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History of India
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मुगल चित्रकला पर प्रभाव:

Detailed Explanation

ईरानी शैली का गहरा प्रभाव था।
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की अर्थव्यवस्था, नगरीय नियोजन और विदेशी व्यापार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस सभ्यता की लिपि 'भावचितraत्मक' (Pictographic) थी, जो आमतौर पर दाईं से बाईं ओर (Right to Left) लिखी जाती थी, जिसे 'बौस्ट्रोफेडन' शैली भी कहा जाता है, किंतु वर्तमान तक इस लिपि को पूरी तरह पढ़ा नहीं जा सका है। 2. लोथल और चान्हूदड़ो ऐसे प्रमुख स्थल थे जहाँ मनके (Beads) बनाने के कारखाने मिले हैं, तथा लोथल में स्थित गोदीवाड़ा (Dockyard) से यह प्रमाणित होता है कि सिंधु वासियों का मेसोपोटामिया और फारस की खाड़ी के साथ समुद्री व्यापार होता था। 3. सिंधु घाटी सभ्यता के स्थलों से लोहे के बने कृषि उपकरण, अस्त्र-शस्त्र और रथों के अवशेष प्रचुर मात्रा में प्राप्त हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यहाँ के निवासी लोहे के व्यापक प्रयोग से भली-भांति परिचित थे। 4. हड़प्पा सभ्यता के अधिकांश स्थलों में घरों के दरवाजे मुख्य सड़कों की ओर खुलते थे, जो इस बात का द्योतक है कि वे लोग यातायात की सुगमता और मुख्य सड़कों के समीप होने को सर्वाधिक प्राथमिकता देते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनकी संस्थागत व्यवस्थाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध धर्म के 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (Dependent Origination) का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि प्रत्येक घटना और वस्तु किसी न किसी कारण से उत्पन्न होती है और यह शाश्वत ब्रह्म या आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार किए बिना संसार के संचालन की व्याख्या करता है, जबकि जैन धर्म का 'स्यादवाद' (सप्तभंगी नय) ज्ञान की सापेक्षता का सिद्धांत है जो यह बताता है कि प्रत्येक सत्य दृष्टिकोण विशेष के अनुसार आंशिक होता है। 2. बौद्ध संघ में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा пятнадцать (15) वर्ष निर्धारित की गई थी, और संघ में किसी भी प्रकार के ऋणग्रस्त, चोर, दास, या राजकर्मचारी को प्रवेश की पूर्ण अनुमति थी ताकि सामाजिक समानता स्थापित की जा सके। 3. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार स्त्रियाँ मोक्ष प्राप्त करने में सक्षम हैं और उनके 19वें तीर्थंकर 'मल्लिनाथ' एक स्त्री थीं, जबकि दिगंबर संप्रदाय इस मान्यता का पूर्ण खंडन करता है और यह मानता है कि मोक्ष प्राप्ति के लिए नग्नता अनिवार्य है और स्त्री शरीर से मुक्ति संभव नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना, वास्तुकला और सामाजिक-आर्थिक विशिष्टताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस सभ्यता के लगभग सभी प्रमुख नगरों (जैसे हड़प्पा और मोहनजोदड़ो) में नगर का दो भागों में विभाजन मिलता है—पश्चिमी भाग जो अपेक्षाकृत ऊँचे चबूतरे पर बसा था और जिसे 'दुर्ग' या 'गैरीसन' कहा जाता है, तथा पूर्वी भाग जो सामान्य आवास क्षेत्र के रूप में विस्तृत था। 2. चन्हूदड़ो एक ऐसा विशेष हड़प्पाकालीन स्थल था जहाँ किसी भी प्रकार के 'दुर्ग' (Citadel) के अवशेष नहीं मिले हैं, और यहाँ से मनके बनाने के कारखाने तथा वक्र ईंटों के साक्ष्य भी प्राप्त होते हैं। 3. मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार (Great Bath) इस सभ्यता की ईंट-निर्मित वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है, जिसके तल और दीवारों को जल-रोधी बनाने के लिए कोलतार (Bitumen) की एक परत का उपयोग किया गया था। 4. सिंधु घाटी सभ्यता के मोहरों और मृदभांडों पर चित्रित लिपियों को 'बौस्ट्रोफेडन' (Boustrophedon) शैली में लिखा गया है, जिसमें पहली पंक्ति दाईं से बाईं ओर और दूसरी पंक्ति बाईं से दाईं ओर लिखी जाती थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुई गतिविधियों तथा उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पीर अली खान नामक एक पुस्तक विक्रेता ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी। 2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा के बाबू कुंवर सिंह से जा मिले, जिनके नेतृत्व में इस विद्रोह ने एक व्यापक रूप धारण किया। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोह का प्रसार करने में स्थानीय जमींदारों के साथ-साथ दानापुर से आए विद्रोही सैनिकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, तथा छपरा में मोहम्मद हुसैन खान के नेतृत्व में अंग्रेजों के विरुद्ध प्रशासनिक मशीनरी को चुनौती दी गई थी। 4. दानापुर के सैनिकों के विद्रोह के तुरंत बाद ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर ने पटना में संभावित खतरे को भांपते हुए दो प्रमुख वहाबी नेताओं—मौलाना अहमदुल्लाह और शाह मुहम्मद हुसैन—को नजरबंद कर लिया था, जिससे शहर में अंग्रेजों के विरुद्ध तीव्र प्रतिक्रिया हुई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत 'माउंटबेटन योजना' (3 जून 1947) और उसके क्रियान्वयन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. माउंटबेटन योजना के तहत यह प्रावधान किया गया था कि बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकें दो भागों में होंगी — एक मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के प्रतिनिधियों की और दूसरी शेष जिलों के प्रतिनिधियों की — और यदि दोनों में से कोई भी पक्ष प्रांत के विभाजन के पक्ष में बहुमत से मतदान करता है, तो प्रांत का विभाजन अनिवार्य रूप से कर दिया जाएगा। 2. इस योजना के अंतर्गत सिंध प्रांत के भविष्य का निर्धारण करने के लिए वहाँ जनमत संग्रह (Referendum) कराया गया, जबकि उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) में जनमत संग्रह न कराकर वहाँ के स्थानीय विधानमंडल को सीधे पाकिस्तान में शामिल होने का निर्देश दिया गया। 3. भारत और पाकिस्तान के बीच सीमाओं का सीमांकन और निर्धारण करने के लिए सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो सीमा आयोगों (Boundary Commissions) का गठन किया गया था, जिन्होंने अपनी सीमा रेखा संबंधी रिपोर्ट 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता दिवस के दिन ही सार्वजनिक की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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