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History of India
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औरंगजेब की धार्मिक नीति का विरोध किसने किया?

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शिवाजी महाराज ने मुगलों का विरोध किया।
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प्राचीन भारतीय इतिहास में बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों और उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैन धर्म के श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदायों के बीच हुए ऐतिहासिक विभाजन का मुख्य कारण पाटलिपुत्र में आयोजित प्रथम जैन संगीति के दौरान स्थूलभद्र और भद्रबाहु के अनुयायियों के बीच अनुशासन और वस्त्र पहनने की परंपरा को लेकर उत्पन्न मतभेद था। 2. बौद्ध धर्म की महायान शाखा और हीनायान (स्थविरवाद) शाखा के बीच मूल सैद्धांतिक अंतर यह है कि जहाँ महायान संप्रदाय बुद्ध को भगवान मानकर उनकी मूर्ति पूजा और बोधिसत्वों की परोपकारी अवधारणा में विश्वास करता है, वहीं हीनायान संप्रदाय बुद्ध को एक महापुरुष मानता है तथा व्यक्तिगत निर्वाण प्राप्ति पर जोर देता है। 3. बौद्ध धर्म के त्रिरिपिटक (सुत्तपिटक, विनयपिटक और अभिधम्मपिटक) में से 'विनयपिटक' मुख्य रूप से संघ के भिक्षु-भिक्षुओं के लिए आचार-संहिता और अनुशासन के नियमों का संकलन प्रस्तुत करता है। 4. महावीर स्वामी द्वारा प्रतिपादित जैन धर्म के मूल पंचमहाव्रतों में से 'ब्रह्मचर्य' का सिद्धांत पार्श्वनाथ द्वारा दिए गए चार व्रतों में अंतिम और पाँचवें महाव्रत के रूप में जोड़ा गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता के पीछे निहित संरचनात्मक और नेतृत्व संबंधी कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विद्रोहियों के पास ब्रिटिश साम्राज्य की विशाल सैन्य क्षमता और संगठित प्रशासनिक तंत्र के विकल्प के रूप में कोई सुसंगत राजनीतिक दृष्टिकोण, एक केंद्रीय एकीकृत कमान और भविष्य के भारतीय प्रशासनिक स्वरूप की स्पष्ट रूपरेखा का पूर्ण अभाव था। 2. देश के विभिन्न हिस्सों में नेतृत्व संभाल रहे प्रमुख क्षेत्रीय नेताओं (जैसे नाना साहब, बेगम हजरत महल और कुंवर सिंह) ने अखिल भारतीय स्तर पर एक मजबूत राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाने के बजाय मुख्य रूप से अपने स्थानीय हितों, खोई हुई रियासतों और पारंपरिक विशेषाधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। 3. शिक्षित मध्यम वर्ग, आधुनिक बुद्धिजीवियों और अधिकांश भारतीय रियाسतों के शासकों ने इस विद्रोह का खुलकर समर्थन किया था, जिसके कारण ब्रिटिश सेना को भारी जनविरोध का सामना करना पड़ा और अंग्रेजों को सामरिक रूप से पीछे हटना पड़ा था। 4. विद्रोहियों के पास न तो पर्याप्त वित्तीय संसाधन थे और न ही आधुनिक संचार और रसद (Logistics) की कोई कुशल प्रणाली, जिससे देश के विभिन्न केंद्रों के बीच किसी प्रकार का प्रभावी सैन्य समन्वय स्थापित नहीं हो सका। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के प्रशासनिक, कलात्मक और राजनीतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने वातापी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय को पराजित कर 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी और इसी के शासनकाल में महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकात्मथ रथ मंदिरों (रथ मंदिरों) का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। 2. बादामी के चालुक्य वंश के प्रसिद्ध शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका विस्तृत विवरण ऐहोल शिलालेख में मिलता है, जिसकी रचना रवि कीर्ति ने संस्कृत भाषा और कर्नाटक लिपि में की थी। 3. चोल सम्राट राजराजा प्रथम ने श्रीलंका (ईप्सित) पर आक्रमण कर उसके उत्तरी भाग को अपने साम्राज्य में मिला लिया था और वहाँ के राजा को पराजित कर अनुराधापुर शहर को अपनी राजधानी बनाया था तथा राजराजेश्वर (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण करवाया था। 4. वर्धन वंश के राजा हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान चीनी यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) भारत आया था, जिसने कन्नौज में आयोजित भव्य धार्मिक महासम्मेलन और प्रयाग के महाकुंभ (मोक्ष परिषद) का अपनी यात्रा वृत्तांत 'सी-यू-की' में सजीव वर्णन किया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? बौद्ध धर्म और जैन धर्म के प्रारंभिक विकास, दार्शनिक मान्यताओं तथा संगीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध धर्म के विपरीत जैन धर्म ने आत्मा के अस्तित्व को पूर्णतः अस्वीकार किया है और केवल 'पुद्गल' तथा 'अजीव' को ही वास्तविक तत्व माना है, जबकि महावीर स्वामी ने 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के सिद्धांत के माध्यम से ज्ञान की सापेक्षता का प्रतिपादन किया। 2. प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन राजगृह के सप्तपर्णी गुफा में अजातशत्रु के संरक्षण में हुआ था, जिसकी अध्यक्षता महाकस्सप ने की थी और इसी संगीति में बुद्ध के उपदेशों को 'सुत्तपिटक' और 'विनयपिटक' के रूप में संकलित किया गया था। 3. जैन धर्म की प्रथम संगीति पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में आयोजित की गई थी, जिसमें जैन ग्रंथों के प्राचीन बारह अंगों का संकलन किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, 'मलिक नक्शबंद', 'अरीज़-ए-मुमालिक' और 'दीवान-ए-मुस्तखराज' विभागों/पदों से जुड़े निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी द्वारा स्थापित 'दीवान-ए-मुस्तखराज' विभाग का मुख्य कार्य राजस्व बकाये की वसूली करना और लगान भ्रष्टाचार में लिप्त आगरदारों एवं मुकद्दमों के हिसाब की जाँच करना था। 2. सल्तनत काल में 'अरीज़-ए-मुमालिक' सैन्य विभाग का प्रमुख होता था, जिसके जिम्मे सैनिकों का हुलिया रखना, घोड़ों को दागना (दाग प्रथा) और सैनिकों की समय-समय पर प्रत्यक्ष समीक्षा करना शामिल था। 3. गयासुद्दीन तुगलक ने अपने शासनकाल में 'मलिक नक्शबंद' के अधीन एक विशेष कृषि विभाग 'दीवान-ए-कोही' की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य किसानों को प्रत्यक्ष तकावी (सौंदार) ऋण देकर बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाना था। 4. सल्तनत काल के दौरान सल्तनत की सेना में वंशानुगत सैनिकों की भर्ती को प्रोत्साहित करने और सेना की युद्धक क्षमता को मजबूत करने का श्रेय फिरोजशाह तुगलक को जाता है, जिसने सैनिकों के वेतन में नकद भुगतान की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर भूमि अनुदान (इक्ता) देना अनिवार्य कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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