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Indian Polity
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भारतीय संविधान की राजभाषा से संबंधित प्रावधानों, राजनीतिक दलों के पंजीकरण एवं उनकी मान्यता, तथा संविधान की अनुसूचियों और भागों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है, तथा संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप है, किंतु संसद को यह अधिकार है कि वह विधि द्वारा 1965 के पश्चात भी अंग्रेजी भाषा के निरंतर प्रयोग के लिए उपबंध कर सकती है।
- 2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) में राजनीतिक दलों का पंजीकरण किया जाता है, किंतु आयोग को किसी पंजीकृत राजनीतिक दल को उसकी राजनीतिक गतिविधियों के आधार पर डी-रजिस्टर (पंजीकरण रद्द करने) की वैधानिक शक्ति सीधे तौर पर इस अधिनियम द्वारा प्रदान नहीं की गई है।
- 3. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संविधान संशोधन) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और किसी भी भाषा को इस अनुसूची में शामिल करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 368 के अंतर्गत विशेष बहुमत से संविधान संशोधन करना अनिवार्य होता है।
- 4. संविधान के भाग IX-A के तहत नगरपालिकाओं का प्रावधान किया गया है, जबकि नौवीं अनुसूची को प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य भूमि सुधार कानूनों को न्यायिक समीक्षा से बचाना था, हालांकि 'केशवानंद भारती वाद' (1973) के पश्चात 24 अप्रैल 1973 के बाद नौवीं अनुसूची में जोड़े गए कानूनों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है यदि वे संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 343 के अंतर्गत संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है तथा अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप निर्धारित किया गया है; साथ ही राजभाषा अधिनियम, 1963 के माध्यम से 1965 के बाद भी अंग्रेजी के प्रयोग को जारी रखा गया है। कथन 2 सही है क्योंकि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत निर्वाचन आयोग राजनीतिक दलों का पंजीकरण तो करता है, किंतु उसके पास आंतरिक धोखाधड़ी या संविधान विरोधी गतिविधियों के आधार पर किसी दल का पंजीकरण रद्द करने की स्वतः वैधानिक शक्ति नहीं है (सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार)। कथन 3 गलत है क्योंकि आठवीं अनुसूची में किसी भाषा को शामिल करने या हटाने के लिए अनुच्छेद 368 के तहत 'संविधान संशोधन' की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि यह संसद द्वारा साधारण या विशेष विधायी प्रक्रिया (संसद के साधारण बहुमत) के माध्यम से भी किया जा सकता है या अनुसूची में संशोधन सामान्य विधेयकों द्वारा होता है (हालाँकि इसके लिए संवैधानिक संशोधन अधिनियम लाए जाते हैं, पर वे अनुच्छेद 368 के विशेष दायरे से भिन्न हो सकते हैं)। कथन 4 पूरी तरह सही है क्योंकि भाग IX-A नगरपालिकाओं से संबंधित है और नौवीं अनुसूची प्रथम संशोधन 1951 द्वारा जोड़ी गई थी, तथा आई.आर. कोएल्हो वाद (2007) के अनुसार 24 अप्रैल 1973 के बाद की नौवीं अनुसूची की प्रविष्टियाँ न्यायिक समीक्षा के दायरे में आती हैं। इस प्रकार 1, 2 और 4 सही हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर अध्ययन करें।
Related Questions
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भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा और राजनैतिक दलों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधन) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, किंतु इस अनुसूची में 'अंग्रेज़ी' और 'राजस्थानी' भाषाओं को अभी तक आधिकारिक रूप से शामिल नहीं किया गया है।
2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा से संबंधित उपबंध किए गए हैं, जिसके तहत अनुच्छेद 351 में यह निर्देश दिया गया है कि संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके और उसके रूप में मुख्य रूप से संस्कृत के साथ-साथ देश की अन्य भाषाओं की शब्दावली को भी आत्मसात करे।
3. वर्ष 1985 के 52वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसके तहत दलबदल के आधार पर संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की निर्हता (Disqualification) से संबंधित उपबंध किए गए हैं, और इस अनुसूची के अंतर्गत दलबदल से जुड़े किसी विवाद पर अंतिम निर्णय लेने की शक्ति संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी (सभापति या अध्यक्ष) के पास होती है, जिसका न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) की अधिकारिता, उनके न्यायाधीशों की स्वतंत्रता तथा अधीनस्थ न्यायालयों के नियंत्रण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी अन्य प्रयोजन के लिए भी रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और उच्च न्यायालय की यह रिट अधिकारिता सर्वोच्च न्यायालय की अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्राप्त रिट अधिकारिता की तुलना में अधिक विस्तृत (Wider) है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन पर ही रिट जारी कर सकता है।
2. अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और प्रमोशन राज्यपाल द्वारा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात किए जाते हैं, तथा जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम पिछले सात वर्षों से अधिवक्ता या बैरिस्टर रहा हो और संघ या राज्य की सेवा में पहले से कार्यरत न हो।
3. अनुच्छेद 235 के तहत राज्यों के अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) पर नियंत्रण, जिसमें जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों की पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टियों से संबंधित नियंत्रण शामिल है, पूरी तरह से राज्य के राज्यपाल में निहित होता है, और इसमें उच्च न्यायालय की कोई परामर्शदात्री या निर्णायक भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) और केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और यह परिषद् एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Constitutional Body) है जिसका मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना और उन पर अंतिम एवं बाध्यकारी निर्णय देना है।
2. अंतर-राज्यीय परिषद् की बैठकों की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा की जाती है, और इस परिषद् में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासक इसके सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।
3. अनुच्छेद 263 के तहत स्थापित इस परिषद् की प्रकृति मुख्य रूप से संस्तुति प्रदान करने वाली (Advisory) है, न कि न्यायिक निर्णय देने वाली।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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किसी विधेयक को 'धन विधेयक' (Money Bill) घोषित करने की शक्ति किसे प्राप्त है?
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राष्ट्रपति किस अनुच्छेद के तहत क्षमादान देते हैं?
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