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History of India
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हल्दीघाटी का युद्ध किनके बीच हुआ?

Detailed Explanation

1576 में हल्दीघाटी का प्रसिद्ध युद्ध हुआ।
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मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय एवं प्रांतीय प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्य प्रशासन में सर्वोच्च नागरिक और सैन्य अधिकार 'तीर्थ' या 'महामात्र' कहलाने वाले उच्च अधिकारियों के पास होते थे, जिनकी संख्या कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार अठारह (18) थी। 2. साम्राज्य के सुदूर प्रांतों (जैसे तक्षशिला, उज्जैन, और सौराष्ट्र) का शासन प्रबंधन चलाने के लिए राजकुमारों (आर्यपुत्र) को 'कुमार' के रूप में नियुक्त किया जाता था, जो प्रांतीय प्रशासन के वास्तविक प्रमुख होते थे। 3. मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन छह समितियों द्वारा संचालित होता था, जिनमें प्रत्येक समिति में पांच सदस्य होते थे जो उद्योगों, विदेशियों, जन्म-मृत्यु और व्यापार की देखरेख करते थे। 4. मौर्य काल में गुप्तचर विभाग को 'महामात्य' कहा जाता था, और गुप्तचरों के दो प्रमुख प्रकार होते थे—संस्थार (एक ही स्थान पर रहकर कार्य करने वाले) और संचरार (भ्रमण करने वाले गुप्तचर)। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—के प्रभावों और उनके क्रियान्वयन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा 1793 में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' के तहत जमींदारों को भूस्वामी बना दिया गया, जहाँ राजस्व की दरें इतनी अधिक थीं कि 'सूर्यस्त कानून' (Sunset Law) के कठोर प्रावधानों के कारण शुरुआती वर्षों में ही कई जमींदारों की संपत्तियां नीलाम हो गईं। 2. थॉमस मुनरो द्वारा मद्रास प्रेसीडेंसी में लागू 'रयतवारी व्यवस्था' में बिचौलियों का पूर्ण रूप से उन्मूलन कर दिया गया और किसानों (रयतों) को भूमि का पूर्ण स्वामित्व दे दिया गया, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद सुदृढ़ हो गई और वे महाजनों के चंगुल से पूरी तरह मुक्त हो गए। 3. हॉल्ट मैकेंज़ी और रॉबर्ट मार्टिन बर्ड द्वारा उत्तर-पश्चिम प्रांत और पंजाब के क्षेत्रों में परिकल्पित 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत व्यक्तिगत किसानों को जिम्मेदार न मानकर पूरे ग्राम समुदाय या 'महाल' को संयुक्त रूप से भू-राजस्व भुगतान के लिए उत्तरदायी ठहराया गया। 4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक परिणाम यह हुआ कि पारंपरिक कृषि अर्थव्यवस्था का वाणिज्यीकरण (Commercialization of Agriculture) तेजी से हुआ, जिससे खाद्यान्न फसलों के स्थान पर नकदी फसलों (जैसे नील, कपास, अफीम) के उत्पादन को बल मिला। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? फिरोज शाह तुगलक के समय "इक्ता" प्रणाली की क्या स्थिति थी? दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास, सैन्य सुधारों और राजस्व प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नकद वेतन देने की स्थायी व्यवस्था शुरू की और घोड़ों को दागने तथा सैनिकों के हुलिया दर्ज करने की प्रथा को अनिवार्य बनाया ताकि सैन्य भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके। 2. गयासुद्दीन तुगलक ने अपने पूर्ववर्ती सुल्तानों की कठोर राजस्व नीतियों में सुधार करते हुए 'राजस्व बटाई' या 'नस्क़' प्रणाली को अपनाया और कर की दर को घटाकर उपज का एक-तिहाई कर दिया, साथ ही किसानों के प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाते हुए लगान में अत्यधिक वृद्धि न करने का निर्देश दिया। 3. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी प्रशासनिक महत्वाकांक्षाओं के तहत दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि का प्रयोग किया था, और कृषि सुधारों के तहत 'अमीर-ए-कोही' नामक एक नए विभाग की स्थापना की जो सीधे तौर पर बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने और किसानों को तकावी (अग्रिम) ऋण देने के लिए उत्तरदायी था। 4. फिरोज शाह तुगलक ने अपने शासनकाल में 'मदद-इ-माश' और इक्ता व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करते हुए सभी जागीर भूमि को राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण (खालसा) में ले लिया और सैनिकों को भूमि के बजाय केवल नकद वेतन देने की नीति को सख्ती से लागू किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक ढांचा और विभिन्न विभागों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. दीवान-ए-कोही - कृषि विभाग, जिसकी स्थापना सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा दोआब क्षेत्र में कृषि सुधारों और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए की गई थी। 2. दीवान-ए-अर्ज - सैन्य विभाग, जिसकी स्थापना गयासुद्दीन तुगलक द्वारा सेना के संगठन, सैनिकों का हुलिया दर्ज करने और घोड़ों को दागने की प्रथा को समाप्त करने के लिए की गई थी। 3. दीवान-ए-बदगान - दासों का विभाग, जिसकी स्थापना सुल्तान फिरोज शाह तुगलक द्वारा सल्तनत काल में दासों की बढ़ती संख्या और उनकी देखभाल के लिए की गई थी। 4. दीवान-ए-मुस्तखराज - वित्त एवं राजस्व विभाग, जिसकी स्थापना अलाउद्दीन खिलजी द्वारा लगान बकाये की वसूली और राजस्व अधिकारियों के भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाने के लिए की गई थी। उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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