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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग-III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त निवारक निरोध (Preventive Detention) और संवैधानिक उपचारों के अधिकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 22 के अंतर्गत निवारक निरोध के अधीन गिरफ्तार किए गए किसी भी व्यक्ति (चाहे वह नागरिक हो या विदेशी) को अधिकतम तीन महीने तक ही निरुद्ध रखा जा सकता है, और यदि इस अवधि से अधिक समय तक निरोध को जारी रखना हो, तो उसके लिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की योग्यता रखने वाले व्यक्तियों से गठित एक सलाहकार बोर्ड (Advisory Board) की संस्तुति आवश्यक होती है।
  2. 2. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार स्वयं में एक मूल अधिकार है, और 'अधिकार पृच्छा' (Quo-Warranto) को छोड़कर अन्य चारों रिटों (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, उत्प्रेषण और प्रतिषेध) को जारी करने की शक्ति संसद द्वारा विधि बनाकर केवल उच्च न्यायालयों को दी जा सकती है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय केवल अनुच्छेद 32 के तहत ही रिट जारी कर सकता है।
  3. 3. अनुच्छेद 33 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह सशस्त्र बलों, अर्ध-सैनिक बलों, पुलिस बलों और खुफिया एजेंसियों के सदस्यों के मूल अधिकारों पर प्रतिबंध लगा सकती है या उन्हें समाप्त कर सकती है ताकि उनके कर्तव्यों का उचित निर्वहन और अनुशासन सुनिश्चित किया जा सके, तथा इस प्रकार के कानून बनाने की शक्ति केवल संसद के पास है, राज्य के विधानमंडलों के पास नहीं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत निवारक निरोध के अधीन किसी व्यक्ति को 3 महीने से अधिक समय तक तभी निरुद्ध रखा जा सकता है जब एक सलाहकार बोर्ड (जिसमें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश या उस योग्य व्यक्ति हों) इस अवधि को बढ़ाने के लिए पर्याप्त कारण बताए। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को भी रिट जारी करने की शक्ति स्वयं संविधान के द्वारा प्रदत्त है, न कि संसद की विधि द्वारा, और उच्च न्यायालयों का रिट क्षेत्रधिकार अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय की तुलना में अधिक व्यापक है। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 33 के अंतर्गत सशस्त्र बलों और पुलिस बलों के मूल अधिकारों को प्रतिबंधित करने या निर्बंधित करने की शक्ति विशेष रूप से केवल 'संसद' के पास निहित है, राज्य विधानमंडलों के पास नहीं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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