के पास यह शक्ति होती है कि वह उस विधेयक को राज्य विधानमंडल के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेज सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के अंतर्गत ब्रिटिश काल में पारित विभिन्न अधिनियमों (Acts) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पद नाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, तथा इस अधिनियम के तहत सर्वप्रथम कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीश शामिल थे।
2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक् कर दिया गया, जिसके तहत व्यापारिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) और राजनीतिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) की स्थापना की गई।
3. चार्टर अधिनियम, 1833 के द्वारा बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बना दिया गया और देश में पहली बार विधि निर्माण के लिए गवर्नर-जनरल की परिषद में एक 'विधि सदस्य' (Law Member) के रूप में लॉर्ड मैकाले को चौथे सदस्य के रूप में शामिल किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य पूरे भारत के राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, और यह निर्देश उन विशिष्ट नीति निर्देशक तत्वों में शामिल है जिन्हें मूल संविधान में नहीं जोड़ा गया था, बल्कि बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा अंतःस्थापित किया गया था।
2. अनुच्छेद 45 में मूल रूप से यह प्रावधान था कि राज्य इस संविधान के प्रारंभ से दस वर्ष की अवधि के भीतर सभी बालकों के लिए चौदह वर्ष की आयु पूरी होने तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रयास करेगा, जिसे बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित करके प्रारंभिक शिक्षा को अनुच्छेद 21क के तहत एक मौलिक अधिकार बना दिया गया।
3. अनुच्छेद 50 के अंतर्गत राज्य की लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक् करने के लिए राज्य कदम उठाएगा, और यह सिद्धांत शक्ति के पृथक्करण (Separation of Powers) के प्रशासनिक दर्शन पर आधारित है जो देश की शासन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और स्वतंत्र बनाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत सर्वोच्च न्यायालय को 'रिट' (Writ) जारी करने की शक्ति प्राप्त है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.