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History of India
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मुगल काल में जिले को किस नाम से जाना जाता था?
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Detailed Explanation
जिले को मुगल काल में सरकार कहा जाता था।
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सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक तंत्र, राजस्व संरचना और सैन्य संगठनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' नामक केंद्रीय मंत्रिपरिषद का गठन किया गया था, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे छत्रपति के प्रति उत्तरदायी होता था और यह कोई आधुनिक अर्थों में मंत्रिमंडल (Cabinet) न होकर विभिन्न प्रशासनिक विभागों के परामर्शदाताओं का एक समूह था, जहाँ 'पंडितराव' धार्मिक मामलों और दादानुसार दान-पुण्य का प्रभारी था।
2. शिवाजी ने अपने राज्य में जागीरदारी प्रथा को कड़ाई से हतोत्साहित किया और सैन्य अधिकारियों व सैनिकों को भूमि अनुदान (जागीर) देने के बजाय सीधे नगद वेतन देने की नीति को अपनाया, हालांकि कुछ विशेष मामलों में राजस्व संग्रह के अधिकार दिए गए थे जिन्हें बाद में पेशवा काल में पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
3. मराठा सेना में घुड़सवार सेना के दो प्रमुख वर्ग थे—'पागा' और 'सिलाहदार'। पागा घुड़सवार वे सैनिक थे जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और शस्त्र सीधे उपलब्ध कराए जाते थे और वे राज्य के पूर्ण नियंत्रण में होते थे, जबकि सिलाहदार सैनिक अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर सेना में शामिल होते थे।
4. शिवाजी की राजस्व प्रणाली मुख्य रूप से मलिक अंबर द्वारा डेक्कन के सुल्तानों के अधीन विकसित भू-राजस्व व्यवस्था पर आधारित थी, जिसके अंतर्गत भूमि की पैमाइश और उर्वरता के आकलन के बाद प्रारंभिक उपज का दो-तिहाई (66%) हिस्सा राज्य के कर के रूप में अनिवार्य रूप से वसूला जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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किस शासक ने कहा था कि "मैंने एक मुट्ठी बाजरे के लिए दिल्ली का साम्राज्य लगभग खो दिया था"?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) ने एकेश्वरवाद के प्रचार और मूर्तिपूजा के विरोध का समर्थन किया, तथा उनके द्वारा 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने किसी भी धर्मग्रंथ को अछूत या अचूक (Infallible) मानने से इंकार किया।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने वेदों की अपौरुषेयता में अटूट विश्वास व्यक्त किया और 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए मूर्तिपूजा, बहुदेववाद तथा जन्मना जाति व्यवस्था का पुरजोर खंडन किया।
3. केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज के प्रथम विभाजन के पश्चात, देवेंद्रनाथ टैगोर ने 'साधारण ब्रह्म समाज' की स्थापना की, जो आगे चलकर अधिक कट्टरपंथी और लोकतांत्रिक सुधारों का समर्थक बन गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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