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History of India
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टोडरमल किस विभाग के प्रमुख थे?

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राजा टोडरमल वित्त मंत्री थे।
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मुगल काल में "अहदी" (Ahadi) सैनिक किन्हें कहा जाता था? भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885) से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के कालखंड में नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष, कार्यप्रणाली और राजनीतिक रणनीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नरमपंथी नेताओं (जैसे दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और सुरेन्द्रनाथ बनर्जी) का यह अटूट विश्वास था कि ब्रिटिश शासन न्यायप्रिय है और वे मुख्य रूप से प्रार्थना, याचिका और प्रतिनिधिमंडल (Prayer, Petition and Protest) की 'संवैधानिक राजनीति' में विश्वास रखते थे, जबकि गरमपंथी नेताओं (लाल-बाल-पाल और अरबिंदो घोष) ने इसे 'राजनीतिक भिक्षावृत्ति' (Political Mendicancy) करार दिया। 2. वर्ष 1905 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन, जिसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, में पहली बार उग्रवादी दल के तीव्र दबाव के कारण स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का प्रस्ताव कलकत्ता से बाहर पूरे देश में लागू करने का औपचारिक और सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर दिया गया था। 3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में कांग्रेस के मंच से पहली बार दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में 'स्वराज' (Swaraj) को राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में घोषित किया गया, किंतु गरम दल और नरम दल के बीच वैचारिक मतभेदों के कारण बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के प्रस्तावों पर तीव्र गतिरोध उत्पन्न हो गया था। 4. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का औपचारिक विभाजन रासबिहारी घोष की अध्यक्षता को लेकर नहीं, बल्कि इस बात पर हुआ कि गरम दल के नेता लाला लाजपत राय को कांग्रेस का अगला अध्यक्ष बनाने की मांग को नरमपंथियों ने सिरे से खारिज कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व एवं संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बाबू कुंवर सिंह ने दानापुर के विद्रोही सिपाहियों के शाहबाद पहुँचने से पूर्व ही ब्रिटिश खजाने पर अधिकार कर लिया था तथा आरा की लड़ाई में मेजर आयर की सेना को पराजित करने के पश्चात अपनी अंतरिम सरकार की स्थापना की थी। 2. ब्रिटिश सेनापति कैप्टन डनबर की संयुक्त सैन्य टुकड़ी को बाबू कुंवर सिंह ने जंगल-युद्ध और छापामार रणनीति अपनाकर बुरी तरह पराजित किया था, जिसमें कैप्टन डनबर स्वयं मारा गया था। 3. बाबू कुंवर सिंह की मृत्यु के बाद उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध कैमूर की पहाड़ियों से सशस्त्र संघर्ष जारी रखा और गुरिल्ला युद्ध प्रणाली के माध्यम से ब्रिटिश प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी। 4. अमर सिंह के नेतृत्व में चलाए जा रहे समानांतर प्रशासन को कुचलने के लिए ब्रिटिश सरकार ने बिहार में मार्शल लॉ को और अधिक कठोर कर दिया था, किंतु अमर सिंह को कभी भी ब्रिटिश सेना द्वारा गिरफ्तार नहीं किया जा सका था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उससे जुड़े सैन्य एवं राजनीतिक घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए नाना साहब ने स्वयं को पेशवा घोषित किया और पेशवा बाजीराव द्वितीय के उत्तराधिकारी के रूप में ब्रिटिश पेंशन और उपाधि से वंचित किए जाने के अपने दावे को आधार बनाकर ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का शंखनाद किया। 2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के अत्यंत विश्वासपात्र सलाहकार और मुख्य रणनीतिकार थे, ने विद्रोह की कूटनीतिक और वैचारिक पृष्ठभूमि तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा लंदन जाकर नाना साहब की पेंशन के मामले की पैरवी भी की थी। 3. कानपुर की घेराबंदी के दौरान नाना साहब की सेना ने जनरल सर ह्यू व्हीलर की सेना को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश किया, जिसके उपरांत हुई 'सती चौरा घाट घटना' के बाद ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कानपुर पर पुनः पूर्ण अधिकार प्राप्त कर लिया था। 4. तात्या टोपे ने कानपुर में शुरुआती सैन्य संचालन के पश्चात ग्वालियर और कालपी के विद्रोही सैनिकों का कुशल नेतृत्व किया तथा अंग्रेजों के खिलाफ एक अत्यंत प्रभावी छापामार युद्ध का संचालन किया, जिन्हें अंततः उनके एक जमींदार मित्र मान सिंह के विश्वासघात के कारण पकड़ा गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय और प्रांतीय प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्य प्रशासन में 'तीर्थ' सर्वोच्च श्रेणी के अधिकारी या मंत्री होते थे, जिनकी संख्या कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार अठारह थी, और इन सभी तीर्थों की नियुक्ति से पहले उनके चरित्र और निष्ठा की जाँच 'उधापधा' (गुप्तचर परीक्षण) के माध्यम से की जाती थी। 2. अशोक के काल में प्रान्तों (चक्रों) का प्रशासन उच्च राजवंशीय कुमार या आर्यपुत्र नामक अधिकारियों द्वारा चलाया जाता था, और सौराष्ट्र जैसे दूरस्थ प्रांत में पुष्यगुप्त वैश्य और तुषास्प जैसे अधिकारी 'राष्ट्रीय' (प्रांतीय गवर्नर) के रूप में नियुक्त किए गए थे। 3. मेगस्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन तीस सदस्यों की एक नगर परिषद द्वारा चलाया जाता था, जो छह समितियों (प्रत्येक में पाँच सदस्य) में विभाजित थी और जिसमें शिल्पियों के निरीक्षण, विदेशियों की देखभाल और जन्म-मृत्यु पंजीकरण जैसे कार्य शामिल थे। 4. मौर्य काल में भू-राजस्व (भाग) कुल उपज का 1/6 भाग से 1/4 भाग तक वसूला जाता था, और 'सीताध्यक्ष' नामक अधिकारी राजकीय कृषि भूमि (सीता भूमि) की देखरेख करता था, जबकि अकाल या प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत प्रदान करने के लिए 'कोष्ठागार' (अन्नागार) से अनाज वितरित किया जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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