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Indian Polity
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चार्टर अधिनियम, 1853 (Charter Act of 1853) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस अधिनियम के द्वारा गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और प्रशासनिक कार्यों को पहली बार स्पष्ट रूप से अलग किया गया, तथा परिषद में छह नए पार्षदों को जोड़ा गया जिन्हें 'विधान पार्षद' (Legislative Councillors) कहा गया।
- 2. इस अधिनियम के तहत पहली बार भारतीय केंद्रीय विधान परिषद में स्थानीय प्रतिनिधित्व की शुरुआत की गई, जिसके अंतर्गत मद्रास, बॉम्बे, बंगाल और आगरा की स्थानीय सरकारों द्वारा चार नए सदस्यों का चयन किया गया।
- 3. इस अधिनियम ने सिविल सेवकों की भर्ती और चयन के लिए खुली प्रतियोगिता प्रणाली का शुभारंभ किया, जिसके लिए वर्ष 1854 में 'मैकाले समिति' की नियुक्ति की गई और यह व्यवस्था कंपनी के निदेशक मंडल (Court of Directors) के राजनीतिक प्रभाव के अंतर्गत रखी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: चार्टर अधिनियम, 1853 द्वारा गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और प्रशासनिक कार्यों को अलग करने की व्यवस्था की गई। इसके तहत परिषद में छह नए पार्षद जोड़े गए जिन्हें विधान पार्षद कहा गया और इसने एक छोटी संसद की तरह कार्य करना शुरू किया। कथन 2 सही है: इस अधिनियम के द्वारा पहली बार केंद्रीय विधान परिषद में स्थानीय प्रतिनिधित्व (Local Representation) प्रारंभ किया गया। बंगाल, बॉम्बे, मद्रास और आगरा की स्थानीय प्रांतीय सरकारों द्वारा चार स्थानीय प्रतिनिधियों का चुनाव किया गया। कथन 3 गलत है क्योंकि मैकाले समिति (1854) की रिपोर्ट के आधार पर सिविल सेवा परीक्षा को खुली प्रतियोगिता के रूप में शुरू किया गया था, किंतु इसे कंपनी के निदेशक मंडल के प्रभाव में नहीं बल्कि स्वतंत्र रूप से ब्रिटिश लोक सेवा आयोग के प्रशासनिक दायरे में रखा गया था, और इसने कंपनी के प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव को सीमित कर दिया था। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
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मौलिक कर्तव्यों को संविधान में किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया?
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भारत के किस प्रधानमंत्री के कार्यकाल में सबसे अधिक बार 'राष्ट्रपति शासन' लगाया गया?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 318 के अंतर्गत राष्ट्रपति (संघ आयोग के संबंध में) और राज्यपाल (राज्य आयोग के संबंध में) को आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तों को विनियमित करने की शक्ति प्रदान की गई है, बशर्ते कि नियुक्ति के पश्चात् किसी सदस्य के लाभकारी सेवा शर्तों में उसकी अनुमति के बिना कोई बदलाव न किया जाए।
2. संविधान के अनुच्छेद 322 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के व्यय, जिनके अंतर्गत उसके सदस्यों या कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन शामिल हैं, भारत की संचित निधि पर 'भारित व्यय' (Charged Expenditure) होते हैं, जिस पर संसद में मतदान नहीं कराया जा सकता है।
3. संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपना कार्यकाल समाप्त होने के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के अन्य नियोजन (Employment) के लिए पूर्णतः पात्र होता है, क्योंकि उसके पुनः निर्वाचन या पुनर्नियुक्ति पर कोई संवैधानिक प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, विशेषकर अध्यादेश निर्माण (अनुच्छेद 213) और मुख्यमंत्री के संवैधानिक उत्तरदायित्वों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की वही शक्ति और प्रभाव होता है जो राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम का होता है, किंतु राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग अपनी इच्छा से स्वतंत्र रूप से कर सकता है और इसके लिए मंत्रिपरिषद की सलाह अनिवार्य नहीं होती है।
2. अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय और विधान के लिए प्रस्ताव राज्यपाल को संसूचित करे, तथा यदि राज्यपाल किसी ऐसे विषय पर जानकारी मांगता है जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किन्तु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है, तो मुख्यमंत्री उसे प्रस्तुत करने के लिए बाध्य है।
3. राज्य विधानसभा में बहुमत खोने के पश्चात यदि मुख्यमंत्री सदन में विश्वास मत प्राप्त करने से पूर्व त्यागपत्र देने से इंकार कर देता है, तो राज्यपाल मंत्रिपरिषद को बर्खास्त करने का अधिकार रखता है, और राज्यपाल के इस स्वविवेकपूर्ण निर्णय को किसी भी न्यायालय में इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि उसने प्रक्रिया का उल्लंघन किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 और शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 74वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में भाग IX-A जोड़ा गया है, जो अनुच्छेद 243-Q से 243-ZG तक विस्तृत है, और इसके तहत तीन प्रकार की नगरपालिकाओं—नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम—के गठन का प्रावधान किया गया है, बशर्ते किसी संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए नगर पंचायत का गठन किया जाना अनिवार्य है।
2. इस अधिनियम के माध्यम से जोड़ी गई बारहवीं अनुसूची में कुल 29 विषयों को शामिल किया गया है, जिन पर नगरपालिकाओं को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं बनाने तथा कानून लागू करने की पूर्ण विधायी शक्ति सीधे संविधान द्वारा स्वतः प्रदान की गई है।
3. अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्रत्येक ऐसे नगरपालिका क्षेत्र में, जिसकी कुल जनसंख्या तीन लाख या उससे अधिक है, एक या अधिक वार्ड समितियों (Ward Committees) का गठन किया जाना अनिवार्य किया गया है।
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