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History of India
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अकबर ने "महजरनामा" कब जारी किया?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
1579 में धार्मिक निर्णय की शक्ति ली।
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास और विभिन्न विभागों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दीवान-ए-कोही (कृषि विभाग) - मुहम्मद बिन तुगलक
2. दीवान-ए-अर्ज (सैन्य विभाग) - बलबन
3. दीवान-ए-बदगान (दासों का विभाग) - फिरोजशाह तुगलक
4. दीवान-ए-मुस्तखराज (राजस्व विभाग और बकाया वसूली) - अलाउद्दीन खिलजी
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन के संदर्भ में लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा प्रस्तुत '3 जून योजना' (माउंटबेटन योजना, 1947) और उसके क्रियान्वयन के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना के तहत बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकों का यह प्रावधान किया गया था कि दोनों प्रांतों के हिन्दू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्य अलग-अलग बैठक करके यह निर्णय लेंगे कि प्रांत का विभाजन किया जाए या नहीं।
2. उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसके साथ शामिल होना है, इसका निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Plebiscite) का प्रावधान किया गया था।
3. योजना के अंतर्गत भारत और पाकिस्तान के बीच शक्तियों के हस्तांतरण तथा सीमाओं के निर्धारण के लिए सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो अलग-अलग सीमा आयोगों (पंजाब और बंगाल के लिए) का गठन किया गया था, जिन्होंने 15 अगस्त 1947 से पहले ही अपनी सीमा रिपोर्ट सौंप दी थी।
4. ब्रिटिश संसद में प्रस्तुत भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 में यह स्पष्ट किया गया था कि 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश भारत को दो स्वतंत्र डोमिनियन—भारत और पाकिस्तान—में विभाजित कर दिया जाएगा और ब्रिटिश राजमुकुट का भारतीय रियाسतों पर सर्वोच्च अधिकार समाप्त हो जाएगा, जिससे रियासतों को यह छूट मिल गई कि वे भारत या पाकिस्तान में शामिल हों अथवा स्वतंत्र रहें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों और ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैन धर्म के 'अनेकांतवाद' और 'स्याद्वाद' के सिद्धांत के अनुसार, परम सत्य या वास्तविकता को किसी एक दृष्टिकोण से पूर्णतः व्यक्त नहीं किया जा सकता, जबकि बौद्ध धर्म के 'प्रतीतसमुत्पाद' (Dependent Origination) सिद्धांत के अनुसार सभी वस्तुएं और घटनाएं हेतु-प्रत्यय (कारण और शर्त) के अधीन होने के कारण अनित्य और सापेक्ष हैं।
2. बौद्ध धर्म के महायान संप्रदाय में 'बोधिसत्व' की संकल्पना को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, जिसमें वे प्राणीमात्र के उद्धार के लिए बुद्धत्व प्राप्त करने से पूर्व अपने निर्वाण को स्थगित कर देते हैं, जबकि जैन धर्म में 'तीर्थंकर' की अवधारणा के अंतर्गत केवल वे ही मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं जिन्होंने पूर्ण संन्यास लेकर कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया हो।
3. जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए 'त्रिरत्न' (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र) का विधान किया गया है, तथा इसके साथ ही कर्मों के बंधन से पूरी तरह मुक्ति पाने के लिए संलेखना (संथारा) पद्धति द्वारा शरीर का त्याग करना अनिवार्य एवं एकमात्र साधन माना गया है।
4. बौद्ध संगीतों (Councils) के क्रम में, चतुर्थ बौद्ध संगीति कुषाण सम्राट कनिष्क के शासनकाल में कश्मीर के कुंडलवन में आयोजित की गई थी, जिसकी अध्यक्षता वासुमित्र ने की थी और इसी संगीति में बौद्ध धर्म स्पष्ट रूप से 'स्थविरवाद' (हीनयान) और 'महायान' संप्रदायों में विभाजित हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान आयोजित गोलमेज सम्मेलनों और 'गांधी-इरविन समझौते' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रथम गोलमेज सम्मेलन (नवंबर 1930 - जनवरी 1931) में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था, किंतु इस सम्मेलन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड ने भारत को 'डोमिनियन स्टेटस' (औपनिवेशिक स्वराज्य) प्रदान करने की औपचारिक घोषणा कर दी थी।
2. 5 मार्च 1931 को हस्ताक्षरित 'गांधी-इरविन समझौता' (दिल्ली समझौता) के तहत सरकार ने उन सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति व्यक्त की थी, जिन पर हिंसा का प्रत्यक्ष आरोप था या जो हत्या के मामलों में सजा काट रहे थे।
3. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (सितंबर-दिसंबर 1931) में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, किंतु यह सम्मेलन मुख्य रूप से सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के विवाद के कारण बिना किसी ठोस निर्णय के समाप्त हो गया।
4. वर्ष 1932 में लंदन में आयोजित तृतीय गोलमेज सम्मेलन के बहिष्कार के बाद, महात्मा गांधी और कांग्रेस की केंद्रीय कार्य समिति के सदस्यों को बिना मुकदमा चलाए पुनः गिरफ्तार कर लिया गया तथा सविनय अवज्ञा आंदोलन को नए सिरे से तेज कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वैदिक साहित्य के विभिन्न अंगों, उनके संकलनकर्ताओं और विषय-वस्तु के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. आरण्यक - वे ग्रंथ जिनकी रचना वनों में की गई थी और जो मुख्य रूप से दार्शनिक रहस्यों, यज्ञों के आध्यात्मिक अर्थ तथा अनुष्ठानों के स्थान पर ज्ञान व चिंतन पर बल देते हैं।
2. उपनिषद - इन्हें 'वेदांत' भी कहा जाता है, जिनकी कुल संख्या 108 मानी गई है, और ये वैदिक दर्शन के अंतिम भाग हैं जो मुख्य रूप से 'ब्रह्म', 'आत्मा' और मोक्ष के मार्ग की विवेचना करते हैं।
3. वेदांग - वेदों के अर्थ को भली-भांति समझने और वैदिक अनुष्ठानों को शुद्ध रूप से संपन्न कराने के लिए कुल छह अंगों (शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और ज्योतिष) की रचना की गई थी, जिन्हें सूत्र साहित्य के रूप में भी जाना जाता है।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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