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History of India
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हुमायूँ का मकबरा दिल्ली में किसने बनवाया?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
हुमायूँ की पत्नी हाजी बेगम ने बनवाया।
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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और तत्पश्चात प्रारंभ हुए स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन के वैचारिक दृष्टिकोण, आर्थिक प्रभावों तथा संगठनात्मक प्रसार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के विरोध में 16 अक्टूबर 1905 को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जिस दौरान रवींद्रनाथ ठाकुर के आह्वान पर लोगों ने एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधी और 'आमार सोनार बांग्ला' गीत गाया गया, तथा आंदोलन के दौरान कलकत्ता में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना वर्ष 1906 में की गई थी।
2. स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहा; आंध्र प्रदेश के डेल्टा क्षेत्रों (खासकर कृष्णा और गोदावरी जिलों) में इसे 'वंदे मातरम् आंदोलन' के नाम से जाना गया, जहाँ स्थानीय बुद्धिजीवियों ने ब्रिटिश उत्पादों के बहिष्कार का नेतृत्व किया, जबकि मद्रास प्रेसीडेंसी में वी. चिदंबरम पिल्लै ने तूतीकोरिन में 'स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी' की स्थापना कर ब्रिटिश जहाजरानी को खुली चुनौती दी।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार की रणनीति के अंतर्गत विदेशी कपड़ों, चीनी, नमक और अन्य ब्रिटिश वस्तुओं का बड़े पैमाने पर परित्याग किया गया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश वस्त्रों के आयात में भारी गिरावट आई, किंतु बंगाल के मुस्लिम किसानों और बुनकरों ने इस आंदोलन में अत्यधिक उत्साह दिखाते हुए विदेशी वस्त्रों का प्रयोग पूर्णतः बंद कर दिया और केवल स्वदेशी वस्त्रों को ही अपनाया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के दमन और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने किया था, जिन्हें 'मौलवी फैजाबाद' भी कहा जाता है, और उनके दमन के लिए ब्रिटिश अधिकारी कर्नल नील और कैंपबेल ने अत्यंत आक्रामक रणनीतियाँ अपनाई थीं।
2. बरेली में रोहिलखंड के पूर्व शासक हाफिज रहमत खान के उत्तराधिकारी खान बहादुर खान ने विद्रोह का सफल नेतृत्व किया था, जिसे अंततः सर कॉलिन कैंपबेल ने भारी सैन्य बल के साथ पराजित किया।
3. इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह का नेतृत्व लियाकत अली ने किया था, जिन्हें बाद में ब्रिटिश सेनापति जनरल नील द्वारा पराजित किया गया और इस शहर पर अंग्रेजों ने पुनः पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 के अंत में दमदम छावनी में यह अफवाह जोर पकड़ चुकी थी कि नई 'एनफील्ड' राइफल में प्रयोग होने वाले कारतूसों के आवरण में गाय और सूअर की चर्बी का मिश्रण है, जिसे सैनिकों को लोड करने से पहले अपने दाँतों से काटना पड़ता था।
2. बैरकपुर छावनी की 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री (B.N.I.) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के आदेश के विरोध में क्रुद्ध होकर ब्रिटिश एडजुटेंट लेफ्टिनेंट बॉग और सहायक सार्जेंट मेजर ह्यूसन पर गोली चला दी थी।
3. मंगल पांडे को कोर्ट-मार्शल के पश्चात 8 अप्रैल 1857 को निर्धारित तिथि से पहले ही बैरकपुर में फाँसी पर लटका दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सेना के विरुद्ध देशव्यापी असंतोष और विद्रोह की आग भड़क उठी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी 'ब्राउन बैस' बंदूक के स्थान पर 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूस में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया।
2. बैरकपुर छावनी (34वीं नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के खिलाफ बगावत करते हुए ब्रिटिश अधिकारियों सार्जेंट ह्यूसन और लेफ्टिनेंट बो पर हमला कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई थी।
3. मंगल पांडे द्वारा विद्रोह की शुरुआत करने के तुरंत बाद बैरकपुर छावनी के सभी सैनिकों ने एक साथ मिलकर ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा कर दी थी और उसी दिन दिल्ली की ओर मार्च कर गए थे।
4. इस घटना के उपरांत ब्रिटिश सेना मुख्यालय ने 34वीं नेटिव इन्फैंट्री रेजिमेंट को भंग कर दिया और इसके कई सैनिकों को कठोर दंड देते हुए छावनी में अनुशासनहीनता के लिए सामूहिक रूप से निर्वासित कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित विभिन्न संगठनों और उनके विशिष्ट योगदानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' और 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने एकेश्वरवाद के प्रचार तथा मूर्तिपूजा और जातिगत कठोरताओं का पुरजोर विरोध किया, किंतु ब्रह्म समाज ने वेदों को पूरी तरह अपौरुषेय (ईश्वर प्रदत्त) मानने से इनकार कर दिया था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और पाखंड खंडनी पताका फहराते हुए मध्यकालीन पौराणिक मान्यताओं, अवतारवाद और मूर्तिपूजा का खंडन किया, साथ ही शूद्धि आंदोलन के माध्यम से हिंदू धर्म से धर्मांतरित व्यक्तियों की वापसी का समर्थन किया।
3. केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज के भीतर हुए पहले विभाजन के बाद देवेन्द्रनाथ टैगोर ने 'आदि ब्रह्म समाज' का गठन किया, जबकि केशव चंद्र सेन ने वर्ष 1878 में 'साधारण ब्रह्म समाज' की स्थापना की जो बाल विवाह के विरुद्ध अत्यंत प्रगतिशील और कठोर दृष्टिकोण रखता था।
4. प्रार्थना समाज की स्थापना वर्ष 1867 में बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा की गई थी, जिसे महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर जैसे विद्वानों का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ, और इसका मुख्य उद्देश्य अंतर-जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह तथा दलित जातियों के उत्थान के लिए कार्य करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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