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History of India
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बुलंद दरवाजा कहाँ स्थित है?

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अकबर ने फतेहपुर सीकरी में बनवाया।
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म की दार्शनिक मान्यताओं और उनके संस्थागत विकास के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध धर्म के मध्यम प्रतिपदा (अष्टांगिक मार्ग) और जैन धर्म के स्याद्वाद (अनेकांतवाद) दोनों ने ही वेदों की प्रामाणिकता और वैदिक यज्ञों की अनिवार्यता को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया था, हालांकि दोनों ने कठोर तपस्या की मात्रा में अंतर रखा। 2. जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए शरीर का अंत करना या संथारा (संलेखना) पद्धति द्वारा प्राण त्यागना एक स्वीकृत विधि रही है, जबकि बौद्ध धर्म में अतिवादी कायाक्लेश या कठोर आत्म-पीड़न (शरीर को कष्ट देना) का पूर्ण निषेध किया गया है। 3. बौद्ध संघ की सदस्यता के लिए वर्ण व्यवस्था या जाति का कोई बंधन नहीं था, और संघ में प्रवेश के उपरांत सभी भिक्षु संघ के अनुशासन के अधीन हो जाते थे, जबकि जैन संघ में प्रारंभिक काल से ही केवल क्षत्रिय वर्ण के पुरुषों और महिलाओं को ही दीक्षा प्राप्त करने का अधिकार था। 4. जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने चातुर्याम धर्म (जो पार्श्वनाथ द्वारा प्रतिपादित था) में 'ब्रह्मचर्य' नामक पाँचवें महाव्रत को जोड़ा था, तथा बौद्ध धर्म के प्रथम तीन बौद्ध संगीतियों के दौरान हीनयान और महायान संप्रदायों का औपचारिक विभाजन हो चुका था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मराठा साम्राज्य के प्रशासन और छत्रपति शिवाजी महाराज की सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी महाराज की केंद्रीय मंत्रिपरिषद को 'अष्टप्रधान' कहा जाता था, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे छत्रपति के प्रति उत्तरदायी होता था और इनमें से 'पंडितराव' का मुख्य कार्य धार्मिक मामलों और दान-पुण्य से संबंधित व्यवस्था देखना था, जबकि 'न्यायाधीश' सर्वोच्च अपील न्यायालय का प्रमुख होता था। 2. शिवाजी ने राज्य की आय बढ़ाने और लूटपाट पर अंकुश लगाने के लिए पड़ोसी मुगल प्रांतों और स्वतंत्र क्षेत्रों पर 'चौथ' (कुल राजस्व का एक-चौथाई हिस्सा) और 'सरदेशमुखी' (अतिरिक्त दस प्रतिशत कर) नामक कर लगाए, जिनमें सरदेशमुखी को शिवाजी अपने आपको उस क्षेत्र का मुख्य वतनदार या सरदेशमुख होने के दावे के रूप में वसूलते थे। 3. मराठा घुड़सवार सेना दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित थी—'बरगीर' (जिन्हें राज्य की ओर से घोड़े और हथियार प्रदान किए जाते थे) और 'सिलेदार' (जो स्वयं अपने घोड़े और हथियार का प्रबंध करते थे), तथा सेना में अनुशासन बनाए रखने के लिए सैनिकों को लूट का माल अपने पास रखने की पूर्ण स्वतंत्रता थी। 4. शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था में जागीरदारी प्रथा को पूर्ण रूप से बढ़ावा दिया गया और सैन्य अधिकारियों (कारकुनों और सरदारों) को नकद वेतन के बदले वंशानुगत प्रशासनिक जागीरें (इनाम या वतन) देने की प्रथा को अनिवार्य कर दिया गया था ताकि वे निष्ठापूर्वक कार्य कर सकें। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? छठी शताब्दी ईसा पूर्व में भारतीय उपमहाद्वीप में राजनीतिक बदलाव और महाजनपदों के उदय के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और भगवती सूत्र जैसे प्राचीन ग्रंथों में सोलह महाजनपदों की जो सूचियाँ मिलती हैं, उनमें नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित 'अश्मक' (या अस्सक) एकमात्र ऐसा महाजनपद था जो गोदावरी नदी घाटी क्षेत्र में स्थित था। 2. मगध साम्राज्य के उत्कर्ष में उसके भौगोलिक लाभों के साथ-साथ बिम्बिसार और अजातशत्रु द्वारा अपनाई गई साम्राज्यवादी नीतियों की महत्वपूर्ण भूमिका थी, जिसमें बिम्बिसार ने अवंती के राजा चंडप्रद्योत के साथ शत्रुता समाप्त कर मित्रता स्थापित की और उसके राज्य में अपने राजवैद्य जीवक को चिकित्सा हेतु भेजा था। 3. नंद वंश के संस्थापक महापद्मनंद ने 'एकराट' और 'सर्वक्षत्रान्तक' की उपाधि धारण करते हुए कलิง सहित अधिकांश महाजनपदों को मगध साम्राज्य में मिला लिया था, जिसका उल्लेख खारवेल के हाथीगुम्फा अभिलेख में भी मिलता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया था, तथा मुगल सम्राट के साथ होने वाले शाही बर्ताव और पदवी को समाप्त करने के लॉर्ड डलहौजी और लॉर्ड कैनिंग के निर्णयों ने भारतीय जनमानस में गहरी असुरक्षा और आक्रोश पैदा कर दिया था। 2. सामाजिक और धार्मिक कारणों में वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) था, जिसके माध्यम से यह प्रावधान किया गया कि ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को अपने पैतृक संपत्ति के उत्तराधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाईकरण का षड्यंत्र माना। 3. आर्थिक कारणों में अंग्रेजों की लैंड रेवेन्यू नीतियां—जैसे रैयतवाड़ी और महालवाड़ी व्यवस्था—थीं, जिनके कारण पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विघटन हुआ, कृषक वर्ग अत्यधिक कर्ज के बोझ तले दब गया और विलासिता की वस्तुओं के आयात तथा भारतीय हस्तशिल्प व कपड़ा उद्योग के विनाश ने कारीगरों को बेरोजगार कर दिया। 4. विद्रोह के तत्काल पूर्व सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले सामाजिक-धार्मिक कारणों में वर्ष 1856 का 'सामान्य सेना सेवा अधिनियम' (General Service Enlistment Act) भी शामिल था, जिसके तहत बंगाल सेना के नए रंगरूटों के लिए आवश्यकता पड़ने पर समुद्र पार (विदेशों में) जाकर सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया था, जिसे उस समय समाज में समुद्र पार जाना धर्म भ्रष्ट होना माना जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक, सैन्य एवं राजस्व सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नगद वेतन देने की स्थायी व्यवस्था शुरू की और घोड़ों को दागने तथा सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा लागू की ताकि सैन्य भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लग सके। 2. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से दौलताबाद (देवगिरि) स्थानांतरित की, जिसका प्रमुख उद्देश्य मंगोल आक्रमणों से सुरक्षा प्राप्त करना तथा साम्राज्य के मध्य भाग में प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना था, किंतु यह योजना कुप्रबंधन और परिवहन की कठिनाइयों के कारण असफल रही। 3. फ़िरोज़ शाह तुगलक ने कृषि को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर नहरों का निर्माण कराया, जिनमें 'हक-ए-शर्ब' नामक सिंचाई कर उन किसानों पर लगाया गया जो राज्य की नहरों से पानी प्राप्त करते थे, और यह कर कुल उपज का 1/10वां हिस्सा निर्धारित किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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