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Indian Polity
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथा वैधानिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान की प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संशोधन किया गया है, जिसके माध्यम से इसमें 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए थे।
- 2. प्रस्तावना में उल्लिखित 'राजनीतिक न्याय' के आदर्श को सोवियत संघ (रूस) की 1917 की क्रांति से प्रेरणा लेकर शामिल किया गया है, जबकि 'स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व' के आदर्श फ्रांसीसी क्रांति (1789) पर आधारित हैं।
- 3. सर्वोच्च न्यायालय ने बेरूबारी यूनियन वाद (1960) में यह निर्धारित किया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है, और संसद अनुच्छेद 368 के तहत इसमें संशोधन कर सकती है, बशर्ते वह संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन न करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए थे। कथन 2 सही है: प्रस्तावना में 'सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय' का आदर्श 1917 की रूसी क्रांति से लिया गया है, जबकि 'स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व' के आदर्श 1789 की फ्रांसीसी क्रांति से प्रेरित हैं। कथन 3 गलत है: 'बेरूबारी यूनियन वाद (1960)' में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि प्रस्तावना संविधान का अंग **नहीं** है। इसके विपरीत, 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को बदलते हुए यह माना कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है और इसमें संशोधन किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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भारतीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के तदर्थ न्यायाधीशों (Ad-hoc Judges), सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उपस्थिति और न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 127 के अनुसार यदि उच्चतम न्यायालय के सत्र को आयोजित करने या चालू रखने के लिए न्यायाधीशों की कोरम (गणपूर्ति) पूरी नहीं होती है, तो भारत का मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति तथा संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करने के पश्चात, किसी उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए अर्ह है, तदर्थ न्यायाधीश के रूप में कुछ समय के लिए नियुक्त कर सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 128 के अंतर्गत भारत का मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति से, उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से अनुरोध कर सकता है कि वह उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में बैठें और कार्य करें, और ऐसे सेवानिवृत्त न्यायाधीश को राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित भत्ते और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, किंतु वे न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की तरह न्यायालय के पूर्णकालिक सदस्य नहीं माने जाते हैं।
3. 'सिविल अवमानना' (Civil Contempt) के अंतर्गत न्यायालय के किसी आदेश, डिक्री, निर्देश, रिट या अन्य प्रक्रिया की जानबूझकर की गई अवज्ञा या न्यायालय के समक्ष दिए गए किसी वचन का जानबूझकर उल्लंघन करना शामिल है, और उच्चतम न्यायालय को संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) के रूप में अपनी अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति प्राप्त है, जिसमें कारावास और आर्थिक दंड दोनों शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संसद की सबसे बड़ी संसदीय समिति कौन सी है?
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा तथा राज्यसभा की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अंतर्गत धन विधेयकों (Money Bills) के संबंध में विशेष प्रक्रिया निर्धारित की गई है, जिसके तहत धन विधेयक केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है और लोकसभा द्वारा पारित किए जाने के बाद इसे राज्यसभा में भेजा जाता है, जहाँ राज्यसभा के पास इस विधेयक को अस्वीकृत करने या इसमें संशोधन करने की शक्ति नहीं होती, वह अधिकतम 14 दिनों की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिश के इसे लोकसभा को लौटा सकती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 108 के प्रावधानों के तहत संसद के दोनों सदनों के बीच किसी साधारण विधेयक (Ordinary Bill) पर उत्पन्न गतिरोध को समाप्त करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त बैठक (Joint Sitting) आहूत की जा सकती है, और संयुक्त बैठक की अध्यक्षता अनिवार्य रूप से लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है, तथा यदि वह अनुपस्थित है तो राज्यसभा का सभापति इस बैठक की अध्यक्षता करता है।
3. वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट - अनुच्छेद 112) के संबंध में अनुदान की माँगे (Demands for Grants) केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत की जाती हैं और उन पर मतदान का अधिकार केवल लोकसभा को ही प्राप्त है, जबकि राज्यसभा इन माँगों पर चर्चा तो कर सकती है किंतु अनुदान की माँगों पर मतदान में भाग लेने या उन्हें अस्वीकृत करने का अधिकार उसे प्राप्त नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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परमाणु घड़ी निम्नलिखित में से किसके संक्रमण (transition) पर आधारित होती है?
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण की प्रक्रिया तथा मुख्यमंत्री की स्थिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की शक्ति राज्य विधानमंडल की कानून बनाने की शक्ति के साथ पूर्णतः समवर्ती होती है, किंतु राज्यपाल किसी भी परिस्थिति में ऐसा अध्यादेश प्रख्यापित नहीं कर सकता है यदि राज्य विधानमंडल का सत्र चल रहा हो अथवा संबंधित अध्यादेश के समान उपबंधों वाले किसी विधेयक को राज्य विधानमंडल में बिना राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के प्रस्तुत नहीं किया जा सकता था।
2. संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा मंत्रियों के बीच विभागों का आवंटन और फेरबदल करना राज्यपाल का वैधानिक और स्वविवेक अधिकार है, जिसमें मुख्यमंत्री की सहमति अनिवार्य नहीं होती है।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'एस. आर. बोम्मई वाद' (1994) में यह स्पष्ट किया गया कि राज्यपाल द्वारा किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) की सिफारिश करने से पूर्व मुख्यमंत्री को सदन के पटल पर अपना बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना अनिवार्य है, और बहुमत परीक्षण सदन के भीतर ही होना चाहिए, न कि राजभवन के परिसर में।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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