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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 40 के तहत राज्य को ग्राम पंचायतों के संगठन के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया गया है, जिसे बाद में 73वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संवैधानिक दर्जा और अनिवार्य रूप प्रदान किया गया।
- 2. अनुच्छेद 44 के अंतर्गत 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) का प्रावधान किया गया है, जो पूरे देश में लागू है और इसे देश के किसी भी राज्य द्वारा अपनी नीति के तहत बदला या निरस्त नहीं किया जा सकता है।
- 3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में अनुच्छेद 39A (समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता) और अनुच्छेद 48A (पर्यावरण, वन और वन्यजीवों की रक्षा) को जोड़ा गया था।
- 4. नीति निर्देशक तत्वों को देश के शासन में मूलभूत माना गया है और अनुच्छेद 37 के अनुसार ये देश के कानून बनाने में लागू करने के लिए राज्य के कर्तव्य हैं, भले ही ये न्यायालय द्वारा सीधे प्रवर्तनीय (Justiciable) न हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 40 में ग्राम पंचायतों के संगठन का प्रावधान है, जिसे 73वें संविधान संशोधन द्वारा संस्थागत रूप दिया गया। कथन 2 गलत है क्योंकि समान नागरिक संहिता (अनुच्छेद 44) को देश के सभी राज्यों में एक साथ अनिवार्य रूप से तुरंत लागू नहीं किया गया था, और राज्य अपनी परिस्थितियों के अनुसार नीति तय कर सकते हैं (हालांकि उत्तराखंड जैसे राज्यों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं, किंतु यह अपने आप में संपूर्ण देश में केंद्र द्वारा एक समान रूप से बाध्यकारी कानून के रूप में प्रारंभिक रूप से नहीं थोपा गया था)। कथन 3 सही है, 42वें संशोधन, 1976 द्वारा अनुच्छेद 39A और 48A जोड़े गए थे। कथन 4 सही है, अनुच्छेद 37 के अनुसार DPSP गैर-प्रवर्तनीय (Non-justiciable) हैं किंतु देश के शासन में मूलभूत हैं। भारतीय संविधान के विभिन्न पहलुओं को गहराई से समझने के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विस्तृत अध्ययन करें।
Related Questions
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भारतीय संविधान में महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के अंतर्संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा यह प्रावधान किया गया था कि राष्ट्रपति द्वारा आपातकाल की उद्घोषणा और उससे संबंधित अध्यादेशों को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है, किंतु बाद में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से अनुच्छेद 352 में यह संशोधन किया गया कि राष्ट्रपति संपूर्ण भारत या उसके किसी विशेष भाग में राष्ट्रीय आपातकाल लागू कर सकता है, तथा इसी संशोधन द्वारा 'आंतरिक अशांति' शब्द को प्रतिस्थापित करके 'सशस्त्र विद्रोह' जोड़ा गया था।
3. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के द्वारा यह अनिवार्य कर दिया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल का निर्णय लिखित रूप में होना चाहिए, तथा संसद के दोनों सदनों द्वारा इस उद्घोषणा का अनुमोदन अब साधारण बहुमत के स्थान पर उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत (विशेष बहुमत) द्वारा किया जाना आवश्यक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संसद की विधायी प्रक्रिया और लोकसभा तथा राज्यसभा की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है और राज्यसभा इस विधेयक को न तो अस्वीकार कर सकती है और न ही इसमें संशोधन कर सकती है, बल्कि वह इसे अधिकतम 14 दिनों की अवधि के लिए रोक सकती है, जिसके पश्चात राज्यसभा की सहमति के बिना भी वह दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।
2. अनुच्छेद 108 के अंतर्गत दोनों सदनों के बीच किसी साधारण विधेयक पर गतिरोध उत्पन्न होने पर राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाई जा सकती है, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) करते हैं, तथा इस संयुक्त बैठक में यदि विधेयक उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत से पारित हो जाता है, तो उसे दोनों सदनों द्वारा पारित समझा जाता है, भले ही वह धन विधेयक या संविधान संशोधन विधेयक हो।
3. राज्यसभा को अनुच्छेद 249 के तहत यह अनन्य (Exclusive) शक्ति प्राप्त है कि वह उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से संकल्प पारित कर संसद को राज्य सूची (State List) में शामिल किसी भी विषय पर राष्ट्रीय हित में विधि बनाने के लिए अधिकृत कर सकती है, और यह प्रस्ताव अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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लोकसभा का कार्यकाल कितना है?
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भारतीय संविधान के जनक किसे कहा जाता है?
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भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा तथा राजनीतिक दलों के विनियमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधनों) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और अंग्रेजी भाषा इन 22 भाषाओं में शामिल नहीं है।
2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) राजनीतिक दलों का पंजीकरण करता है, किंतु एक बार पंजीकृत होने के बाद निर्वाचन आयोग को किसी भी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने या वापस लेने की वैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है।
3. संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून), जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है कि यदि सदन का कोई सदस्य अपने राजनीतिक दल के व्हिप (Whip) के विरुद्ध सदन में मतदान करता है या मतदान से अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो जाएगी, और इस संबंध में पीठासीन अधिकारी द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम होता है जिसकी न्यायिक समीक्षा किसी भी न्यायालय द्वारा नहीं की जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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