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History of India
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औरंगजेब ने दक्षिण के किन दो राज्यों को जीतकर मुगल साम्राज्य में मिला लिया था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
औरंगजेब ने 1686-87 में बीजापुर और गोलकुंडा जीता।
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सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना, वास्तुकला और सामाजिक-आर्थिक विशिष्टताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सैंधव सभ्यता की अधिकांश बस्तियाँ 'ग्रिड पद्धति' (Grid System) पर आधारित थीं, जहाँ सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं और बस्तियों को मुख्य रूप से दो भागों — पश्चिमी दुर्ग (Citadel) और पूर्वी आवासीय नगर — में विभाजित किया गया था, हालाँकि धौलावीरा इसका अपवाद है जो त्रि-स्तरीय (तीन भागों) विभाजित था।
2. इस सभ्यता की जल निकासी प्रणाली (Drainage System) इसकी सबसे अनूठी विशेषता थी, जिसमें प्रत्येक घर का गंदा पानी ढकी हुई नालियों के माध्यम से सड़कों की मुख्य नालियों तक पहुँचता था, तथा नालियों की सफाई के लिए जगह-जगह पर ईंटों से बने सोख्ता गड्ढे और मेनहोल बनाए गए थे।
3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'विशाल स्नानागार' (Great Bath) का प्रयोग संभवतः धार्मिक आयोजनों या अनुष्ठानिक स्नान के लिए किया जाता था, जिसके तल को जल-रोधी बनाने के लिए ईंटों के ऊपर बिटुमिन (तारकोल) की एक परत का लेप लगाया गया था।
4. हड़प्पा सभ्यता के स्थलों से लोहे के कृषि उपकरण, हथियार और प्रचुर मात्रा में सोने-चांदी के सिक्के (आहत सिक्के) प्राप्त हुए हैं, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि सैंधव वासी एक उन्नत मौद्रिक अर्थव्यवस्था और धातु-प्रौद्योगिकी से परिचित थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में 'प्रार्थना समाज' और 'सत्यशोधक समाज' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1867 में बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा स्थापित 'प्रार्थना समाज' का मुख्य उद्देश्य जातिगत बंधनों को समाप्त करना, बाल विवाह का विरोध करना, विधवा पुनर्विवाह का समर्थन करना और स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देना था, जिसके प्रमुख बौद्धिक नेता महादेव गोविंद रानाडे थे।
2. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व और पारंपरिक धार्मिक कर्मकांडों का कड़ा विरोध करते हुए शूद्रों और अति-शूद्रों के अधिकारों तथा सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष किया, तथा उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'गुलामगिरी' में इस विचारधारा का विस्तृत विवरण मिलता है।
3. प्रार्थना समाज के संस्थापकों ने बंगाल के ब्रह्म समाज के विपरीत वेदों की अचूकता और दिव्यता में पूर्ण विश्वास व्यक्त किया तथा हिंदू धर्म के पारंपरिक पौराणिक देवी-देवताओं की पूजा को अनिवार्य बताया।
4. सत्यशोधक समाज ने रूढ़िवादी धार्मिक ग्रंथों और पुरोहितवाद को नकारते हुए विवाह संस्कारों और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में ब्राह्मण पुरोहितों की मध्यस्थता को पूरी तरह समाप्त करने के लिए वैकल्पिक विवाह पद्धतियों की शुरुआत की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सेना में पुरानी 'ब्राउन बैस' मस्कट बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड' राइफल को शामिल किए जाने का निर्णय लिया गया था, जिसमें प्रयोग होने वाले कारतूस के कागज के आवरण को लोड करने से पहले दांत से काटना पड़ता था और यह अफवाह तेजी से फैली कि उस आवरण में गाय और सुअर की चर्बी का लेप लगाया गया है।
2. जनवरी 1857 में दमदम (Dum Dum) छावनी में तैनात एक भारतीय लस्कर (भारतीय सिपाही) ने सबसे पहले चर्बी वाले कारतूस के प्रयोग के खिलाफ खुलकर विरोध जताया था, जिसे उच्च अधिकारियों ने तुरंत खारिज करते हुए इस नई राइफल के प्रयोग को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया था।
3. बैरकपुर छावनी की 34वीं नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध बगावत करते हुए ब्रिटिश एडजुटेंट लेफ्टिनेंट ह्यू बॉग और सार्जेंट मेजर ह्यूसन पर हमला कर उनकी हत्या कर दी थी, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई थी।
4. मंगल पांडे की फांसी के तुरंत बाद बैरकपुर छावनी के सभी सैनिकों ने एकजुट होकर अंग्रेजों के विरुद्ध खुलेआम सशस्त्र विद्रोह का ऐलान कर दिया था और उसी दिन सामूहिक रूप से दिल्ली की ओर कूच कर गए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मनसबदारी व्यवस्था में "जात" का पद क्या निर्धारित करता था?
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अलाउद्दीन खिलजी ने दुधारू पशुओं पर लगने वाले "चरी" कर का निर्धारण किस आधार पर किया था?
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