BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Child Development
8 views

अधिगम (Learning) के अध्ययन में थार्नडाइक के 'प्रभाव के नियम' (Law of Effect), पावलव के 'शास्त्रीय अनुबंधन' (Classical Conditioning) और स्किनर के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) में 'पुनर्बलन' (Reinforcement) की भूमिका और उद्दीपक-अनुक्रिया के स्वरूप का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन तीनों के मध्य तात्विक और क्रियात्मक अंतर को सर्वाधिक सटीक रूप से स्पष्ट करता है?

Detailed Explanation

थार्नडाइक के 'प्रभाव के नियम' के अनुसार जिस कार्य से संतोषजनक परिणाम मिलता है उसकी आवृत्ति बढ़ती है, जो आगे चलकर बी.एफ. स्किनर के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (विकिपीडिया संदर्भ) में पुनर्बलन (Reinforcement) की अवधारणा का आधार बना। इसके विपरीत, इवान पावलव के शास्त्रीय अनुबंधन में अस्वाभाविक उद्दीपक को स्वाभाविक उद्दीपक से पहले प्रस्तुत किया जाता है जहाँ प्राणी का व्यवहार अनैच्छिक (Respondent behavior) होता है।
Share:

Related Questions

→ 2001 में ब्लूम की टैक्सोनॉमी के संशोधित संस्करण में, संज्ञा 'संश्लेषण' को निम्नलिखित में से किस क्रिया में बदल दिया गया था? → लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के अंतर्गत, उत्तर-पारंपरिक नैतिकता (Post-conventional Morality) के अंतिम चरण यानी 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःचेतना अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) की तात्विक और दार्शनिक प्रकृति का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस चरण की वास्तविक मनोवैज्ञानिक विशेषता को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है? → अब्राहम मैस्लो के 'मानवीय आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के संदर्भ में, यदि कोई छात्र अपनी बुनियादी शारीरिक आवश्यकताओं (Physiological needs) और सुरक्षा आवश्यकताओं (Safety needs) के पूर्णतः संतुष्ट न होने के बावजूद, अपनी कक्षाओं में उच्च स्तर की आत्म-सिद्धि (Self-actualization) और बौद्धिक जिज्ञासा का प्रदर्शन करता है, तो मैस्लो के सिद्धांत के बाद के संशोधनों (विशेषकर 'संज्ञानात्मक आवश्यकताओं' और 'सौंदर्यपरक आवश्यकताओं' के समावेश) के आधार पर इस स्थिति का सबसे तार्किक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण क्या होगा? → विशिष्ट अधिगम अक्षमताओं (Specific Learning Disabilities) के नैदानिक वर्गीकरण के अंतर्गत, जब किसी छात्र में दृश्य-स्थानिक (Visuospatial) प्रसंस्करण में गंभीर कठिनाई, गणितीय प्रतीकों को समझने में असमर्थता, संख्याओं के स्थानीय मान (Place Value) को व्यवस्थित करने में भ्रम और मौखिक व लिखित गणितीय समस्याओं के समाधान में लगातार विफलता दिखाई देती है, तो इस न्यूरो-विकास संबंधी विकार को किस रूप में पहचाना जाता है और इसके प्राथमिक निदान के लिए कौन सी रणनीति सबसे प्रभावी होती है? → पियाजे के अनुसार, 'मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) में बच्चे की मुख्य तार्किक क्षमता क्या है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.