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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान का अनुच्छेद 9 स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है कि यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसका भारत का नागरिक बना रहना स्वतः समाप्त हो जाएगा, और इस संबंध में संसद को कानून बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
- 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 (मूल अधिनियम) के अनुसार, भारत में जन्म द्वारा (By Birth) नागरिकता प्राप्त करने का प्रावधान यह था कि 26 जनवरी 1950 को या उसके पश्चात भारत में जन्मा प्रत्येक व्यक्ति जन्म से भारत का नागरिक होगा, भले ही उसके माता-पिता में से कोई एक विदेशी शत्रु देश का नागरिक ही क्यों न हो।
- 3. अनुच्छेद 11 भारतीय संसद को यह व्यापक शक्ति प्रदान करता है कि वह नागरिकता के अर्जन और उसकी समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में कोई भी उपबंध कर सके, और इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद ने वर्ष 1986, 1992, 2003, 2005, 2015 और 2019 में नागरिकता अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राष्ट्र की नागरिकता ग्रहण कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त (Termination) हो जाती है। कथन 2 गलत है: नागरिकता अधिनियम, 1955 के मूल प्रावधान के अनुसार 26 जनवरी 1950 या उसके बाद भारत में जन्मा व्यक्ति नागरिक था, किंतु इसमें यह अपवाद था कि यदि जन्म के समय उसके माता-पिता में से कोई एक 'शत्रु देश का एलियन' (Alien Enemy) हो और जन्म ऐसे स्थान पर हुआ हो जो उस समय शत्रु के अधिकार में था, तो वह जन्म से नागरिक नहीं माना जाएगा। इसके अतिरिक्त, बाद के संशोधनों (जैसे 1986 और 2003 के संशोधन) द्वारा जन्म द्वारा नागरिकता के नियमों को और अधिक कड़ा किया गया, जिसमें माता-पिता दोनों की नागरिकता की स्थिति को अनिवार्य बनाया गया। कथन 3 सही है: संविधान का अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के संबंध में कानून बनाने की पूर्ण और अनन्य शक्ति प्रदान करता है, और इसी शक्ति के तहत संसद ने 1955 का अधिनियम पारित किया तथा समय-समय पर इसमें आवश्यक संशोधन किए हैं। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था।
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भारतीय संविधान के भाग IV में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - अनुच्छेद 36-51) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 40 के तहत राज्य, ग्राम पंचायतों के संगठन के लिए कदम उठाएगा और उन्हें ऐसी शक्तियां प्रदान करेगा जो उन्हें स्वायत्त शासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों, तथा यह नीति निर्देशक तत्व प्रकृति से न्यायोचित (Justiciable) है, जिससे नागरिक इसके क्रियान्वयन के लिए सीधे न्यायालय की शरण ले सकते हैं।
2. अनुच्छेद 45 के मूल पाठ में यह प्रावधान था कि राज्य, इस संविधान के प्रारंभ होने से दस वर्ष की अवधि के भीतर, सभी बालकों के लिए चौदह वर्ष की आयु पूरी होने तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने के लिए प्रयास करेगा, जिसे बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित कर प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का प्रावधान बनाया गया।
3. संविधान के अनुच्छेद 51 के अनुसार राज्य, अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि करने, राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत और सम्मानजनक संबंधों को बनाए रखने, और अंतर्राष्ट्रीय विवादों के मध्यस्थता द्वारा निपटारे के लिए प्रोत्साहन देने का प्रयास करेगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की शक्तियों, प्रधानमंत्री की नियुक्ति तथा मंत्रिपरिषद के उत्तरदायित्व और कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा, जो पदेन सभापति के रूप में राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है, किंतु जब वह राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या उसके कृत्यों का निर्वहन करता है, तब वह राज्यसभा के सभापति के रूप में किसी भी वेतन या भत्ते का हकदार नहीं होता है और न ही उस अवधि में राज्यसभा के सभापति के कर्तव्यों का पालन करता है।
2. अनुच्छेद 75(1) के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित है कि प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, जिसे 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा जोड़ा गया था।
3. अनुच्छेद 78 के अनुसार प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन से संबंधित और विधानविषयक प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे तथा राष्ट्रपति द्वारा माँगे जाने पर ऐसी सूचना प्रदान करे, और यदि कोई मंत्री किसी विषय पर अकेले निर्णय ले लेता है जिसे मंत्रिपरिषद ने अनुमोदित नहीं किया है, तो राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर उसे तुरंत बर्खास्त कर सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के अंतर्संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 352 में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए की जा सकती है, तथा राष्ट्रपति पूरे देश में एक साथ आपातकाल लागू करने के लिए बाध्य था, वह इसके किसी विशिष्ट भाग तक इसे सीमित नहीं कर सकता था।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 352 में 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर उसकी जगह 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को जोड़ा गया, और यह भी अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की लिखित अनुशंसा (Written Recommendation) प्राप्त होने के बाद ही राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है।
3. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा ही यह संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की गई कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को निलंबित नहीं किया जा सकता है, तथा अनुच्छेद 359 के तहत अन्य मूल अधिकारों के निलंबन के आदेश को संसद के दोनों सदनों के समक्ष अनुमोदन के लिए रखना अनिवार्य किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के राष्ट्रपति की विधाई, कूटनीतिक और आपातकालीन शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 85 के अंतर्गत राष्ट्रपति को लोकसभा को विघटित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति उसकी ऐसी कार्यपालिका शक्ति है जिसके प्रयोग के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सलाह मानना राष्ट्रपति के लिए पूर्ण रूप से बाध्यकारी होता है, भले ही मंत्रिपरिषद ने लोकसभा में बहुमत खो दिया हो या न खोया हो।
2. भारत का राष्ट्रपति किसी भी देश के साथ अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों पर हस्ताक्षर करने और उन्हें स्वीकार करने के लिए पूर्णतः अधिकृत होता है, किंतु ऐसी सभी अंतरराष्ट्रीय संधियाँ और समझौते स्वतः ही भारत के घरेलू कानून बन जाते हैं और उनके क्रियान्वयन के लिए संसद द्वारा किसी भी विधि का निर्माण करना आवश्यक नहीं होता है।
3. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की उद्घोषणा के समय राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित करने के लिए आदेश जारी कर सकता है, किंतु अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित करने का ऐसा कोई भी आदेश राष्ट्रपति द्वारा कभी भी जारी नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य की कार्यपालिका के अंतर्गत राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री के संवैधानिक उत्तरदायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की वही शक्ति और प्रभाव होता है जो राज्य विधानमंडल के किसी अधिनियम का होता है, किंतु यदि राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग राज्य सूची के किसी ऐसे विषय पर करता है जिस पर कानून बनाने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति आवश्यक थी, तो राज्यपाल ऐसा अध्यादेश राष्ट्रपति के निर्देशों के बिना प्रख्यापित नहीं कर सकता है।
2. राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्य की कार्यकारी शक्ति के विस्तार वाले विषयों से संबंधित किसी विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी व्यक्ति को क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति मृत्युदंड के मामलों में भी राज्यपाल को राष्ट्रपति के समान अनन्य रूप से पूर्णतः प्राप्त होती है।
3. अनुच्छेद 167 के प्रावधानों के अनुसार मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासनिक मामलों और विधान विषयक प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, किंतु राज्यपाल द्वारा माँगे जाने पर भी वह मंत्रिपरिषद द्वारा अभी तक विचार न किए गए किसी पृथक् मंत्री के व्यक्तिगत विनिश्चय को परिषद के समक्ष रखने से मना कर सकता है।
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