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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की प्रारंभिक अधिकारिता (Original Jurisdiction) और इसकी सीमाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत उच्चतम न्यायालय की अनन्य प्रारंभिक अधिकारिता (Exclusive Original Jurisdiction) केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच, या एक तरफ केंद्र और कोई राज्य तथा दूसरी तरफ एक या अधिक राज्यों के बीच, या दो या अधिक राज्यों के बीच किसी ऐसे कानूनी विवाद पर लागू होती है, जिस पर किसी विधिक अधिकार का अस्तित्व या सीमा निर्भर करती है।
  2. 2. उच्चतम न्यायालय की प्रारंभिक अधिकारिता के अंतर्गत वे सभी नागरिक विवाद और वाणिज्यिक संधियाँ शामिल हैं, जिन्हें भारत सरकार ने अपने संविधान-पूर्व काल की किसी रियासत (Princely State) के साथ अनुबंध या समझौते के तहत किया था, और इसके निवारण के लिए कोई भी नागरिक सीधे उच्चतम न्यायालय में वाद दायर कर सकता है।
  3. 3. संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत आने वाले किसी विवाद में यदि कोई ऐसा विषय शामिल है जो संसद या राज्य विधानमंडल के विशेषाधिकार या अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत विशेष अधिकरण (Tribunal) के क्षेत्राधिकार के अधीन आता है, तो उच्चतम न्यायालय की प्रारंभिक अधिकारिता ऐसे मामलों में भी पूरी तरह से बाधित नहीं होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 131 के अनुसार उच्चतम न्यायालय की अनन्य प्रारंभिक अधिकारिता केंद्र और राज्यों के बीच या राज्यों-राज्यों के आपसी कानूनी विवादों तक सीमित है। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 131 के परन्तुक (Proviso) के अनुसार, रियासतों के साथ पूर्व-संविधान संधियों या समझौतों से उत्पन्न होने वाले विवाद उच्चतम न्यायालय के क्षेत्राधिकार से बाहर रखे गए हैं, और नागरिक सीधे इसके तहत वाद दायर नहीं कर सकते। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 262 के अंतर्गत संसद द्वारा बनाए गए विधि (जैसे अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम) के तहत गठित अधिकरणों के अधिकार क्षेत्र वाले जल विवादों को उच्चतम न्यायालय की प्रारंभिक अधिकारिता से पूरी तरह से अपवर्जित (Barred) किया गया है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
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