त्वरित लिंक्स
Indian Polity
15 views
भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य की कार्यपालिका, विशेष रूप से राज्यपाल की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति (अनुच्छेद 213) और मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के संवैधानिक संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के सत्र में न होने पर अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति राज्यपाल की एक पूर्णतः स्वतंत्र और अनियंत्रित विवेकीय शक्ति है, जिसके लिए उसे मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह की आवश्यकता नहीं होती है।
- 2. राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित प्रत्येक अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के पुनः समवेत होने पर उसके समक्ष प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है, और यदि विधानमंडल उस अध्यादेश को अस्वीकृत करने वाला संकल्प पारित कर देता है या उसकी अवधि (सामान्यतः छह सप्ताह) समाप्त हो जाती है, तो वह अध्यादेश निष्प्रभावी हो जाता है।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 164 के अंतर्गत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा राज्य के सभी मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, जिसका विधिक अर्थ यह है कि राज्यपाल किसी भी मंत्री को बिना मुख्यमंत्री की सलाह के व्यक्तिगत रूप से उसके पद से बर्खास्त कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि राज्यपाल की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति (अनुच्छेद 213) कोई स्वतंत्र या अनियंत्रित विवेकीय शक्ति नहीं है; इस शक्ति का प्रयोग राज्यपाल द्वारा राज्य के मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही किया जाता है, हालांकि कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में राष्ट्रपति के विचार के लिए विधेयक को आरक्षित करने का प्रावधान अलग है। कथन 2 सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 213 के तहत जारी अध्यादेश को विधानमंडल के समक्ष रखना अनिवार्य होता है और सत्र आरंभ होने के 6 सप्ताह के भीतर या अस्वीकृत होने पर वह समाप्त हो जाता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि यद्यपि सैद्धांतिक रूप से मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, किंतु संविधान की संसदीय प्रणाली की परंपराओं के अनुसार राज्यपाल किसी मंत्री को केवल तभी बर्खास्त कर सकता है जब मुख्यमंत्री इसकी अनुशंसा करे। मुख्यमंत्री की सलाह के बिना राज्यपाल की यह व्यक्तिगत बर्खास्तगी की शक्ति असंवैधानिक मानी जाती है। अधिक अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
→
संसद के किसी सदस्य की अयोग्यता पर निर्णय कौन लेता है?
→
राज्य विधानमंडल के संदर्भ में, विधानसभा और विधान परिषद की विधायी शक्तियों, धन विधेयकों की प्रक्रिया तथा उनके आपसी गतिरोध के समाधान से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 197 के अनुसार, यदि विधानसभा द्वारा कोई साधारण विधेयक दूसरी बार पारित करके विधान परिषद के पास भेजा जाता है, और विधान परिषद उसे पुनः अस्वीकार कर देती है या ऐसा संशोधन करती है जिसे विधानसभा स्वीकार नहीं करती, तो विधान परिषद उस विधेयक को अधिकतम चार महीने (प्रथम बार के तीन महीने और पुनः भेजने पर एक महीना) तक ही रोक सकती है, जिसके पश्चात वह विधान परिषद की सहमति के बिना दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।
2. धन विधेयक (Money Bill) के मामले में विधान परिषद की शक्ति अत्यंत सीमित होती है; विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक जब विधान परिषद के पास भेजा जाता है, तो उसे अधिकतम 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के विधानसभा को वापस करना होता है, और यदि परिषद 14 दिनों के भीतर विधेयक वापस नहीं करती है, तो वह दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में वह विधानसभा द्वारा पारित किया गया था।
3. संसद के विपरीत, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) के बीच किसी साधारण विधेयक पर उत्पन्न गतिरोध को दूर करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 197 के तहत संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है, क्योंकि विधानसभा की इच्छा विधान परिषद पर सर्वोपरि होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत सर्वोच्च न्यायालय को 'रिट' (Writ) जारी करने की शक्ति प्राप्त है?
→
प्रारूप समिति (Drafting Committee) का गठन कब हुआ था?
→
भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के माध्यम से संविधान में नया भाग IX-A जोड़ा गया, जिसका शीर्षक 'नगरपालिकाएँ' है और इसमें अनुच्छेद 243P से 243ZG तक के प्रावधान शामिल हैं, साथ ही बारहवीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें नगरपालिकाओं की कार्यप्रणाली के लिए 18 कार्यकारी विषय दिए गए हैं।
2. नगरपालिकाओं के सभी तीनों स्तरों (नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम) के सभी सदस्यों का चुनाव क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है, किंतु इसके अतिरिक्त प्रत्येक नगरपालिका में राज्य विधानमंडल द्वारा विधि बनाकर लोकसभा और राज्य विधानसभा के सदस्यों (MP/MLA) को भी पदेन सदस्य (Ex-officio members) के रूप में मतदान का अधिकार दिया जा सकता है।
3. प्रत्येक नगरपालिका की समयावधि उसकी प्रथम बैठक के लिए नियत तारीख से पाँच वर्ष की होती है, और यदि किसी नगरपालिका को समय से पूर्व विघटित कर दिया जाता है, तो विघटन की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य होता है, तथा नव-निर्वाचित नगरपालिका शेष बची हुई अवधि के लिए ही पद धारण करती है, न कि पूरे पाँच वर्ष के लिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.