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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता अधिनियम, 1955 के विधिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान का अनुच्छेद 7 यह प्रावधान करता है कि जो व्यक्ति 1 मार्च 1947 के पश्चात भारत से पाकिस्तान के राजक्षेत्र के लिए प्र्रव्रज्या (Migration) कर गया है, वह भारत का नागरिक नहीं समझा जाएगा, किंतु इसके अंतर्गत यह अपवाद भी शामिल है कि यदि ऐसा व्यक्ति पुनर्वास के स्थायी अनुज्ञापत्र या भारत लौटने के कानूनी परमिट के आधार पर भारत वापस लौट आता है, तो वह अनुच्छेद 6 के प्रयोजनों के लिए भारत को प्र्रव्रज्या करने वाला व्यक्ति माना जाएगा।
  2. 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6 के तहत 'देशीकरण द्वारा' (By Naturalization) नागरिकता प्राप्त करने हेतु यह एक अनिवार्य शर्त है कि आवेदक को आवेदन देने से ठीक पहले के 12 महीनों की अवधि के दौरान भारत में लगातार निवास करना होगा, तथा उससे ठीक पहले के 14 वर्षों में से कम से कम 11 वर्षों तक भारत में निवास करना या सरकारी सेवा में रहना आवश्यक होता है।
  3. 3. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के अंतर्गत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को दी गई नागरिकता संबंधी छूट और 'अवैध प्रवासी' की परिभाषा से मुक्ति का यह विशेष उपबंध संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के अंतर्गत आने वाले असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों तथा 'इनर लाइन परमिट' (ILP) प्रणाली वाले राज्यों पर लागू नहीं होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। संविधान का अनुच्छेद 7 पाकिस्तान को प्रव्रज्या करने वाले व्यक्तियों की नागरिकता के अधिकारों से संबंधित है और इसमें पुनर्वास परमिट के साथ लौटने वालों को राहत का प्रावधान है। नागरिकता अधिनियम, 1955 की तीसरी अनुसूची के अनुसार देशीकरण द्वारा नागरिकता के लिए 12 महीने निरंतर और पिछले 14 वर्षों में से 11 वर्ष निवास की शर्त है। नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) के प्रावधान संविधान की छठी अनुसूची के जनजातीय क्षेत्रों और इनर लाइन परमिट वाले क्षेत्रों पर लागू नहीं होते हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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