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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक विश्वास या संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति यह आकलन करता है कि वह किसी विशिष्ट परिस्थिति या चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने के लिए अपने व्यवहार और कौशलों को किस सीमा तक नियंत्रित और संचालित कर सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आंतरिक अभिप्रेरणा, लक्ष्य-निर्धारण और शैक्षणिक सफलता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

अल्बर्ट बंडूरा के सामाजिक संज्ञान और सामाजिक अधिगम सिद्धांत के अनुसार, 'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) व्यक्ति का अपनी क्षमताओं पर वह विश्वास है जो उसके कार्यों, प्रेरणा और दृढ़ता को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। उच्च आत्म-प्रभावकारिता वाले छात्र कठिन लक्ष्यों को चुनते हैं, असफलताओं से हतोत्साहित होने के बजाय अपनी रणनीतियों में सुधार करते हैं और अधिक प्रयास करते हैं। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में शिक्षक का दायित्व है कि वह विद्यार्थियों को छोटे-छोटे सकारात्मक अनुभव और रचनात्मक पुनर्बलन देकर उनकी आत्म-प्रभावकारिता को सुदृढ़ करे।
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