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History of India
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दारा शिकोह ने किस नाम से 52 उपनिषदों का फारसी में अनुवाद करवाया था?

Detailed Explanation

दारा शिकोह ने 52 उपनिषदों का अनुवाद सिर-ए-अकबर नाम से करवाया था।
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→ ग़दर पार्टी और क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1913 में सैन फ्रांसिस्को में स्थापित 'ग़दर पार्टी' के मुखपत्र 'ग़दर' साप्ताहिक अखबार का पहला अंक गुरुमुखी लिपि में प्रकाशित हुआ था। 2. ग़दर पार्टी के संस्थापकों में सोहन सिंह भाकना इसके अध्यक्ष थे, जबकि लाला हरदयाल इसके मुख्य मार्गदर्शक और मंत्री थे। 3. प्रथम विश्व युद्ध के छिड़ते ही ग़दर पार्टी के सदस्यों ने 'बागी देश लौट चलो' का नारा देकर भारत में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह करने के लिए पंजाब की ओर रुख किया था। 4. कामागाटामारू प्रकरण (1914) के जहाज के यात्रियों का ग़दर आंदोलन से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था और न ही इस घटना ने ग़दर क्रांतिकारियों की गतिविधियों को प्रभावित किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → चंपारण सत्याग्रह (1917) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) के ऐतिहासिक संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण में यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तीनकथा प्रणाली' थोपी गई थी, जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी पड़ती थी और वर्ष 1917 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुए इस सफल आंदोलन के दबाव के कारण सरकार ने 'चंपारण कृषि अधिनियम' पारित कर इस प्रथा को समाप्त कर दिया था। 2. खेड़ा सत्याग्रह के दौरान गुजरात में फसलों के पूर्णतः नष्ट होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा राजस्व वसूली माफ नहीं की गई थी, और इस आंदोलन में सरदार वल्लभभाई पटेल, इंदुलाल याज्ञिक और शुकलाल पाठक जैसे स्थानीय नेताओं ने गांधीजी के साथ मिलकर किसानों का सफल नेतृत्व किया था। 3. वर्ष 1918 के अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन के दौरान गांधीजी ने पहली बार भारत में 'भूख हड़ताल' (Hunger Strike) का अस्त्र के रूप में प्रयोग किया था, जिसका मुख्य उद्देश्य मिल मालिकों और मजदूरों के बीच प्लेग बोनस को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाना था, और अंत में ट्रिब्यूनल के फैसले से मजदूरों को 35 प्रतिशत बोनस दिलाया गया था। 4. चंपारण सत्याग्रह के दौरान ही रविराज सिंह और राजकुमार शुक्ल जैसे स्थानीय किसानों ने महात्मा गांधी को चंपारण आने का निमंत्रण दिया था, तथा इस आंदोलन की सफलता से प्रभावित होकर रबीन्द्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को पहली बार 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों और उनके दार्शनिक तथा सामाजिक दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रामानुज ने 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जीव और जगत दोनों ब्रह्म का ही अंश हैं, किंतु वे ब्रह्म से पूर्णतः भिन्न नहीं बल्कि विशिष्ट रूप से जुड़े हुए हैं। 2. मध्वाचार्य ने 'द्वैतवाद' (Dualism) का सिद्धांत दिया, जिसके अंतर्गत ईश्वर (विष्णु) और जीवात्मा को दो पूर्णतः स्वतंत्र और भिन्न वास्तविकताएं माना गया है। 3. वल्लभाचार्य द्वारा प्रतिपादित 'शुद्धैद्वैतवाद' के अनुसार संसार माया का परिणाम नहीं है, बल्कि यह ब्रह्म का ही वास्तविक और शुद्ध रूप है, और उनकी भक्ति परंपरा को 'पुष्टिमार्ग' कहा जाता है। 4. कबीर और गुरु नानक ने निर्गुण भक्ति पर जोर दिया और जाति-प्रथा, मूर्तिपूजा तथा ब्राह्मणवादी कर्मकांडों का पुरजोर विरोध किया, किंतु उन्होंने समाज सुधार के लिए मुस्लिम शासकों और काजियों के धार्मिक अत्याचारों का समर्थन किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके वैचारिक तथा संस्थागत विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पैतृक पुरोहितवाद का कड़ा विरोध करते हुए एकेश्वरवाद पर बल दिया, तथा देवेंद्रनाथ ठाकुर के नेतृत्व में इसे और अधिक संगठित रूप प्रदान करते हुए 'तत्वबोधिनी सभा' का इसमें विलय कर दिया गया। 2. प्रार्थना समाज (1867) की स्थापना आत्माराम पांडुरंग ने बॉम्बे में की थी, जिसे महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर जैसे विद्वानों का समर्थन प्राप्त हुआ, और इसने मुख्य रूप से अंतर-जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह तथा महिला शिक्षा को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया। 3. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया तथा पाखंड खंडनी पताका के माध्यम से रूढ़िवादी हिंदू मान्यताओं का खंडन करते हुए 'शुद्धि आंदोलन' की शुरुआत की, जिससे धर्मान्तरित हिंदुओं की स्वधर्म में वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ। 4. साधारण ब्रह्म समाज की स्थापना 1878 में आनंदमोहन बोस, शिवनाथ शास्त्री और द्विजनाथ गांगुली द्वारा केशव चंद्र सेन की अल्पायु पुत्री के कूचबिहार के राजा के साथ विवाह जैसे मुद्दों और ब्रह्म समाज में बढ़ती निरंकुशता के विरोधस्वरूप की गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में भक्ति और सूफी आंदोलनों के प्रसार, उनके प्रमुख संतों तथा उनकी दार्शनिक प्रणालियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण भारत के अद्वैतवादी दार्शनिक शंकराचार्य के विपरीत, रामानुज ने 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जीव और ब्रह्म दोनों अलग होने के बावजूद परम सत्य में एकीभूत होते हैं तथा भक्ति को मोक्ष का सर्वोच्च साधन माना गया। 2. उत्तर भारत में निर्गुण भक्ति धारा के महान संत कबीर ने जाति, वर्ग और बाह्य आडंबरों पर कड़े प्रहार किए, जबकि सगुण भक्ति धारा के अंतर्गत वल्लभाचार्य ने 'शुद्धैद्वैत' दर्शन और पुष्टिमार्ग की स्थापना की, जो भगवान कृष्ण की बाल-लीला और भक्ति पर केंद्रित था। 3. भारत में चिश्ती सिलसिले के सूफी संत निजामुद्दीन औलिया ने राज्य की राजनीति से दूरी बनाए रखने की नीति का पालन किया और उनके दरबार के द्वार सभी जातियों और धर्मों के लिए खुले थे, जिसके कारण उन्हें 'महबूब-ए-इलाही' की उपाधि से सम्मानित किया गया। 4. नक्शबंदी सिलसिले के प्रसिद्ध संत शेख अहमद सरहिंदी ने मुगल सम्राट अकबर द्वारा चलाई गई उदारवादी नीतियों और 'सुलह-कुल' के सिद्धांत का खुलकर समर्थन किया तथा शरियत के कानूनों को नरम करने पर विशेष बल दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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