त्वरित लिंक्स
History of India
27 views
दीन-ए-इलाही की शुरुआत किसने की?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अकबर ने 1582 में शुरू किया था।
Related Questions
→
सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), प्रथम व द्वितीय गोलमेज सम्मेलन तथा गांधी-इरविन समझौते के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के कराची अधिवेशन (1931) में गांधी-इरविन समझौते को औपचारिक रूप से अनुमोदित किया गया तथा इसी अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू द्वारा तैयार किए गए 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' प्रस्ताव को स्वीकार किया गया।
2. वर्ष 1931 में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया, और इसी सम्मेलन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड ने 'कम्युनल अवार्ड' (सांप्रदायिक पंचाट) की घोषणा की, जिसके तहत दलितों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल का प्रावधान किया गया था।
3. लार्ड इरविन और महात्मा गांधी के मध्य संपन्न हुए 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत सरकार ने सभी राजनीतिक बंदियों (हिंसा के आरोपियों को छोड़कर) को रिहा करने और समुद्र तट के किनारे बसे लोगों को बिना कर के नमक बनाने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की थी।
4. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण के दौरान ब्रिटिश सरकार द्वारा 'दमनकारी अध्यादेशों' के माध्यम से कांग्रेस को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप जनवरी 1932 में महात्मा गांधी की पुनः गिरफ्तारी के साथ आंदोलन ने अपनी तीव्रता खो दी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण (1932-34) और उससे जुड़ी घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1931 में लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन की विफलता और भारत लौटने पर वायसराय लॉर्ड वेलिंगटन द्वारा कांग्रेस विरोधी नए अध्यादेशों और दमनकारी नीतियों को लागू किए जाने के कारण महात्मा गांधी ने जनवरी 1932 में सविनय अवज्ञा आंदोलन को पुनः प्रारंभ कर दिया था।
2. ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड द्वारा अगस्त 1932 में घोषित 'सांप्रदायिक पंचाट' (Communal Award) के तहत दलित वर्गों (अछूतों) को हिंदुओं से पृथक एक अलग निर्वाचक मंडल दिए जाने के विरोध में महात्मा गांधी ने यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप गांधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के बीच 'पूनम पैक्ट' (Poona Pact) संपन्न हुआ।
3. सविनय अवज्ञा आंदोलन के इस दूसरे चरण के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में समानांतर सरकारों की स्थापना की गई थी, जिनमें बंगाल के मिदनापुर जिले में स्थापित 'ताम्र सरकार' सबसे लंबी समय तक चलने वाली और प्रमुख समानांतर सरकार थी।
4. कांग्रेस के भीतर बढ़ती निराशा और लगातार राजनीतिक दमन के बीच मई 1934 में पटना में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के अधिवेशन में औपचारिक रूप से सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पल्लव और चालुक्य राजवंशों के संघर्ष तथा दक्षिण भारत के राजनीतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव नरेश महेन्द्रवर्मन् प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म का अनुयायी होने के बावजूद शैव संत अप्पर (तिरुनावुक्करासर) के प्रभाव में आकर शैव धर्म स्वीकार कर लिया था, और उसने महाबलीपुरम में प्रसिद्ध एकश्म (मोनोलिथिक) रथ मंदिरों के निर्माण की शुरुआत कराई थी।
2. चालुक्य सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन की विशाल सेना को पराजित किया था, जिसका सजीव और ऐतिहासिक विवरण कालिदास द्वारा रचित 'ऐहोले प्रशस्ति' में प्राप्त होता है, जिसके रचयिता कवि रवि कीर्ति थे।
3. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन् प्रथम (महामल्ल) ने चालुक्य राजधानी वतापी (बागलकोट) पर अधिकार कर लिया था और इस विजय के उपरांत उसने 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी।
4. राष्ट्रकूट वंश के संस्थापक दन्तिदुर्ग ने चालुक्य वंश के अंतिम शासक कीर्तिवर्मन् द्वितीय को पराजित कर अपनी राजनीतिक सत्ता स्थापित की थी, जिससे चालुक्यों की मुख्य राजनीतिक शक्ति का अंत हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
"सरदेशमुखी" कर, जो शिवाजी स्वयं को दक्कन का वंशानुगत स्वामी मानकर वसूलते थे, कितना था?
→
19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित संगठनों और उनके संस्थापकों तथा उद्देश्यों पर विचार कीजिए:
1. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद तथा बाल विवाह का खंडन करते हुए शुद्धि आंदोलन का आरंभ किया था।
2. केशव चंद्र सेन के प्रभाव से प्रेरित होकर आत्माराम पांडुरंग ने वर्ष 1867 में बॉम्बे में 'प्रार्थना समाज' की स्थापना की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और दलित जातियों के उत्थान के लिए कार्य करना था।
3. हेनरी विवियन डेरोज़ो के नेतृत्व में स्थापित 'यंग बंगाल आंदोलन' (Young Bengal Movement) के अनुयायियों ने सामाजिक और धार्मिक रूढ़िवादिता का पुरजोर समर्थन किया तथा ब्रिटिश शासन की आर्थिक नीतियों को भारत के लिए पूर्णतः वरदान माना था।
4. स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य वेदांत दर्शन का प्रचार करना और मानवता की सेवा (विशेषकर दरिद्रनारायण की सेवा) को ही सबसे बड़ा धर्म मानना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.