मानव विकास के अध्ययन में आनुवंशिकी और पर्यावरण के सापेक्षिक प्रभाव को समझने के लिए किए जाने वाले 'जुड़वां अध्ययन' (Twin Studies) और 'गोद लेने के अध्ययन' (Adoption Studies) के वैज्ञानिक परिणामों का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा निष्कर्ष आधुनिक विकासात्मक मनोविज्ञान के दृष्टिकोण से सर्वाधिक प्रामाणिक है?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
मानव विकास में आनुवंशिकी (Nature) और पर्यावरण (Nurture) की बहस बाल विकास मनोविज्ञान का एक केंद्रीय विषय है। जुड़वां अध्ययन (Monozygotic and Dizygotic Twin Studies) और गोद लेने के अध्ययन (Adoption Studies) यह दर्शाते हैं कि विकास न तो केवल आनुवंशिकता का योगात्मक परिणाम है और न ही केवल पर्यावरण का। आधुनिक विकासात्मक मनोविज्ञान के अनुसार, आनुवंशिकता और पर्यावरण एक गुणितात्मक अंतःक्रिया (Multiplicative Interaction) के रूप में कार्य करते हैं। इसका अर्थ यह है कि जीन (Genes) किसी व्यक्ति के विकास की क्षमता, सीमा और संभावनाओं को तय करते हैं, जबकि पर्यावरण उन संभावनाओं को वास्तविक रूप देने में दिशा प्रदान करता है। विकल्प (C) इस वैज्ञानिक तथ्य को पूर्णतः और सटीक रूप से प्रस्तुत करता है कि दोनों कारक एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं और अंतःक्रियात्मक रूप से कार्य करते हैं।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- गुणितात्मक अंतःक्रिया: विकास = आनुवंशिकता × पर्यावरण (Development = Heredity × Environment), जो यह बताता है कि दोनों कास गुणात्मक व अन्योन्याक्रियात्मक है।
- विकल्प A का खंडन: वंशानुक्रम और वातावरण स्वतंत्र नहीं बल्कि सह-निर्भर हैं; शारीरिक और मानसिक दोनों पक्षों पर दोनों का संयुक्त प्रभाव पड़ता है।
- विकल्प B का खंडन: यद्यपि समरूपी जुड़वां अलग वातावरण में रहने पर उच्च बौद्धिक सहसंबंध दिखाते हैं, परंतु बुद्धि 'पूरी तरह' आनुवंशिक नहीं होती; पर्यावरण का भी महत्वपूर्ण प्रभाव होता है।
- विकल्प D का खंडन: उम्र बढ़ने के साथ पालक माता-पिता का प्रभाव बढ़ता अवश्य है, लेकिन जैविक माता-पिता के आनुवंशिक प्रभाव पूरी तरह से समाप्त नहीं होते।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास के विभिन्न मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों और अनुवांशिकता व पर्यावरण के अंतःसंबंधों के विस्तृत अध्ययन के लिए बाल विकास और आनुवंशिकता के सिद्धांत पर जाएं।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
परीक्षाओं में 'Nature vs Nurture' से संबंधित प्रश्न अक्सर भ्रामक भाषा में पूछे जाते हैं। शिक्षकों को यह समझना आवश्यक है कि कोई भी बालक कोरी स्लेट (Tabula Rasa) नहीं होता, और न ही उसकी हर विशेषता केवल उसके जीनों द्वारा पूर्वनिर्धारित होती है। जुड़वां बच्चों और गोद लिए गए बच्चों पर किए गए ऐतिहासिक अनुसंधानों (जैसे मिनेसोटा ट्विन स्टडी) ने यह प्रमाणित किया है कि आनुवंशिक रूप से समान होने पर भी भिन्न परिवेशीय परिस्थितियाँ अलग-अलग विकासात्मक परिणाम उत्पन्न कर सकती हैं। अतः शिक्षण प्रक्रिया में यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रत्येक छात्र की आनुवंशिक क्षमता अद्वितीय होती है और कक्षा का समृद्ध पर्यावरण उस क्षमता को सर्वोत्तम ढंग से विकसित करने में उत्प्रेरक का कार्य करता है।