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Indian Polity
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution), जिसे 22 जनवरी 1947 को संविधान सभा द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया था, वही प्रस्तावना का मूल आधार बना।
- 2. प्रस्तावना में उपयोग किए गए 'गणराज्य' (Republic) शब्द का तात्पर्य यह है कि भारत का राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति) वंशानुगत न होकर जनता द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक निश्चित अवधि के लिए चुना जाता है।
- 3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में यह स्पष्ट किया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है, इसलिए संसद अनुच्छेद 368 के तहत इसमें संशोधन कर सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान सभा में 13 दिसंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 'उद्देश्य प्रस्ताव' प्रस्तुत किया गया था, जिसे 22 जनवरी 1947 को अपनाया गया और यही आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आधार बना। कथन 2 सही है: 'गणराज्य' (Republic) व्यवस्था का अर्थ है कि देश का सर्वोच्च कार्यकारी प्रमुख (राष्ट्रपति) वंशानुगत नहीं होता, बल्कि उसका निर्वाचन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक निश्चित अवधि के लिए होता है। कथन 3 गलत है: सर्वोच्च न्यायालय ने 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का अंग **नहीं** है। इसके बाद 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को बदलते हुए यह माना कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें संशोधन किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में 'भाग IX-A' (नगरपालिकाएँ) जोड़ा गया तथा संविधान में बारहवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें शहरी स्थानीय सरकारों के प्रशासनिक नियंत्रण और विकास योजना से संबंधित कुल 18 कार्यात्मक विषयों को सूचीबद्ध किया गया है।
2. अनुच्छेद 243-W के अंतर्गत महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee) के गठन का प्रावधान है, जिसके सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सदस्य उस महानगर क्षेत्र के भीतर की नगरपालिकाओं और पंचायतों के निर्वाचित सदस्यों में से ही चुने जाने चाहिए, जो उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या के अनुपात में होते हैं।
3. इस संशोधन के माध्यम से यह अनिवार्य किया गया है कि प्रत्येक नगरपालिका में कुल भरी जाने वाली सीटों (प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा) का कम से कम एक-तिहाई भाग महिलाओं के लिए आरक्षित होगा, तथा जिला योजना समिति (District Planning Committee) के अध्यक्ष का चुनाव राज्य के राज्यपाल द्वारा सीधे नामित किसी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) में उल्लिखित विभिन्न आयामों और उससे संबंधित ऐतिहासिक न्यायिक दृष्टांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को वर्ष 1917 की रूसी क्रांति से प्रेरणा लेकर शामिल किया गया था, जबकि 'स्वतंत्रता, समता और बंधुता' के आदर्श फ्रांसीसी क्रांति पर आधारित हैं।
2. 'गोलकनाथ वाद (1967)' में उच्चतम न्यायालय ने पहली बार यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और संसद को अनुच्छेद 368 के अंतर्गत इसमें संशोधन करने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है।
3. प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्ति का स्रोत है और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है, तथा इसकी प्रकृति गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) है, जिसका अर्थ है कि इसके प्रावधानों को अदालतों में सीधे लागू नहीं कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंधों, अंतर-राज्यीय परिषद् तथा जल विवादों से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को लोकहित में अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) की स्थापना करने की शक्ति प्रदान की गई है, और यह परिषद् केवल राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच और उन पर सलाह देने का कार्य करती है, न कि केंद्र और राज्यों के बीच के विवादों पर।
2. अंतर-राज्यीय परिषद् की संरचना में प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और संघ राज्यक्षेत्रों (जहाँ विधानसभाएँ हैं) के मुख्यमंत्री इसके सदस्य होते हैं, तथा प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त केंद्रीय मंत्रिपरिषद के 6 कैबिनेट मंत्री भी इसके स्थायी सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।
3. संसद को संविधान के अनुच्छेद 262 के अंतर्गत यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा किसी अंतर-राज्यीय नदी या नदी घाटी के पानी के प्रयोग, वितरण या नियंत्रण से संबंधित किसी भी विवाद या शिकायत के न्यायनिर्णयन (Adjudication) के लिए प्रावधान कर सकती है, और इस अनुच्छेद के तहत संसद द्वारा बनाई गई किसी भी विधि के अधीन उच्चतम न्यायालय या किसी अन्य न्यायालय की अधिकारिता का प्रयोग पूर्ण रूप से वर्जित किया जा सकता है।
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भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और संसद द्वारा इस संबंध में कोई विधि न बनाए जाने की स्थिति में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को अन्य आयुक्तों की तुलना में विशेष शक्तियाँ प्राप्त होती हैं, क्योंकि बहु-सदस्यीय आयोग होने की स्थिति में निर्णय केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सहमति से ही वैध माने जाते हैं।
2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनाव सुधारों पर अपनी सिफारिश देते हुए यह सुझाव दिया था कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए सरकारी फंडिंग (State Funding) की व्यवस्था की जानी चाहिए, तथा निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के लिए एक कॉलेजियम प्रणाली अपनाई जानी चाहिए जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों।
3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के अंतर्गत किसी उम्मीदवार को अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्रों से लोकसभा या विधानसभा चुनाव लड़ने की अनुमति है, और यदि कोई अभ्यर्थी दोनों सीटों पर विजयी हो जाता है, तो उसे छह महीने के भीतर एक सीट खाली करनी होती है, तथा उप-निर्वाचन का संपूर्ण खर्च उस विजयी उम्मीदवार से वसूल किया जाता है।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, प्रधानमंत्री की शक्तियों और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के उत्तरदायित्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार भारत के उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्यों (निर्वाचित एवं मनोनीत) से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें राज्य विधानमंडलों के सदस्यों को कोई स्थान नहीं दिया जाता है।
2. अनुच्छेद 75 के उपबंधों के तहत मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, किंतु इसका यह अर्थ नहीं है कि किसी एक मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होगा, बल्कि यह सामूहिक उत्तरदायित्व नीतिगत निर्णयों और संपूर्ण सरकार के स्थायित्व पर लागू होता है।
3. अनुच्छेद 78 के अनुसार प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय और विधानविषयक प्रस्ताव राष्ट्रपति को संसूचित करे, तथा यदि राष्ट्रपति किसी ऐसे विषय पर मंत्रिपरिषद के विचार के बिना ही कोई निर्णय लेने का निर्देश दे जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किन्तु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है, तो राष्ट्रपति के कहे जाने पर प्रधानमंत्री को वह मामला मंत्रिपरिषद के समक्ष विचार के लिए रखना अनिवार्य होता है।
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