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History of India
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अकबर की मृत्यु के बाद 1605 ई. में "नूरुद्दीन मोहम्मद जहाँगीर" के नाम से मुगल सम्राट कौन बना?

Detailed Explanation

सलीम जहाँगीर के नाम से सम्राट बना।
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→ वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की गतिविधियों तथा रणनीतिक प्रंबध के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नाना साहब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व करते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया और पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र होने के नाते ब्रिटिश सरकार द्वारा उनकी पेंशन और उपाधि रोके जाने के प्रतिशोध में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध शस्त्र उठाए। 2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और निष्ठावान सहयोगी थे, ने कूटनीतिक और वैचारिक पक्ष संभालते हुए लंदन में पेंशन बहाली के लिए पैरवी की थी और बाद में तात्या टोपे के साथ मिलकर कानपुर की सैन्य रणनीति को अमलीजामा पहनाया। 3. तात्या टोपे ने कानपुर के पतन के पश्चात अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और वहाँ की सेना को अपने पक्ष में मिलाकर रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना को कड़ी चुनौती दी। 4. कानपुर में पराजय के बाद नाना साहब अंग्रेजों के हाथों जीवित पकड़े गए और ब्रिटिश अदालत द्वारा मुकदमा चलाकर उन्हें सार्वजनिक रूप से कानपुर में ही फाँसी पर लटका दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन और प्रमुख संगठनों के विकास के संदर्भ में, गदर पार्टी (Ghadar Party) और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1913 में लाला हरदयाल, सोहन सिंह भाकना और अन्य प्रवासियों द्वारा सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) में स्थापित 'गदर पार्टी' ने 'द गदर' साप्ताहिक पत्र के माध्यम से ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति का संदेश दिया, और इसका मुख्यालय 'युगांतर आश्रम' के रूप में स्थापित किया गया था। 2. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गदर पार्टी के नेताओं ने ब्रिटिश सेना में तैनात भारतीय सैनिकों को भड़काने और देशव्यापी विद्रोह (गदर) कराने की योजना बनाई थी, किंतु ब्रिटिश गुप्तचर तंत्र की सक्रियता के कारण यह योजना समय से पूर्व ही विफल हो गई। 3. सितंबर 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन करके 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) की स्थापना की गई, जिसमें मार्क्सवादी-समाजवादी विचारधारा को इसके घोषणापत्र का मुख्य आधार बनाया गया। 4. HSRA के प्रमुख रणनीतिकार भगवती चरण बोहरा द्वारा रचित प्रसिद्ध दस्तावेज 'बम का दर्शन' (The Philosophy of the Bomb) में व्यक्तिगत आतंकवाद और राजनीतिक हिंसा का पूर्ण रूप से समर्थन किया गया था, तथा यह तर्क दिया गया था कि भारतीय स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए केवल अहिंसक असहयोग ही एकमात्र मार्ग है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मध्यकालीन भारत के सूफी आंदोलनों और उनके विशिष्ट सिलसिलों के वैचारिक तथा व्यवहारिक पक्षों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चिश्ती सिलसिला संगीत (समां) और स्थानीय लोक भाषाओं के प्रयोग के प्रति अत्यधिक उदार था, तथा इस सिलसिले के संतों ने राजकीय संरक्षण और जागीर-अनुदान स्वीकार करने की नीति का कड़ाई से त्याग किया था। 2. सुहरावर्दी सिलसिला राजनीतिक मामलों में तटस्थता की नीति अपनाता था और वह राज्य के संरक्षण, शाही पदों तथा धन-संपत्ति को स्वीकार करने में विश्वास नहीं रखता था। 3. नक्शबंदी सिलसिला भारत में सबसे अधिक कट्टर और रूढ़िवादी सिलसिला माना जाता था, जिसने अकबर की उदार धार्मिक नीतियों और 'दीन-ए-इलाही' का कड़ा विरोध किया था तथा शेख अहमद सरहिंदी ने इस दिशा में प्रमुख वैचारिक भूमिका निभाई थी। 4. कादिरिया सिलसिला के संतों ने शाहजहां के काल में दरबार में विशेष प्रभाव प्राप्त किया, और इस सिलसिले के राजकुमार दारा शिकोह ने सूफी मत और उपनिषदों के दार्शनिक सामंजस्य पर बल दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान स्वाधीनता संग्राम के दौरान बिहार के जगदीशपुर क्षेत्र में वीर कुंवर सिंह और उनके छोटे भाई अमर सिंह के नेतृत्व एवं सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अप्रैल 1858 में वीर कुंवर सिंह ने अपनी कुशल रणनीति का परिचय देते हुए ब्रिटिश सेना को पराजित किया और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद आरा तथा जगदीशपुर के रास्ते अपनी रियासत में प्रवेश करने में सफल रहे, जहाँ विजयोत्सव के तुरंत बाद 26 अप्रैल 1858 को उनका निधन हो गया। 2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के उपरांत उनके भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व संभाला और कैमूर की पहाड़ियों के जंगलों से ब्रिटिश सेना के खिलाफ लंबे समय तक छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) का प्रभावी संचालन किया। 3. अमर सिंह के नेतृत्व में कैमूर क्षेत्र में ब्रिटिश सत्ता के समानांतर एक प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था संचालित की जा रही थी, जिसे स्थानीय जनता और किसानों से रसद एवं खुफिया सहायता का पूर्ण समर्थन प्राप्त था। 4. अंततः अंग्रेजों ने अमर सिंह को युद्ध के मैदान में जीवित अथवा मृत पकड़ लिया था और वर्ष 1859 के अंत में उन पर मुकदमा चलाकर कलकत्ता में सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश का विभाजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 3 जून 1947 को घोषित माउंटबेटन योजना में भारत के विभाजन की रूपरेखा स्पष्ट की गई थी, जिसके तहत बंगाल और पंजाब विधानसभाओं की बैठकों में हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों द्वारा अलग-अलग बैठक कर प्रांत के विभाजन के पक्ष या विपक्ष में निर्णय लिया जाना था। 2. माउंटबेटन योजना के आधार पर ब्रिटिश संसद में प्रस्तुत 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1847' (Indian Independence Act 1847) को ब्रिटिश क्राउन की स्वीकृति मिलने के पश्चात 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र डोमिनियन अस्तित्व में आए। 3. पंजाब और बंगाल में सीमाओं के निर्धारण के लिए सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में गठित 'सीमा आयोग' (Boundary Commission) ने अपने अंतिम पंचाट (Award) की घोषणा 15 अगस्त 1947 से पूर्व ही कर दी थी, किंतु प्रशासनिक और राजनीतिक कारणों से इसे स्वतंत्रता दिवस के ठीक दो दिन बाद यानी 17 अगस्त 1947 को सार्वजनिक किया गया। 4. इस योजना के प्रावधानों के अंतर्गत उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में शामिल होने का निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराया गया था, जिसमें दोनों स्थानों की जनता ने पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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