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History of India
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मुगल काल में "परगना" का प्रमुख:

Detailed Explanation

शिक्दार प्रशासनिक प्रमुख था।
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→ वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित 'आज़ाद हिन्द फौज' (INA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बॉम्बे के गोवालिया टैंक मैदान में कांग्रेस के ऐतिहासिक अधिवेशन में अरुणा आसफ अली ने तिरंगा झंडा फहराया था, जबकि इसी दौरान उषा मेहता ने गुप्त रूप से 'कांग्रेस रेडियो' का संचालन कर आंदोलन की गतिविधियों का प्रचार प्रसार किया था। 2. जापान की सहायता से सिंगापुर में पुनर्गठित 'आज़ाद हिन्द फौज' (INA) के सर्वोच्च सेनापति के रूप में सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की अनंतिम सरकार ('आर्ज़ी हुकूमत-ए-आज़ाद हिन्द') की घोषणा की थी, जिसे धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) द्वारा तुरंत मान्यता दे दी गई थी। 3. भारत छोड़ो आंदोलन के शुरुआती चरणों में ही महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' (Do or Die) का अहिंसक मंत्र देते हुए यह स्पष्ट कर दिया था कि यदि आवश्यक हुआ तो इस जन आंदोलन का नेतृत्व देश के राजा-महाराजा और रियासतों के शासक भी प्रत्यक्ष रूप से संभाल सकते हैं। 4. आजाद हिंद फौज के सैनिकों पर ब्रिटिश सरकार द्वारा लाल किले (Red Fort) में ऐतिहासिक मुकदमे चलाए गए, जिनका बचाव करने के लिए कांग्रेस द्वारा गठित प्रतिरक्षा समिति के प्रमुख अधिवक्ताओं में भूलाभाई देसाई, तेज बहादुर सप्रू और जवाहरलाल नेहरू शामिल थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुई घटनाओं तथा उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जुलाई 1857 में दानापुर छावनी के 7वें, 8वें और 40वें रेजिमेंट के विद्रोही सिपाहियों ने सोन नदी पार कर शाहाबाद क्षेत्र में प्रवेश किया और आरा में वीर कुंवर सिंह के साथ मिलकर ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी। 2. पटना शहर में जुलाई 1857 में हुए विद्रोह का नेतृत्व पीर अली नामक एक पुस्तक विक्रेता ने किया था, जिसे ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फाँसी दे दी गई थी। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोह के दौरान यूरोपीय अधिकारियों पर हमले हुए, जहाँ छपरा में मोहम्मद हुसैन खान और मुजफ्फरपुर में कुछ स्थानीय असंतुष्ट जमींदारों ने विद्रोहियों का खुलकर समर्थन किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में विद्रोह का नेतृत्व करने वाली बेगम हजरत महल तथा 'डंका शाह' के नाम से प्रसिद्ध मौलवी अहमदुल्लाह शाह के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ की रेजिडेंसी के खिलाफ ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया था। 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने फैजाबाद और अवध क्षेत्र में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया था और चिनहट के युद्ध में हेनरी लॉरेंस के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को करारी शिकस्त दी थी। 3. ब्रिटिश सेना द्वारा लखनऊ पर पुनः अधिकार करने के पश्चात बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था और उन्हें पेंशन के साथ कोलकाता में रहने की अनुमति दे दी गई थी। 4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था, और अंततः पुवियाँ (पवैन) के एक स्थानीय जागीरदार के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों ने उनकी हत्या कर दी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज़ द्वारा झाँसी की घेराबंदी किए जाने पर, रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत वीरता के साथ किले की रक्षा की और अंत में अपने दत्तक पुत्र को पीठ पर बांधकर तात्या टोपे की सहायता से ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया। 2. ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने संयुक्त रूप से सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया को पराजित कर ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया, और सिंधिया ने भागकर अंग्रेजों की शरण ली। 3. ग्वालियर के पतन के अंतिम निर्णायक युद्ध (मुरार और कोटा-की-सराय का युद्ध) में ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज़ के विरुद्ध लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे वहाँ से बच निकलने में सफल रहे और बाद में एक स्थानीय जमींदार के विश्वासघात के कारण पकड़े गए। 4. तात्या टोपे ने ग्वालियर के पतन के बाद झाँसी वापस लौटकर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध पुनः एक विशाल सेना का गठन किया और आजीवन अंग्रेजों के विरुद्ध पारंपरिक मोर्चे पर डटे रहे, कभी आत्मसमर्पण नहीं किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा संचालित आज़ाद हिंद फौज (INA) के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया गया था, तब उषा मेहता और अन्य समाजवादी नेताओं ने बंबई में गुप्त रूप से 'कांग्रेस रेडियो' (Secret Congress Radio) का संचालन किया, जिसके माध्यम से बर्लिन और टोक्यो से प्रसारित होने वाले सुभाष चंद्र बोस के संदेशों को भी देश के कोने-कोने तक पहुँचाया जाता था। 2. जर्मनी में हिटलर के साथ हुए मतभेदों और यूरोप में युद्ध की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण सुभाष चंद्र बोस ने जर्मन पनडुब्बी U-180 की सहायता से खतरनाक समुद्री यात्रा पूरी की और मई 1943 में जापानी नियंत्रित दक्षिण-पूर्व एशिया (मादगासकर के तट से होते हुए सुमात्रा) पहुँचे, जहाँ उन्होंने रास बिहारी बोस से आज़ाद हिंद फौज की कमान अपने हाथ में ली। 3. आज़ाद हिंद फौज की एक विशिष्ट महिला इकाई — 'झांसी की रानी रेजीमेंट' — का गठन सिंगापुर में किया गया था, जिसका नेतृत्व डॉ. लक्ष्मी सहगल (कैप्टन लक्ष्मी) ने किया था, और इस रेजीमेंट ने इम्फाल-कोहिमा सैन्य अभियान के दौरान जापानी सेना के साथ मोर्चे पर प्रत्यक्ष युद्ध लड़ा था। 4. वर्ष 1945 के लाल किले के ऐतिहासिक मुकदमों (Red Fort Trials) के दौरान आज़ाद हिंद फौज के अधिकारियों (शाहनवाज खान, प्रेम सहगल और गुरदयाल सिंह ढिल्लों) के बचाव पक्ष के मुख्य वकीलों की समिति की अध्यक्षता भूलाभाई देसाई ने की थी, जिसमें तेज बहादुर सप्रू, जवाहरलाल नेहरू और कात्जू जैसे दिग्गज वकील भी शामिल थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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