BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
20 views

भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों की अधिकारिता, अवमानना की शक्ति तथा अधीनस्थ न्यायपालिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 215 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) है और उसे अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्राप्त है, जिसमें उच्च न्यायालय के अधीनस्थ न्यायालयों की अवमानना से संबंधित मामलों में दंडित करने की अनन्य शक्ति भी सम्मिलित है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही नहीं, बल्कि किसी अन्य विधिक अधिकार के प्रवर्तन के लिए भी रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और उच्च न्यायालय की यह रिट अधिकारिता क्षेत्र (Territorial Jurisdiction) केवल उस राज्य के प्रादेशिक सीमा तक ही सीमित है जिसके अंतर्गत वह उच्च न्यायालय स्थापित है, भले ही वह कारण (Cause of Action) उस राज्य की सीमा से बाहर उत्पन्न हुआ हो।
  3. 3. जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति से संबंधित संवैधानिक प्रावधान अनुच्छेद 233 के अंतर्गत आते हैं, जिसके अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए किसी व्यक्ति की संस्तुति संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय द्वारा की जानी अनिवार्य है, और ऐसा व्यक्ति कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो तथा संघ या राज्य की सेवा में पहले से अधिकारी न हो।
  4. 4. संविधान के अनुच्छेद 235 के अनुसार राज्यों के अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) पर नियंत्रण, जिसमें जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों के अधिकारियों की पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टी का अनुदान शामिल है, संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता के सिद्धांत को सुनिश्चित करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 215 के तहत उच्च न्यायालय को अपनी और अपने अधीनस्थ न्यायालयों की अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्राप्त है, किंतु केवल अधीनस्थ न्यायालयों की अवमानना के लिए सजा देने की 'अनन्य शक्ति' उच्च न्यायालय के पास नहीं है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय और अन्य विधिक प्रावधान भी इसमें भूमिका निभाते हैं। कथन 2 असत्य है क्योंकि 15वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1963 द्वारा अनुच्छेद 226 में संशोधन करके यह स्पष्ट किया गया था कि उच्च न्यायालय अपनी रिट अधिकारिता का प्रयोग उस राज्य के बाहर भी कर सकता है यदि वह 'कॉज ऑफ एक्शन' (Cause of Action) पूर्णतः या आंशिक रूप से उसके प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर उत्पन्न हुआ हो। कथन 3 पूर्णतः सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 233 के अनुसार जिला न्यायाधीश की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय के परामर्श से की जाती है और वह व्यक्ति सात वर्ष तक अधिवक्ता होना चाहिए तथा संघ या राज्य की न्यायिक सेवा में नहीं होना चाहिए। कथन 4 पूर्णतः सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 235 के अंतर्गत अधीनस्थ न्यायालयों पर प्रशासनिक नियंत्रण उच्च न्यायालय में निहित है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
Share:

Related Questions

भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक पदों और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे संसद में किसी भी स्थिति में मतदान करने का अधिकार प्राप्त नहीं है। 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) अपनी पदमुक्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के अन्य कार्यालय या पद को ग्रहण करने के लिए संविधान द्वारा पूर्णतः पात्र (Eligible) घोषित किया गया है, क्योंकि उसका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उसकी स्वतंत्रता पर कोई प्रतिबंध नहीं होता है। 3. अनुच्छेद 149 के तहत CAG संसद द्वारा बनाई गई विधि के अनुसार संघ और राज्यों के लेखाओं के संबंध में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है, और CAG की रिपोर्टों की संवीक्षा करने की मुख्य जिम्मेदारी संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) द्वारा निभाई जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल के सदनों—विधानसभा (Legislative Assembly) और विधान परिषद (Legislative Council)—की विधायी शक्तियों, धन विधेयकों तथा वित्तीय मामलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 197 के अनुसार, यदि विधान परिषद द्वारा किसी सामान्य विधेयक (साधारण विधेयक) को अस्वीकार कर दिया जाता है या ऐसे संशोधन किए जाते हैं जिनसे विधानसभा सहमत नहीं है, तो विधानसभा उस विधेयक को दोबारा पारित करके विधान परिषद के पास भेज सकती है, और यदि विधान परिषद उस विधेयक को तीन मास तक और रोक रखती है, तो विधेयक दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित हुआ माना जाता है जिस रूप में वह विधान परिषद द्वारा दूसरी बार पारित किए जाने से पूर्व विधानसभा द्वारा पारित किया गया था। 2. धन विधेयकों (Money Bills) के संबंध में विधानसभा की स्थिति पूर्णतः सर्वोच्च है, और विधान परिषद को किसी धन विधेयक को अस्वीकार करने या उसमें संशोधन करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है; विधान परिषद किसी धन विधेयक को अपने पास केवल अधिकतम चौदह दिन की अवधि तक ही रोक सकती है, और यदि वह इस अवधि के भीतर विधेयक को वापस नहीं करती है, तो दोनों सदनों द्वारा वह विधेयक उसी रूप में पारित हुआ मान लिया जाता है जिस रूप में वह विधानसभा द्वारा पारित किया गया था। 3. राज्य के बजट (वार्षिक वित्तीय विवरण) और अन्य अनुदान मांगों पर मतदान करने की शक्ति केवल विधानसभा को ही प्राप्त है, क्योंकि विधान परिषद को अनुदान मांगों पर चर्चा करने का अधिकार तो है किंतु वह अनुदान की किसी भी मांग पर मतदान (Voting on Demands for Grants) नहीं कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य करते समय सदन में किसी भी प्रश्न पर प्रथम मत (First Vote) देने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है, और वह अपने इस अधिकार का प्रयोग सदन के किसी भी चरण में कर सकते हैं, भले ही वह साधारण विधेयक ही क्यों न हो। 2. संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि लोकसभा में किसी एक मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है। 3. संविधान के अनुच्छेद 78 के तहत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन के संचालन और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय (Decisions) राष्ट्रपति को संसूचित करे, और यदि राष्ट्रपति ऐसी कोई सूचना मांगते हैं, तो प्रधानमंत्री उसे उपलब्ध कराने के लिए बाध्य होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग-III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (अनुच्छेद 12-35) और उनसे संबंधित न्यायिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) शब्द की व्यापक परिभाषा दी गई है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों के अतिरिक्त अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम और रूढ़ि या प्रथा (Custom or usage) को भी शामिल किया गया है, बशर्ते वे मूल अधिकारों से असंगत हों। 2. 'मैनका गांधी बनाम भारत संघ (1978)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह अभी निर्धारित किया था कि अनुच्छेद 21 के तहत 'प्रक्रिया जो विधि द्वारा स्थापित की गई है' (Procedure established by law) का दायरा अत्यंत सीमित है और इसमें प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of natural justice) को शामिल नहीं किया जा सकता। 3. अनुच्छेद 20(2) के अंतर्गत 'दोहरे जोखिम' (Double Jeopardy) का संरक्षण केवल किसी न्यायालय या न्यायिक अधिकरण (Tribunal) के समक्ष अभियोजित किए जाने और दंडित होने पर ही लागू होता है, और यह विभागीय या प्रशासनिक प्राधिकारियों (Departmental or administrative authorities) द्वारा दी जाने वाली कार्यवाहियों और शास्तियों पर भी पूरी तरह लागू होता है। 4. उच्चतम न्यायालय ने 'इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ (1992)' मामले में यह स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत प्रदान किया जाने वाला आरक्षण केवल प्रारंभिक नियुक्तियों (Initial appointments) तक ही सीमित है, और इसे पदोन्नति (Promotions) के मामलों में किसी भी परिस्थिति में लागू नहीं किया जा सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 8 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जो भारत का मूल निवासी है या जिसके माता-पिता अथवा दादा-दादी में से कोई भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिभाषित भारत में जन्मा था, वह सामान्य रूप से भारत के बाहर किसी देश में निवास कर रहा है, तो वह भारत के राजनयिक या कौंसुल प्रतिनिधि के पास पंजीकरण कराकर भारत का नागरिक बन सकता है, बशर्ते उसे संबंधित देश के कानून के तहत स्थानीय नागरिकता भी प्राप्त हो। 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9(1) के प्रावधानों के तहत यदि भारत का कोई नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है, किंतु यह नियम तब लागू नहीं होता है जब भारत युद्ध में व्यस्त हो और केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में विशेष अनुमति दी गई हो। 3. नागरिकता अधिनियम, 1955 (समय-समय पर संशोधित) के अंतर्गत देशीयकरण (Naturalisation) द्वारा भारत की नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है कि आवेदक को संविधान की आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट भाषाओं में से कम से कम किसी एक भाषा का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए, साथ ही भारत में कम से कम चौदह वर्ष की सामान्य निवास अवधि पूरी करनी चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.