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Indian Polity
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और विशेष सदनों के अधिकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अंतर्गत 'धन विधेयक' (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है और राज्यसभा इस विधेयक को अस्वीकृत या संशोधित नहीं कर सकती, किंतु राज्यसभा के पास यह संवैधानिक अधिकार है कि वह धन विधेयक को अधिकतम 14 दिनों की अवधि के लिए रोक सकती है तथा अपनी सिफ़ारिशों के साथ इसे लोकसभा को वापस भेज सकती है, जिसे मानना या न मानना लोकसभा के विवेक पर पूरी तरह निर्भर करता है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार यदि राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से कोई संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर विधि बना सकती है, तो संसद को उस विषय पर संपूर्ण देश या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त हो जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम पाँच वर्ष की अवधि तक प्रभावी रहता है।
- 3. अनुच्छेद 312 के अंतर्गत राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से समर्थित संकल्प के माध्यम से केंद्र और राज्यों के लिए समान रूप से एक या अधिक 'अखिल भारतीय सेवाओं' (All India Services) के सृजन का अधिकार संसद को प्रदान कर सकती है, और इस प्रकार का सृजित किया गया नया पद या सेवा देश की संघीय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 109 के तहत धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है और राज्यसभा इसे न तो अस्वीकृत कर सकती है और न ही संशोधित कर सकती है; वह इसे अधिकतम 14 दिनों तक रोक सकती है। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 249 के तहत राज्यसभा द्वारा राष्ट्रीय हित में पारित संकल्प अधिकतम **एक वर्ष** की अवधि के लिए प्रभावी रहता है, न कि पाँच वर्ष के लिए (हालांकि इसे बार-बार बढ़ाया जा सकता है)। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 312 के अनुसार राज्यसभा अपने दो-तिहाई बहुमत से नई अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन का अधिकार संसद को दे सकती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
Related Questions
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राजभाषा, दलबदल विरोधी कानून और संविधान की विभिन्न अनुसूचियों से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा सरकारी प्रयोजनों के लिए अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप (जैसे 1, 2, 3...) होगा, किंतु संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा 1965 के बाद भी अंग्रेजी भाषा के निरंतर प्रयोग को प्राधिकृत कर सकती है।
2. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संशोधनों द्वारा बढ़ाकर 22 कर दिया गया है, और इस अनुसूची में 'अंग्रेजी' और 'राजस्थानी' दोनों भाषाओं को शामिल किया गया है।
3. संविधान की दसवीं अनुसूची (जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था) के अंतर्गत दलबदल के आधार पर अयोग्यता के अपवाद के रूप में यह प्रावधान किया गया है कि यदि किसी राजनीतिक दल का किसी अन्य दल में विलय (Merger) हो जाता है, तो उस दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य विलय के पक्ष में हैं, तो वे अयोग्यता से सुरक्षित रहेंगे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की अधिकारिता, शक्तियों और उससे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत उच्चतम न्यायालय के मूल और अनन्य (Original and Exclusive) क्षेत्राधिकार के अंतर्गत केंद्र सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच या दो या अधिक राज्यों के बीच किसी भी कानूनी विवाद की सुनवाई आती है, बशर्ते यह विवाद किसी ऐसी संधि, करार या प्रसंविदा से उत्पन्न हुआ हो जो संविधान लागू होने से पूर्व किया गया था और वर्तमान में भी प्रवृत्त है।
2. उच्चतम न्यायालय को संविधान के अनुच्छेद 141 के अनुसार घोषित कानून भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सभी न्यायालयों पर आबद्धकर (Binding) होते हैं, किंतु उच्चतम न्यायालय स्वयं अपने पूर्ववर्ती निर्णयों या आदेशों से पूर्णतः बाध्य नहीं होता है और अनुच्छेद 137 के तहत प्रदत्त पुनरावलोकन (Review) शक्ति के माध्यम से अपने निर्णय में संशोधन कर सकता है।
3. अनुच्छेद 145 के अधीन भारत के मुख्य न्यायमूर्ति को राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति से उच्चतम न्यायालय की पद्धति और प्रक्रिया को विनियमित करने के लिए नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है, और इसके तहत यह अनिवार्य है कि संविधान के निर्वचन से संबंधित किसी भी मामले की सुनवाई के लिए गठित संविधान पीठ में न्यायाधीशों की न्यूनतम संख्या पाँच होनी चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत और 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकृत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) ही भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आधार बना, जिसे संविधान निर्माताओं ने संविधान के लागू होने के ठीक पूर्ववर्ती दिन अंगीकृत किया।
2. संविधान की प्रस्तावना में अब तक केवल एक ही बार संशोधन किया गया है, जो 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा किया गया था, जिसके माध्यम से इसमें 'समाजवादी' (Socialist), 'पंथनिरपेक्ष' (Secular), और 'अखंडता' (Integrity) शब्द जोड़े गए थे।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबारी यूनियन मामले' (1960) में यह निर्णय दिया गया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न हिस्सा (Integral Part) है, जिसे अनुच्छेद 368 के तहत संशोधित किया जा सकता है, जबकि बाद में 'केशवानंद भारती मामले' (1973) में इस निर्णय को पलटते हुए यह स्पष्ट किया गया कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के इतिहास, दर्शन और संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत और 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया गया 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) ही आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना बना, जिसमें प्रस्तावना के आरंभिक शब्द 'हम, भारत के लोग' संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणा-पत्र से प्रेरित होकर जोड़े गए थे।
2. प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधन किया गया है, जिसके माध्यम से इसमें 'समाजवादी' (Socialist), 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) और 'अखंडता' (Integrity) शब्दों को जोड़ा गया, और यह संशोधन तत्कालीन स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की संस्तुतियों के आधार पर किया गया था।
3. उच्चतम न्यायालय ने 'एल.आई.सी. ऑफ इंडिया वाद' (1995) में स्पष्ट रूप से यह अभीिमत व्यक्त किया कि प्रस्तावना संविधान का एक आंतरिक और अभिन्न हिस्सा (Integral Part) है, जिसका उपयोग विधियों की व्याख्या करते समय और अस्पष्ट प्रावधानों के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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तीव्रता एवं प्रयुक्ताता के आधार पर निम्नलिखित में से कौन-सा कर्क रोग (Cancer) उत्पन्न कर सकता है तथा उसका उपचार भी करता है?
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