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Child Development
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सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'मुखीय अवस्था' (Oral Stage) से लेकर 'जननांग अवस्था' (Genital Stage) तक के संपूर्ण विकास क्रम में, बच्चों के मनोवैज्ञानिक ऊर्जा (लिबिडो) के विस्थापन और विभिन्न एरोजनस जोन (Erogenous Zones) के सक्रियण का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस सिद्धांत की समग्र तात्विक प्रकृति को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?

Detailed Explanation

सिग्मंड फ्रायड (Sigmund Freud) के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत के अनुसार, व्यक्तित्व का विकास विभिन्न क्रमिक चरणों में होता है जहाँ 'लिबिडो' (Libidinal energy) शरीर के विभिन्न संवेदनशील अंगों (Erogenous zones) पर केंद्रित होती है। यदि किसी अवस्था में आवश्यकता से अधिक संतुष्टि मिल जाए या अत्यधिक अभाव/कुंठा (Deprivation) रहे, तो ऊर्जा का एक हिस्सा उसी अवस्था में अटक जाता है जिसे 'स्थिरीकरण' (Fixation) कहा जाता है, और यह वयस्क जीवन के व्यवहार को प्रभावित करता है। विकिपीडिया संदर्भ
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