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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग, अनुसूचियों और राजभाषा से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें विभिन्न संशोधनों द्वारा बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और इस अनुसूची में बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं को 92वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा जोड़ा गया था।
  2. 2. संविधान का भाग XVII (अनुच्छेद 343 से 351) संघ की राजभाषा से संबंधित है, जिसके अंतर्गत अनुच्छेद 345 राज्यों की राजभाषा या राजभाषाओं से संबंधित है और इसके अनुसार किसी राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा उस राज्य में प्रयुक्त होने वाली किसी एक या अधिक भाषाओं को या हिंदी को उस राज्य के सभी या किन्हीं राजकीय प्रयोजनों के लिए अपना सकता है।
  3. 3. संविधान के अनुच्छेद 351 में यह निर्देश दिया गया है कि संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके और उसके रूप में हस्तक्षेप किए बिना, हिंदुस्तानी शैली और आठवीं अनुसूची में उल्लिखित अन्य भारतीय भाषाओं के शब्द भंडार को आत्मसात करते हुए उसकी समृद्धि सुनिश्चित करे।
  4. 4. संविधान की नौवीं अनुसूची को प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था, और इसके माध्यम से भूमि सुधार कानूनों को न्यायिक समीक्षा से पूरी तरह और सदा के लिए उन्मुक्ति प्रदान की गई थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कभी भी चुनौती नहीं दी जा सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं। 21वें संशोधन द्वारा सिंधी, 71वें संशोधन द्वारा कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली, तथा 92वें संशोधन, 2003 द्वारा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली जोड़ी गईं, जिससे कुल संख्या 22 हो गई। भाग XVII का अनुच्छेद 345 राज्यों की राजभाषा से संबंधित है और अनुच्छेद 351 हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश देता है। कथन 4 गलत है क्योंकि 'आई.आर. कोहेलो वाद' (2007) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया था कि 24 अप्रैल 1973 के बाद नौवीं अनुसूची में जोड़े गए कानूनों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है यदि वे संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) का उल्लंघन करते हैं। अधिक अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट करें।
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