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Child Development
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के अंतर्गत, पारंपरिक नैतिकता (Conventional Level) के दूसरे चरण यानी 'प्राधिकार और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने का अभिविन्यास' (Authority and Social Order-Maintaining Orientation) तथा उत्तर-पारंपरिक नैतिकता (Post-Conventional Level) के पहले चरण यानी 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार अभिविन्यास' (Social Contract and Individual Rights Orientation) के बीच के तात्विक और दार्शनिक अंतर का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन दोनों चरणों के मूल विभेद को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?

Detailed Explanation

लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, पारंपरिक स्तर (Conventional Level) के चरण 4 में व्यक्ति 'सामाजिक व्यवस्था और प्राधिकार' के प्रति वफादार होता है, जहाँ उसका मानना होता है कि समाज में कानून और व्यवस्था बनाए रखना ही सर्वोच्च नैतिक कर्तव्य है ताकि अराजकता से बचा जा सके। इसके विपरीत, उत्तर-पारंपरिक स्तर (Post-Conventional Level) के चरण 5 में 'सामाजिक अनुबंध' (Social Contract) की भावना जागृत होती है, जहाँ व्यक्ति यह समझता है कि कानून मनुष्य के लिए हैं न कि मनुष्य कानूनों के लिए; यदि कोई कानून मौलिक मानवाधिकारों या न्याय के विरुद्ध है, तो उसमें संशोधन किया जा सकता है। इस सिद्धांत के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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→ अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) के 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs) के तात्विक और विश्लेषणात्मक स्वरूप का गहन अध्ययन करने पर, यदि कोई शिक्षार्थी अपनी शारीरिक और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के पश्चात् सामाजिक अपनेपन, आत्म-सम्मान (Esteem) और अंततः अपनी सर्वोच्च आंतरिक क्षमताओं के पूर्ण विकास यानी 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization) की अवस्था की ओर अग्रसर होता है, तो मैस्लो के इस अभिप्रेरणात्मक मॉडल के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है? → राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के मूल दर्शन तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) के प्रावधानों के आलोक में, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर बाल-केंद्रित शिक्षा, ज्ञान के सृजन (Construction of Knowledge), और रटने की प्रवृत्ति (Rote Learning) से मुक्ति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक और तात्विक रूप से सत्य है? → अधिगम के किस सिद्धांत में 'प्रयास एवं त्रुटि' (Trial and Error) को सीखने का आधार माना गया है? → संज्ञानात्मक आन्दोलन के जनक कौन हैं? → शैक्षणिक आकलन और मूल्यांकन (Assessment vs Evaluation) के तात्विक एवं व्यावहारिक स्वरूप का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, जब एक शिक्षक विद्यार्थियों के केवल अंकीय निष्पादन (Numerical Performance) को मापने के स्थान पर उनके अधिगम की प्रक्रिया के दौरान आने वाली कठिनाइयों का लगातार दस्तावेजीकरण करता है और मूल्य-आधारित निर्णय लेता है, तो आकलन और मूल्यांकन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
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