BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
30 views

भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल (विधानसभा और विधान परिषद) की संरचना, शक्तियों और विधाई प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, यदि उस राज्य की विधानसभा ने कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के बहुमत से इस आशय का संकल्प पारित कर दिया हो, और इस प्रकार के संकल्प के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति अनिवार्य होती है।
  2. 2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, और किसी भी स्थिति में विधान परिषद में सदस्यों की न्यूनतम संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए (अपवादस्वरूप जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम से पूर्व की स्थिति को छोड़कर)।
  3. 3. धन विधेयक (Money Bill) को केवल राज्य की विधानसभा में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है, विधान परिषद में नहीं; तथा विधान परिषद किसी धन विधेयक को अस्वीकृत नहीं कर सकती है, किंतु वह अधिकतम 14 दिनों की अवधि तक ही उसे रोक सकती है या अपनी सिफारिशें दे सकती है, जिन्हें मानना विधानसभा के लिए बाध्यकारी नहीं होता है।
  4. 4. साधारण विधेयक के मामले में यदि विधान परिषद किसी विधेयक को अस्वीकृत कर देती है या ऐसे संशोधन करती है जिससे विधानसभा सहमत नहीं है, या यदि विधान परिषद द्वारा विधेयक प्राप्ति के पश्चात चार महीने तक कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो संविधान के अनुच्छेद 197 के तहत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाए जाने का संवैधानिक प्रावधान है।

Detailed Explanation

भारतीय संविधान के भाग VI के तहत राज्य विधानमंडल के गठन और कार्यप्रणाली का विस्तृत प्रावधान किया गया है। कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 169 के तहत विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए राज्य विधानसभा द्वारा पारित संकल्प के संबंध में संसद को कानून बनाने की शक्ति तो प्राप्त है, किंतु इस प्रक्रिया के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Recommendation/Sanction) की कोई संवैधानिक अनिवार्यता नहीं होती है, बल्कि राष्ट्रपति की सिफारिश इस प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करती। कथन 2 सत्य है; विधान परिषद की अधिकतम संख्या विधानसभा का 1/3 और न्यूनतम संख्या 40 निर्धारित की गई है (अपवाद: जम्मू-कश्मीर और कुछ अन्य ऐतिहासिक प्रसंग)। कथन 3 सत्य है क्योंकि धन विधेयक केवल विधानसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है और विधान परिषद इसे अधिकतम 14 दिनों तक ही रोक सकती है। कथन 4 असत्य है क्योंकि भारतीय संविधान में राज्य विधानमंडल के सदनों के बीच गतिरोध को समाप्त करने के लिए **संयुक्त बैठक (Joint Sitting)** का कोई प्रावधान नहीं है (संयुक्त बैठक का प्रावधान केवल संसद के दोनों सदनों के लिए अनुच्छेद 108 में है)। राज्य स्तर पर विधानसभा की इच्छा ही सर्वोपरि होती है यदि गतिरोध बना रहे। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Share:

Related Questions

→ भारतीय संसद की विधायी प्रक्रिया, लोकसभा और राज्यसभा के विधायी अधिकारों तथा विशेष शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 107 के अनुसार संसद में पुनरस्थापित कोई विधेयक दोनों सदनों द्वारा पारित किए जाने पर ही अधिनियम बनता है, किंतु लोकसभा के विघटन के पश्चात यदि कोई विधेयक लोकसभा में लंबित है या लोकसभा द्वारा पारित होकर राज्यसभा में लंबित है, तो वह व्यपगत (Lapse) हो जाता है, जबकि राज्यसभा में विचाराधीन ऐसा विधेयक जिसे लोकसभा ने पारित नहीं किया है, लोकसभा के विघटन से व्यपगत नहीं होता है। 2. अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के सृजन से संबंधित अनुच्छेद 312 का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है, और इसके लिए उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जिसमें लोकसभा की कोई विधायी पहल या शक्ति शामिल नहीं होती है। 3. अनुच्छेद 108 के अंतर्गत बुलाई जाने वाली संसद की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता केवल और केवल लोकसभा अध्यक्ष द्वारा ही की जा सकती है, और लोकसभा अध्यक्ष के पद रिक्त होने या उनकी अनुपस्थिति की स्थिति में राज्यसभा के सभापति द्वारा इस संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, तथा इस विषय पर अंतिम निर्णय लेने की अनन्य शक्ति भारत के उच्चतम न्यायालय के पास निहित है। 2. भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत जन्म से नागरिकता (Citizenship by Birth) प्राप्त करने के नियम में संशोधन करते हुए यह अनिवार्य किया गया है कि 3 दिसंबर 2004 के पश्चात भारत में जन्मा वही व्यक्ति भारत का नागरिक होगा जिसके माता-पिता दोनों जन्म के समय भारत के नागरिक हों अथवा उनमें से एक भारत का नागरिक हो और दूसरा जन्म के समय अवैध प्रवासी (Illegal Migrant) न हो। 3. नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) के अंतर्गत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश करने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उन्हें देशीयकरण (Naturalization) के माध्यम से नागरिकता प्राप्त करने के लिए निर्धारित निवास की सामान्य अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → संविधान का कौन सा भाग 'पंचायत राज' से संबंधित है? → राज्यसभा के सदस्य का कार्यकाल कितने वर्षों का होता है? → भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, उनकी पदच्युति की प्रक्रिया तथा प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए निर्वाचन मंडल में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य शामिल होते हैं, किंतु जब उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए राज्यसभा में कोई संकल्प प्रस्तावित किया जाता है, तो उस संकल्प को लोकसभा द्वारा केवल साधारण बहुमत से ही अनुमोदित किया जाना आवश्यक होता है, अन्यथा प्रस्ताव निष्प्रभावी हो जाता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 75(1क) के अनुसार मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, और यह प्रतिबंध 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा जोड़ा गया था, जो केंद्र के साथ-साथ राज्यों की मंत्रिपरिषद पर भी समान रूप से लागू होता है। 3. अनुच्छेद 78 के तहत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह देश के प्रशासनिक मामलों और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी निर्णय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और यदि राष्ट्रपति ऐसा निर्देश दें, तो किसी मंत्री द्वारा लिए गए किसी निर्णय को संपूर्ण मंत्रिपरिषद के विचार के लिए प्रस्तुत करना प्रधानमंत्री के लिए अनिवार्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.